फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नई दिल्ली स्थित ईएसआई कॉर्पोरेशन मुख्यालय में बैठ कर वरिष्ठ डॉक्टरों को हड़काने व बेइज्जत करके संतुष्ट होने वाली मेडिकल कमिश्नर डॉ.कमलेश हरीश बीते सप्ताह पूरी बेशर्मी से अपना इलाज कराने कॉर्पोरेशन के स्थानीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचीं। अस्पताल के जिन डॉक्टरों से वे अपने कार्यालय में बैठ कर बद्तमीजी करती रही हैं उन्हीं के सामने वे पहले मेडिसन विभाग में पेश हुईं, फिर उनके द्वारा जांच प्रक्रिया के लिए उन्होंने इस वीआईपी मरीज़ को एमआरआई कराने के लिए रेडियोलॉजी विभाग में भेज दिया।
बेशर्मी की दूसरी बात यह है कि वे अपनी नाक के नीचे चल रहे कॉर्पोरेशन के ही बसई दारापुर स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल में न जाकर इतनी दूर यहां फरीदाबाद क्यों आईं? विदित है कि यहां के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्टाफ की नियुक्तियों से लेकर तमाम तरह की खरीदारियों की राह में रोड़े इन्हीं के द्वारा अटकाए जाते रहे हैं। इतना ही नहीं यहां के अस्पताल पर अधिक खर्चे करने के आरोप भी इन्हीं लोगों द्वारा लगाए जाते रहे हैं। समझने वाली बात यह भी है कि बसई दारापुर का अस्पताल फरीदाबाद वाले से कहीं अधिक पुराना होने के साथ-साथ बहुत ही बेहतरीन स्थिति में रह चुका है, जिसे बीते कुछ वर्षों में इन्हीं कमिश्नरों ने बर्बाद किया है। कमलेश हरीश तो सरकारी कार में बैठ कर यहां आ गईं परन्तु उन गरीब मज़दूरों के साथ क्या बनती होगी जिन्हें बसई से यहां-वहां आए दिन रेफर कर दिया जाता है। समझा जाता है कि मेडिकल कमिश्नर कमलेश हरीश की बीमारी का कारण केन्द्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया हैं जिन्होंने पहली बार इन्हें काम करने के लिए कहा है। वरना अब से पहले तो ये हरामखोरी व मौज-मस्ती करके अपना बेहतरीन समय गुजार रही थीं। काम के बोझ तले यही अकेली नहीं दबी हैं बल्कि मुख्यालय में बैठे अधिकतर अफसरों का यही हाल है। एक बड़ा अफसर तो समय पूर्व सेवानिवृत होकर निकल भी लिया है और बाकी अभी बुरी तरह से छटपटा रहे हैं।