राव नरबीर ने धनेश से पूछा तू वही अदलखा है जिसके खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज हुई थी

राव नरबीर ने धनेश से पूछा तू वही अदलखा है जिसके खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज हुई थी
November 24 09:47 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) धनेश अदलखा भले ही विधायक बन गए लेकिन नगर निगम और हरियाणा फार्मेसी काउंसिल में किए गए घपले-घोटाले उनकी पहचान बन चुके हैं। बताया जा रहा है कि पहली बार विधानसभा की बैठक में शामिल होने पहुंचे अदलखा को दूसरे विधायकों को अपना परिचय देना भारी पड़ गया, अधिकतर ने उन्हें पूर्व में किए गए भ्रष्टाचार के कारनामों को याद कर उन्हें पहचाना। बेचारा अदलखा विधायक बनने की खुशी से ज्यादा विधायकों में अपने काले अतीत और नीचताओं की चर्चा के कारण खिसियाया हुआ कोने ढूंढता नजऱ आया।

हरियाणा विधानसभा का शीतकालीन सत्र 13 नवंबर से शुरू हुआ। भाजपा सूत्रों के अनुसार बैठक के बाद लंच ब्रेक में पीडब्ल्यूडी मंत्री राव नरबीर, मंत्री विपुल गोयल, मंत्री राजेश नागर और मंत्री गौरव गौतम एक साथ बैठ कर भोजन कर रहे थे। भोजन के बीच चारों के बीच किसी मुद्दे पर गंभीर बातचीत हो रही थी। इसी दौरान बडख़ल विधायक धनेश अदलखा भी वहां पहुंच गए। राव नरबीर से मुखातिब होकर अपना परिचय दिया कि नमस्कार मैं बडख़ल विधायक धनेश अदलखा। उनका नाम सुनते ही राव नरबीर लगभग चौंकते हुए बोले तू वही अदलखा है जिसके खिलाफ फ्रॉड का केस दर्ज हुआ था। फिर आश्चर्य जताते हुए बोले अरे जनता ने तुझे भी विधायक बना दिया ! राव नरबीर की बात सुन कर हक्का बक्का धनेश अदलखा झेंप मिटाते हुए बोले, नहीं नहीं बाबू जी ऐसी बात नहीं है। इस पर नरबीर ने कहा कि नहीं नहीं कि कोई बात नहीं, ये तो मेरी समझ से बाहर की बात है कि तेरे को भी जनता ने विधायक बना दिया। धनेश खिसियाए से खड़े हो गए और कोई जवाब नहीं दे सके। उन लोगों की बातें सुन रहे सफींदो के विधायक राम कुमार गौतम जिन्हें सम्मान में दादा कहकर संबोधित किया जाता है, भी आ गए। धनेश की ओर तिरस्कार भरी नजरों से देखते हुए बोले कि जनता का कुछ पता नहीं कि किस फ्रॉडिये को जिता दे। इसकी वजह से मेरे दोस्त महेंद्र प्रताप का बेटा हार गया, जनता ऐसे लोगों को भी जिता सकती है लोकतंत्र का इससे बड़ा मज़ाक क्या हो सकता है। एक के बाद एक बेइज्ज़ती होने पर धनेश ने वहां से चुपचाप खिसकना ही बेहतर समझा, और फिर वह किसी अन्य विधायक से मिलकर अपना परिचय देने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाए। विधानसभा की कैंटीन में हुई घटना के चर्चे राजनीतिक गलियारों में खासकर भाजपाइयों के बीच चटकारे ले लेकर किए जा रहे हैं।

राव नरबीर और दादा राम कुमार गौतम को जनता के चुनाव पर आश्चर्य जताने से ज्यादा भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस का ढिंढोरा पीटने वाले मनोहर लाल खट्टर और शुचिता के गीत गाने वाले संघी भाजपाइयों के दोगलेपन पर भी चकित होना चाहिए। धनेश को टिकट तो आपकी ही तथाकथित अनुशासित पार्टी के ?’अति सभ्य व सदाचारी’ पदाधिकारियों ने ही तो दिया था। धनेश ने बडख़ल से टिकट पाने के लिए भ्रष्टाचार से कमाई गई अकूत संपित्त की थैलियों का मुंह खोल ही रखा था। खट्टर-गूजर से लेकर आला कमान ने धनेश की करतूतों के बावजूद उसे टिकट मुफ्त में तो दिया- दिलाया नहीं होगा। रही जनता की बात तो उसमें से अधिकतर की आंखों पर आपकी ही पार्टी ने जातिवाद, संप्रदायवाद, बिरादरीवाद, क्षेत्रवाद का चश्मा पहना कर अंधभक्ति में डुबो रखा है। जागरूक जनता जो आपकी भड़काऊ और देश विरोधी भावना का तिरस्कार कर आपको सत्ताच्युत करना चाहती है तो उसके लिए आपने ईवीएम से लेकर चुनाव आयोग तक को सेट कर रखा है।

देश की स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था कि यदि भारत को आजादी दे दी गई तो एक समय बाद वहां की सत्ता दुष्टों, बदमाशों और लुटेरों के हाथों में चली जाएगी। इस देश के सभी नेता ओछी क्षमता वाले और भूसा किस्म के लोग होंगे। उन्होंने तो यहां तक कहा था कि ये हवा और सांस लेने पर भी टैक्स लगाएंगे। आजादी के 70 साल बाद भाजपा की डबल इंजन सरकारों में उनकी यह चिंता चरितार्थ होती नजऱ आ रही है।

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Mazdoor Morcha
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