फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा)। काम नहीं बल्कि काम का ढिंढोरा पीटने वाले सीएम खट्टर ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का फ्लाइंग स्क्वाड का नया ड्रामा शुरू किया है। सरकारी कार्यालय मुस्तैद और भ्रष्टाचार मुक्त नजर आएं इसके लिए फ्लाइंग स्क्वाड आने की जानकारी अधिकारियों-कर्मचारियों में एक सप्ताह पहले ही सार्वजनिक कर दी जाती है। इकलौते जांच अधिकारी को चंद घंटे में ही बड़ी बड़ी जांच कर दूसरे दिन दोपहर तक मुख्यालय तक रिपोर्ट भी भेजनी होती है। जाहिर है ऐसे में जांच की औपचारिकता और सब कुछ अच्छा होने की ही रिपोर्ट तैयार की जाएगी। खट्टर इसी रिपोर्ट के आधार पर जनता को भ्रष्टाचार मुक्त होने की झूठी कहानियां सुनाएंगे। इस ड्रामे में अधिकारियों की यात्रा, भोजन, भ्रमण, स्टेशनरी आदि के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपये फूूंक दिए गए। इन अधिकारियों के कार्यालय में नहीं रहने के कारण उनके यहां आने वाली आम जनता को भी निराश लौटना पड़ा।
नगर निगमों में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के नाम पर खट्टर सरकार ने नवंबर 2023 में छह फ्लाइंग स्क्वाड का गठन किया था। कहने को तो इसे स्क्वाड नाम दिया गया लेकिन केवल एक ही अधिकारी तैनात किया गया। यह स्क्वाड खुद कहीं औचक निरीक्षण नहीं कर सकता, इसके लिए उसे स्थानीय शहरी निकाय विभाग (यूएलबी) मुख्यालय पंचकूला से आदेश जारी किए जाते हैं।
20 दिसंबर को यूएलबी मुख्यालय के संयुक्त निदेशक प्रशासन की ओर से एक पत्र जारी किया गया। इसमें फ्लाइंग स्क्वाड जिन्हें फ्लाइंग अधिकारी भी बताया गया था, को 26 दिसंबर को बताए गए नगर निगम का ‘औचक’ निरीक्षण करना था। गुडग़ांव नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर अमरदीप सिंह को फरीदाबाद नगर निगम का निरीक्षण करना था। फरीदाबाद नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर को रोहतक नगर निगम का, पंचकूला नगर निगम की संयुक्त आयुक्त रिचा राठी को यमुना नगर, सोनीपत की संयुक्त आयुक्त अंकिता वर्मा को पानीपत नगर निगम, मानेसर नगर निगम के संयुक्त आयुक्त दिनेश को गुडग़ांव और यमुना नगर के चीफ इंजीनियर अशोक राठी को हिसार का निरीक्षण करना था।
एक सप्ताह पहले ही सभी कर्मचारियों के बीच सार्वजिनक हुए इस पत्र में फ्लाइंग अफसर को हिदायत दी गई थी कि वे 26 दिसंबर को संबंधित नगर निगम पहुंच कर सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की हाजिरी जांचेंगे। जाहिर है कि सार्वजनिक हुए इस गोपनीय निरीक्षण में कोई भी कर्मचारी गैर हाजिर नहीं पाया जाता।
इसके साथ ही अवैध विज्ञापन और अनधिकृत निर्माण का निरीक्षण करने का भी उन्हें निर्देश दिया गया था। इस गोपनीय पत्र के आधार पर शहर में बड़े और मोटी कमाई वाले अवैध विज्ञापन तो पहले ही हटा दिए गए, कार्रवाई के लिए कुछ छोटे विज्ञापन रहने दिए गए ताकि साहब अपनी रिपोर्ट तैयार कर सकें। अनधिकृत निर्माण की जानकारी के लिए भी साहब को उन्हीं भ्रष्ट और हरामखोर अधिकारियों पर निर्भर होना पड़ा जो मोटा पैसा खाकर शहर भर में अवैध और अनधिकृत निर्माण करा रहे हैं। जाहिर है कि इन अधिकारियों ने ऊपर से जांच आने के नाम अवैध निर्माण करने वालों से अतिरिक्त ऊपरी कमाई कर उन्हें बचाया होगा, यानी माल खिलाने वाले बिल्डर और भूमाफिया के अवैध निर्माण की जानकारी फ्लाइंग अफसर तक नहीं पहुंचने दी गई। यहां भी वही अवैध निर्माण चुने गए जिनके मालिकों से सौदा नहीं पटा। निगम के भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार फ्लाइंग अफसर की रिपोर्ट पर कार्रवाई के नाम पर भी शायद ही कोई अवैध या अनधिकृत निर्माण गिराया जाए। केवल निषेधाज्ञा का उल्लंघन यानी आईपीसी धारा 188 के तहत केस दर्ज करा दिया जाएगा।
औपचारिकता निभाते हुए फ्लाइंग अफसर अमरदीप सिंह ने निगम के पड़ोस में स्थित रोज गार्डन के दस्तावेज जांचे। विज्ञापन साइट की जांच के नाम पर उन विज्ञापनों का निरीक्षण किया जो मध्यस्थता न्यायालय में विचाराधीन हैं। जाहिर है कि इन विज्ञापनों की रिपोर्ट में केवल एक ही लाइन लिखी जानी है, मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
अवैध विज्ञापन और अनधिकृत निर्माण की जांच करने से पहले इन फ्लाइंग अफसर को मुख्यालय की ओर से दी गई शिकायतों की भी जांच करनी थी। इन सबकी रिपोर्ट सभी अधिकारियों को दूसरे दिन बारह बजे से पहले मुख्यालय में दाखिल दफ्तर करनी थी। समझा जा सकता है कि चंद घंटे में कितनी जांच, अवैध होर्डिंग और अनिधकृत निर्माण की गई होगी। सभी जगह अधिकारियों ने औपचारिकता ही पूर्ण की। चुनाव के नजदीक इस तरह के औचक निरीक्षण का ढिंढोरा पीट कर खट्टर जनता में छवि चमकाने की कवायद भले ही कर लें लेकिन सच्चाई सबके सामने है।