पार्षद रवि भगत बना भ्रष्टाचारी जेई परवेज आलम का दलाल

पार्षद रवि भगत बना भ्रष्टाचारी जेई परवेज आलम का दलाल
May 06 03:07 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) वार्ड नंबर तीन से पहली बार पार्षद बने खुद को काली का भगत बताने वाले रवि भगत भ्रष्टाचारी जेई परवेज आलम के समर्थन और बचाव में उतर आए हैं। एक ओर उन्होंने परवेज आलम की वकालत करते हुए दावा किया कि उसने मुजेसर गांव में लाला जी की अवैध दुकान-मकान के निर्माण में एक रुपया नहीं लिया है। दूसरी ओर उन्होंने मज़दूर मोर्चा के संवाददाता से उनके इलाके में होने वाले अवैध निर्माण की सौदेबाजी करते हुए प्रति निर्माण से दस हजार रुपये कमाई का प्रस्ताव भी रख दिया। उनके अनुसार अवैध निर्माण के लिए वसूली जेई परवेज आलम करेगा और संवाददाता, पार्षद, और उनके दलाल चंदर तंवर को आंख-मुंह बंद रखने के लिए दस-दस हजार रुपये का चढ़ावा चढ़ाएगा। इसके लिए जल्द ही जेई परवेज आलम के साथ पार्षद के खास कमरे में बैठक रखने का वादा किया गया।

मुजेसर गांव में प्रमोद लाला नामक व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से दुकान-मकान का निर्माण कराए जाने की खबरें मज़दूर मोर्चा पिछले अंकों में लिखता आ रहा है। नगर निगम सूत्रों के अनुसार अवैध निर्माण के लिए प्रमोद लाला ने जेई परवेज आलम को साधा था। जेई की मांग छह लाख थी, बाद में सौदा चार लाख रुपयों में तय हुआ था। मज़दूर मोर्चा में खबर प्रकाशित होने के बाद परवेज आलम को मजबूरी में दिखावे भर को बिल्डिंग सील करनी पड़ी थी लेकिन निर्माण भीतर-भीतर जारी रहा। मामला क्योंकि लेनदेन का था, इसलिए सील तोड़ कर फिर से खुलेआम इसमें काम शुरू करा दिया गया।

इसी के साथ मज़दूर मोर्चा ने ‘भाजपाई पार्षद रवि भगत को पसंद हैं सजातीयों की अवैध मीट-चिकन की दुकानें’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसमें बताया गया था कि मुजेसर में अवैध मीट-चिकन दुकानें हटाए जाने पर पार्षद रवि भगत ने नगर निगम के एसडीओ और जेई को बुरी तरह धमका कर कार्रवाई रुकवा दी थी। साथ ही डांटते हुए कहा था कि आज के बाद मेरे इलाके में कोई तोडफ़ोड़ नहीं होगी, यदि करनी है तो पहले मुझसे इजाजत लेनी होगी। बिना इजाजत कार्रवाई की तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। दरअसल, उन्होंने निगम अधिकारियों पर यह शर्त कमाई करने के लिए ही लगाई थी।

समाचार प्रकाशित होने के बाद उन्होंने मज़दूर मोर्चा के संवाददाता से संपर्क किया और अपने कार्यालय पर बुलाया। यहां काफी देर अपने काली भक्त और धर्मभीरु होने की दलीलें देेने के बाद वो असली मुद्दे पर आ गए। बोले जेई परवेज आलम ने प्रमोद लाला द्वारा करवाए जा रहे अवैध निर्माण के लिए एक पैसा भी नहीं लिया है, उसने इसी कार्यालय में आकर अपनी बच्ची की कसम खाई है। इस पर संवाददाता ने पूछा कि अगर पैसा नहीं लिया तो सील तोड़ कर दोबारा काम कैसे किया जा रहा है। सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि सील जेई आलम ने नहीं खुलवाई है, प्रमोद लाला काम कर रहा है। समझने वाली बात यह है कि नगर निगम प्रशासन द्वारा लगाई गई सील तोडऩे पर प्रमोद लाला के खिलाफ एफआईआर कराई जानी चाहिए, इसके विपरीत उसे निर्माण की पूरी छूट दी गई है। यहां तक कि संयुक्त आयुक्त करन सिंह को सोमवार को इसकी सूचना दी गई लेकिन निर्माण कार्य नहीं रुका, मज़दूर मोर्चा पिछले अंकों में प्रकाशित कर चुका है कि परवेज आलम प्रमोद से संयुक्त आयुक्त करन सिंह के नाम पर भी यह कहते हुए नजराना वसूल ले गया कि ज्वाइंट साहब को भी साधना पड़ेगा। इसके बाद ही सील तोड़ी गई और काम धड़ल्ले से चालू है।

जेई परवेज आलम की वकालत करते हुए पार्षद जी सीधे मुद्दे पर आ गए, बोले अपनी दम पर पार्षद बना हूं, गाड़ी लेकर दौड़ता रहता हूं-खर्चा होता है। भाईचारे वाली बात यह है कि अगर मेरे इलाके में कोई अवैध निर्माण होता है, या सील तोड़ी जाती है तो दस हजार आपके, दस हजार मेरे और दस हज़ार मेरे साथी चंदर तंवर के। इतना ठीक है, तो मैं एक-दो दिन में परवेज आलम को इसी कार्यालय में बुला लेता हूं, उसे बता दिया जाएगा, सब भाई बैठ कर फाइनल कर लेंगे। यानी इलाके में होने वाले अवैध निर्माण की वसूली वही जेई परवेज आलम करेगा जिसने प्रमोद लाला से एक पैसा नहीं लेने की कसम पार्षद के सामने खाई थी, और इसके बाद पार्षद समेत सबको हिस्सापत्ती भी सौंपेगा। पाठकों को सबकी ईमानदारी का अहसास तो हो ही गया होगा।

दरअसल, जब भ्रष्टाचार सत्ता में ऊपर ही व्याप्त हो तो फिर निचले स्तर के जनप्रतिनिधि इससे अलग कैसे हो सकते हैं। सब जानते हैं कि नगर निगम चुनाव सत्तापक्ष का ही होता है। ऐसे में जीत सुनिश्चित देख एक एक सीट पर दस-दस भाजपाई टिकट के दावेदार हों, तो ऊपर बैठे आका को बहुत मोटा नजराना देकर ही टिकट हासिल किया जा सकता है। टिकट खरीदने के बाद मंत्री, विधायकों को खुश करने में भी अच्छी रकम लुटानी पड़ती है, प्रचार-प्रसार और वोट पक्के करने का तगड़ा खर्च अलग से होता है।
खुद को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की करीबी बताने वाली पचास लाख रुपये खर्च कर पार्षद बनीं गायत्री देवी हों या ओल्ड फरीदाबाद इलाके की पार्षद का पति या रवि भगत या अन्य, जब लाखों रुपये खर्च कर चुनाव जीतते हैं तो वसूली निगमकर्मियों के माध्यम से जनता से ही तो करेंगे। एक हमले के बाद पुलिस द्वारा मिले गनमैन का दिखावा तो पार्षद जी जनता में वीआईपी हनक बनाने के लिए करते ही हैं। ऐसे में रवि भगत का जेई परवेज आलम का बचाव और समर्थन करना ठीक दुधारू गाय को पुचकार कर रखने जैसा ही है।

दरअसल, जब तक अंधभक्ति में डूबी जनता धर्म, जाति के आधार पर अपना सेवक और जवाबदेह नहीं बल्कि प्रशासक चुनती रहेगी तब तक उसकी खून पसीने की गाढ़ी कमाई इसी तरह लूटी-बांटी जाती रहेगी, इस पर जागरूक जनता ही अंकुश लगा सकती है। पार्षद रवि भगत व उन जैसे भ्रष्टाचार समर्थकों को समझ लेना चाहिए कि मज़दूर मोर्चा आम जनता के हित और भ्रष्टाचार के विरुद्ध मोर्चा खोले हुए है और वंचित समाज की आवाज उठाता रहेगा।

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