ऑटो मार्केट: गिरे मनोबल से नहीं लड़ी जाती लड़ाई

ऑटो मार्केट: गिरे मनोबल से नहीं लड़ी जाती लड़ाई
October 25 05:30 2025

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) तिकोना पार्क ऑटो मार्केेट की अस्सी वैध दुकानें गूजर-अदलखा की लालच की भेंट चढ़ ही जाएंगी, वजह दुकानदारों के बीच एकता नहीं बन पाना है। एकता तो दूर, अदलखा द्वारा अच्छी लोकेशन पर दुकान दिए जाने के प्रलोभन के भ्रम में खुद को विधायक का दाहिना हाथ मानने वाले कुछ दुकानदार तो मार्केट तुड़वाने को उतावले दिख रहे हैं तो कुछ विरोध करने की हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहे हैं और किस्मत का लिखा मान कर दुकानें तोडऩे की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

हालांकि, अधिकतर दुकानदार नहीं चाहते कि दुकानें तोड़ी जाएं बावजूद इसके विरोध करने की हिम्मत कोई नहीं कर पा रहा। बताया जा रहा है कि दुकानें बचाने के बजाय अधिकतर दुकानदार मार्केट प्रधान देवेंद्र रत्रा को हटा कर किसी दूसरे को प्रधान बनाने की तैयारी कर रहे हैं। एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लगता है विधायक धनेश अदलखा मार्केट प्रधान देवेंद्र रत्रा से नाराज है, क्योंकि रत्रा ने विधायक का खुल कर विरोध किया था, यहां तक उनसे बहस कर डाली थी। इन लोगों का मानना है कि देवेंद्र रत्रा के हटने से विधायक का गुस्सा शांत हो जाएगा। इस सवाल पर कि क्या प्रधान बदलने से विधायक दुकानें नहीं तुड़वाएगा पर इन लोगों का कहना था कि वे लोग अदलखा से एक बार मिल चुके हैं, उसने स्पष्ट किया कि दुकानें तोड़ कर पीछे पेटी मार्केट में बनवाई जाएंगी, उनमें दी जाएंगी। यानी प्रधान कोई भी रहे विधायक दुकानें तुड़वा कर ही रहेगा। हालांकि नया प्रधान कौन होगा इस पर दुकानदार एकमत नहीं हो पा रहे हैं लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि जो नया प्रधान बनेगा उसमें देंवेंद्र रत्रा की तरह विधायक से लडऩे वाला जज्बा नहीं होगा। यदि वह भी विधायक की गोद में जा बैठा, और उसे भी अदलखा ने अच्छी लोकेशन पर दुकान दिलाने का प्रलोभन देकर अपने साथ मिला लिया तो दुकानें टूटना तय हैं।

एक दुकानदार का कहना है कि मार्केट के ही कुछ लोग अदलखा के चिंटू हैं, ये चिंटू बड़ी दुकानवालों के पास जाकर उनसे औने पौने दाम मेंं अपनी संपत्ति बेचने का ऑफर विधायक की ओर से लेकर आ रहे हैं। इन दावों में यदि सच्चाई है तो इसका सीधा सा अर्थ है कि अदलखा को भी मालूम है कि पूर्णतया वैध रूप से बनीं इन दुकानें को जबरा जबरी खाली नहीं कराया जा सकता। ऐसे में पैसे का प्रलोभन देकर कुछ दुकानें खाली करवा के तुड़वाने की कार्रवाई कर बाकी दुकानदारों को मानसिक दबाव मेें ले लेगा और मार्केट खाली हो जाएगी।

सुधी पाठकों को गतांक में बताया जा चुका है कि गूजर-अदलखा ऑटो मार्केट और पेटी मार्केट की जगह पर मॉल बनाने के सपने देख रहे हैं, इसी के मद्देनजर एक महीने पहले पेटी मार्केट खत्म कराई गई, बीते सप्ताह मोटर मार्केट के सामने मैदान में बैठे मेकेनिकों के खोखे हटवा कर वहां पार्किंग बनाने की तैयारियां की जा रही हैं। जानकार कहते हैं कि यह पार्किं ग मोटर मार्केट के लिए नहीं बल्कि भविष्य में बनने वाले मॉल के लिए बनवाई जा रही है। गूजर-अदलखा के ड्रीम प्रोजेक्ट में मोटर मार्केट की अस्सी दुकानें आड़े आ रही हैं इसलिए उन्हें हटाने के लिए साम-दाम-दंड-भेद के दांव चल रहा है। सब अच्छी तरह जानते हैं कि लीज प्रॉपर्टी होने के कारण अदलखा कानूनी तौर पर इसे खाली करवाने की हैसियत नहीं रखता लेकिन सत्ता का बेजा इस्तेमाल कर कुछ भी करने को उतारू है, बावजूद इसके सब मिलकर विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। कई दुकानदार यह तो कहते सुने गए कि नगर निगम का असली मालिक तो कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल है, यदि निगमायुक्त से कह देगा कि आटो मार्केट नहीं टूटेगी तो अदलखा कुछ नहीं कर पाएगा। आश्चर्य की बात यह है कि इतनी जानकारी होने के बाद भी ये दुकानदार विपुल गोयल से मिलने की बजाय कृष्ण पाल के प्यादे अदलखा की ही मिन्नत चिरौरी करने में लगे हैं। जबकि इन सबको अच्छी तरह से मालूम है कि अदलखा ने दुकानें तोडऩे के अपने इरादे से पीछे हटने से इनकार कर दिया है। यह भी कि पहले तो वह पीछे दुकानें देने की बात कर रहा था लेकिन अब मीडिया के सामने इससे भी इनकार करता देखा जा रहा है। यानी दुकानें टूटेंगी लेकिन मिलेंगी या नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं है।

अब देखना यह है कि मालिक अपनी दुकानें बचाने के लिए एकजुट होकर अदलखा के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन करेंगे या फिर उसे माला पहना कर अपने सहित करीब आठ सौ परिवारों की रोजी-रोटी उजड़ते देखना पसंद करेंगे। यदि उन्होंने एकता नहीं दिखाई तो अदलखा के लिए उन्हें उजाड़ कर अपना लक्ष्य हासिल करना आसान हो जाएगा।

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Mazdoor Morcha
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