फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे महाभ्रष्ट आईएएस डी सुरेश को पदोन्नति चाहिए। दरअसल, तीस साल की सेवा पूरी होने के कारण वह एश्योर्ड कॅरियर प्रोग्रेशन का लाभ लेना चाहते हैं लेकिन 2019 में गुडग़ांव में हुए जमीन घोटाले में मुख्य अभियुक्त होने के कारण पदोन्नति रुकी हुई है। ऐसे में उन्होंने पदोन्नति पाने के लिए सेंट्रल एडिमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) में याचिका दायर की है। पदोन्नति दिलाने के लिए उनके शुभचिंतक विक्टिम कार्ड खेल कर सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि उन्होंने दलित आईपीएस वाई पूरन कुमार की आत्महत्या के मामले में परिवार को इंसाफ दिलाने की आवाज उठाई थी, इसलिए पदोन्नति रोकी गई है। वे ये नहीं बताते कि एक बड़े जमीन घोटाले में तत्कालीन डीजीपी शत्रुजीत कपूर उन्हें हवालात में ठोंकने जा रहे थे तो पूर्व सीएम खट्टर ने बड़ी मुश्किल से बचाया था।
शातिर डी सुरेश पर गुडग़ांव हूडा प्रशासक रहते हुए 2019 में निजी शिक्षण संस्था को डेढ़ एकड़ जमीन कौडिय़ों के दाम पर देने का आरोप लगा था, इसमें सरकारी खजाने को करीब 25 करोड़ का नुकसान हुआ था। माना जाता है कि बेशकीमती जमीन कौडिय़ों के दाम देने के लिए मोटी डील हुई थी। इसी तरह भ्रष्टाचार के दो और मामलों में डी सुरेश की स्पष्ट भूमिका पाई बताई जाती है। तत्कालीन एंटी करप्शन ब्यूरो एसीबी प्रमुख शत्रुजीत कपूर के आदेश पर एसीबी गुडग़ांव ने इन तीनों केस में एफआईआर दर्ज कर ली थी। लेकिन भ्रष्टाचारी अधिकारियों के संरक्षक की तरह तत्कालीन सीएम खट्टर ने मामले को ठंडे बस्ते में डलवा दिया, नतीजा यह हुआ कि दो मामलों की जांच लगभग बंद सी हो गई, केवल शिक्षण संस्था वाले मामले की जांच शुरू हुई वह भी धीमी गति से, क्योंकि वरिष्ठ आईएएस होने के नाते डी सुरेश दांव पेंच में उलझाता रहा। यहां तक कि उसने एसीबी महानिदेशक शत्रुजीत कपूर पर छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए सरकार को चिट्ठी भी लिखी थी।
सीएम खट्टर को जब लगा कि भ्रष्ट डी सुरेश को बचाने के चक्कर में उनकी सरकार की छवि खराब हो रही है तो मजबूरी में जुलाई 2023 को केस चलाने की अनुमति दी थी। तब से मामला न्यायालय में विचाराधीन है लेकिन चालबाजी में माहिर डी सुरेश के कारण केस आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इधर, केस फाइनल होने तक सरकार ने पदोन्नति आदि रोक रखी थी। इसके खिलाफ डी सुरेश ने बीते सप्ताह कैट में अपील दायर कर तीस साल की सेवा पूरी होने पर अतिरिक्त प्रमुख सचिव (एसीएस) बनाए जाने की मांग की है। उन्होंने यह पदोन्नति जनवरी 2025 से और तब से ही वेतन का एरियर ब्याज सहित दिलाए जाने की मांग की है।
जानकार कहते हैं कि डी सुरेश ने सत्ता में सब सेटिंग-गेटिंग करने के बाद कैट में अपील दायर की है। यह सच किसी से छिपा नहीं है कि खट्टर की तरह ही नायब सैनी भी भ्रष्टाचार में फंसे वरिष्ठ आईएएस अफसरों के संरक्षक साबित हो रहे हैं। सरकार की छवि सुधारने के लिए भले ही मोदी-शाह ने खट्टर को हटा कर नायब सैनी को सीएम बना दिया था लेकिन दोनों की कार्यशैली में कोई फर्क नहीं है। खट्टर तो एसीबी की जांच ठंडे बस्ते में डलवा देता था नायब उससे भी आगे निकल गए। अगस्त 2024 में एसीबी को दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी थी। बता दें कि कैट ने चार सप्ताह में मामले का निपटारा करने का आदेश दिया है। जानकारों का मानना है कि कैट के आदेश का हवाला देकर सरकार भ्रष्टाचार शिरोमणि डी सुरेश को एसीएस बना देगी। फिलहाल गेंद सरकार के पाले में है देखना यह है कि वह पदोन्नति देकर भ्रष्ट अधिकारियों के हौसले बढ़ाएगी या फिर कैट में जवाब दाखिल करती है।