सत्ता मिली तो आपे से बाहर हो रहा पार्षद रवि भगत फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) कार्यालय के नाम पर सार्वजनिक मार्ग पर कब्जा जमाने वाला रवि भगत पार्षद बनते ही आस पड़ोस में रहने वालों के खिलाफ ही सत्ता का बेजा इस्तेमाल करने लगा है। करे भी क्यों न, जब लोग ऐसे घटिया-बिकाऊ भ्रष्ट और गंदे व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि बनाएंगे तो ऐसा ही होगा। जिस पड़ोसी ने उसे वोट देकर जिताया, पार्षद बनने के बाद उसी के घर की दीवार तोड़ कर बिजली का खंभा लगवा दिया। बेचारा टूटी दीवार सही नहीं करवा पाया तो रवि ने निगम के खाऊ चेलों से कह कर उसका 25 हजार रुपये का चालान कटवा दिया। बताया जा रहा है कि पार्षद ने खास चेले चंदर से थाने मेें पीडि़त मोहन भाटिया के खिलाफ जान से मारने की धमकी देने की शिकायत दिला दी, दबाव पड़ते ही दोनों पक्षों में समझौता हो गया। सत्ता के आगे मजबूर बेचारा गरीब पार्षद के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। अब कहता फिर रहा है कि गलतफहमी में पार्षद के खिलाफ आरोप लगाया था।
डबुआ प्याली मार्ग पर न्यू जनता कॉलोनी की जिस गली में पार्षद रवि भगत का कार्यालय और काली मंदिर है, उसी के नुक्कड़ पर बन्नूवाल बिरादरी के मोहन भाटिया की वेल्डिंग की दुकान व ऊपर घर है। दुकान का मुंह तो सड़क की ओर है लेकिन घर का रास्ता गली में है। दुकान से घर जाने के लिए उन्होंने करीब चार फीट का रास्ता अंदर से ही बना रखा है जिसकी दीवार गली की ओर है, यह दीवार किसी भी तरह का अतिक्रमण करके नहीं बनाई गई थी, बल्कि मोहन भाटिया की अपनी जमीन पर बनी हुई है। मोहन भाटिया का आरोप है कि करीब ढाई महीने पहले रवि भगत ने सुबह साढ़े पांच-छह बजे के बीच जबरन उनकी गली वाली दीवार गिरवा दी।
उन्होंने विरोध करने का प्रयास किया तो पार्षद ने कार्बाइन वाले पुलिस के गनर का डर दिखा कर उन्हें चुप करा दिया। रवि भगत की इस ज्यादती से स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त हो गया। लोगों का कहना था कि सुबह साढ़े पांच बजे कौन सा प्रशासन बिना नोटिस दिए किसी का घर तोड़ सकता है। भाटिया का आरोप है वह दोबारा दीवार खड़ी करवाने के लिए रुपयों का इंतजाम कर रहे थे कि भगत ने जबरन उनकी जमीन में बिजली का खंभा गड़वा दिया। सार्वजनिक हित का काम होने के कारण उन्होंने खंभा लगने का ज्यादा विरोध नहीं किया।
काली के भगत रवि को उन पर दया न आई और नगर निगम में अपने चिंटू कर्मचारियों को भेज कर मोहन भाटिया पर दीवार खड़ी करवाने का दबाव डलवाने लगा। आरोप है कि भगत के इशारे पर बीते शनिवार को नगर निगम के कर्मचारी आए और कचरा व मलबा फैला होने का आरोप लगाकर 25 हजार रुपये चालान की पर्ची थमा कर चलते बने। वेल्डिंग का छोटा मोटा काम कर किसी तरह परिवार चला रहे मोहन भाटिया पार्षद द्वारा पहुंचाई गई आर्थिक चोट से परेशान हैं। स्थानीय लोगों ने कहा कि केवल मोहन भाटिया ही भगत के भुक्तभोगी नहीं है, आसपास के रहने वालों पर भी वह अपने गनर की धौंस दिखा कर टोरा जमाता रहता है। गली सार्वजनिक रास्ता है लेकिन भगत ने इस पर पूरा कब्जा कर रखा है यहां तक के स्थायी शामियाना लगा कर और सड़क पर कुर्सी मेज आदि डाल कर उसे कार्यालय परिसर की तरह इस्तेमाल करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निगम के कर्मचारियों को भाटिया के घर की गिरी हुई दीवार में तो मलबा नजर आ गया लेकिन पार्षद द्वारा पूरी गली पर किया गया जबरन कब्जा और गली के मुहाने पर अवैध रूप से लगाया गया गेट नजर नहीं आया।
आए भी कैसे जब भगत महोदय अवैध कब्जे, अवैध निर्माण आदि की पहचान कर निगम के इन्हीं कर्मचारियों को मोटी कमाई के रास्ते दिखाते हैं और खुद भी हिस्सापत्ती वसूलते हैं। भ्रष्टाचार और लूट कमाई में चोली दामन की तरह से भगत और निगम कर्मचारी अपने कमाई के स्रोत के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेंगे। रवि भगत अगर सत्ता पाने के बाद आपे से बाहर हो रहा है और पड़ोसियों के लिए परेशानी का सबब बना है तो इसके जिम्मेदार वो खुद भी हैं, चुनाव के समय तो सबने प्रत्याशी नहीं पार्टी देखी थी। इसी वार्ड से गरीब, मज़दूर शोषित वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले नरेश कुमार को अंधभक्त जनता ने नकार कर मोदी के प्रतिनिधि भगत को चुना है तो अब अगले चुनाव तक उसके कारनामों को भी भुगतने के लिए तैयार रहें। लोकतंत्र को भीड़तंत्र बनाने वाली जनता को यही परिणाम भुगतने पड़ते हैं। निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा को तो कम से कम अपने पद व रुतबे की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए, उन्हें समझना चाहिए कि वे संविधान की नौकरी कर रहे हैं। भगत जैसे नालायक के जड़ खरीद गुलाम बन कर नौकरी न करें, आईएएस अफसर बने हैं तो कम से कम इस पद की मिट्टी तो पलीद न कराएं।