मज़दूर मोर्चा ब्यूरो जिस तरह से हरियाणा में पूर्व सीएम खट्टर हर जि़ले में मेडिकल कॉलेज खोलने के खोखले दावे करते रहे, उसी तरह प्रधानमंत्री मोदी देश भर में 10,023 सीटें बढ़ा दिए जाने का भ्रामक दावा ठोक रहे हैं। बढ़ाई गई इन सीटों के लिए जिस तरह के फर्जी मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं, उस तरह के कॉलेज खोल कर दस हजार तो क्या दस लाख सीटें भी बढ़ाई जा सकती हैं। मनुष्य की जिंदगी से जुड़ी डॉक्टरी की पढ़ाई एक गम्भीर विषय होने के नाते किसी भी मेडिकल कॉलेज को एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) के कड़े परीक्षण से गुजरना होता है। मोदी सरकार ने बेशक इसकी शर्तों को पहले की अपेक्षा काफी ढीला कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद भी सरकारी मेडिकल कॉलेज इसके परीक्षण में खरे न उतरने के बावजूद धड़ाधड़ चालू कर दिए गए हैं।
करीब चार वर्ष पहले छांयसा स्थित अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज द्वारा एनएमसी की कोई भी शर्त पूरी किए बिना इसे चालू कर दिया गया था, ये शर्तें आज तक भी पूरी नहीं हो पाई है। इसी वर्ष हरियाणा के भिवानी व नारनौल स्थित 100-100 सीटों वाले उन दो मेडिकल कॉलेजों को चालू कर दिया गया है जिन्हें एनएमसी ने चलने लायक नहीं समझा था। इसके अलावा ईएसआई कॉर्पोरेशन के 50-50 सीटों वाले उन 10 मेडिकल कॉलेजों को भी चालू कर दिया गया है जिन्हें एनएमसी ने स्वीकृति प्रदान करने से इनकार कर दिया था।
यह हालत तो सरकारी संस्थानों की है प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की क्या दुर्दशा होगी आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है। जाहिर है इस तरह के फर्जी मेडिकल कॉलेज खट्टर व मोदी के आंकड़ेबाजी का खेल तो पूरा कर देंगे परन्तु इससे पढ़ कर निकलने वाले डॉक्टर मरीजों का कैसा इलाज कर पाएंगे समझना मुश्किल नहीं है। ये डॉक्टर इलाज के नाम पर मरीजों के जीवन से खिलवाड़ ही तो करेंगे।