मंत्री गूजर का फर्जी डिग्रीधारक भ्रष्ट ‘पुत्र’ ओमदत्त शहर लौटा

मंत्री गूजर का फर्जी डिग्रीधारक भ्रष्ट ‘पुत्र’ ओमदत्त शहर लौटा
March 30 19:18 2026

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) अंबाला नगर निगम में बीते दस महीने से फरीदाबाद आने के लिए छटपटा रहा फर्जी डिग्री धारक एक्सईएन ओमदत्त आखिरकार लूट कमाई वाले अपने शहर में लौटने में कामयाब रहा। चर्चा है कि पिता समान केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर ने भ्रष्ट बेटे को नगर निगम फरीदाबाद वापस कराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा डाला लेकिन कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के आगे उनकी एक नहीं चली। अंत में गूजर की इज्जत बचाते हुए सीएम नायब सैनी ने अपनी कलम से ओमदत्त को एफएमडीए भेज दिया जो विपुल गोयल के अधीन नहीं आता है। माना जा रहा है कि एफएमडीए में उसे दिखावे के लिए एडिशनल चार्ज दिया गया है सच्चाई यह है कि वह अब यहीं ‘पिता’ गूजर की सेवा में लग कर एफएमडीए में लूट कमाई करने का प्रयास करेगा यदि उसे अवसर दिए मिलते रहे।

फर्जी डिग्री वाले एक्सईएन ओमदत्त ने फरीदाबाद नगर निगम में रह कर कागजों में विकास दिखा कर करोड़ों की रकम लूटी और अधिकारी-नेताओं में बांटी। निगम के जानकार कहते हैं कि 200 करोड़ का घोटाला करने वाला चीफ इंजीनियर डीआर भास्कर तो बदनाम है, ओमदत्त ने उससे दस गुणा से भी ज्यादा के घोटाले कर रखे हैं। उसके खिलाफ कार्रवाई इसलिए नहीं हुई क्योंकि पहले खट्टर सीएम थे जो केंद्रीय मंत्री गूजर के यस मैन होते थे। खट्टर के काल में ही ओमदत्त ने राजनीतिक आकाओं का शार्पशूटर बनकर नियमों को ताक पर रख कर उनके लिए अवैध निर्माण करवाए और उनके इशारे पर प्रतिद्वंदियों के खिलाफ कार्रवाई कीं।

गुडग़ांव रोड स्थित ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (टीएचएसटीआई) के दो करोड़ रुपये हड़पने की बात हो, या नगर निगम में शामिल किए गए 24 गांवों में इंटरलॉकिंग सड़क, नाली, नाले के निर्माण में करोड़ों के डकारने की, ओमदत्त का कभी बाल भी बांका नहीं हुआ। 24 गांवों में ओमदत्त ने कोई विकास कार्य नहीं किए लेकिन बिल मोटे मोटे फाड़े गए, जांच हुई तो कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने ओमदत्त की जगह उसके ऊपर बैठे चीफ इंजीनियर बीके कर्दम को चार्जशीट थमा दी। राजनीतिक आकाओं के लिए ओमदत्त ने नगर निगम के कार्यक्षेत्र से बाहर टोल रोड पर करीब 64 लाख रुपये की स्ट्रीट लाइटें लगवा दीं जो एक सप्ताह में ही उखडऩे लगीं और गायब भी हो गईं। बताया जाता है कि यह ठेका ओमदत्त ने अपने चहेते की बीपी इंडिया नामक कंपनी को दिया था, इसीलिए कंपनी की सिक्योरिटी मनी भी नहीं काटी। नगर निगम फरीदाबाद में तो वह ठेकेदारों के साथ पार्टनरशिप में काम करता था, यही कारण है कि उसके द्वारा अधिकतर टेंडर गुडग़ांव के तीन ठेकेदार जो उसके पार्टनर हैं, के ही नाम खुलते थे। यही नहीं अपने बेटे और साले के नाम पर ठेका फर्म बना कर उन्हें ठेके दिलाने का भी उस पर आरोप है। निगम सूत्र बताते हैं कि फर्जी डिग्रीधारक ओमदत्त ने अपनी अयोग्य पत्नी को भी फर्जी दस्तावेजों के जरिए स्वास्थ्य विभाग में नौकरी दिलवाई है। पिता समान मंत्री गूजर भ्रष्ट बेटे ओमदत्त को बचाने में पूरी ताकत से लगे रहे लेकिन आखिरकार अप्रैल-मई 2025 में विपुल गोयल भारी पड़ गए लेकिन वह फर्जी डिग्री की जांच नहीं करा सके, बस ओमदत्त का तबादला अंबाला करवा दिया।

फरीदाबाद नगर निगम में रहकर अधिकारियों पर धौंस जमाते हुए खुलेआम लूट कमाई करने, चेले ठेकेदारों को काम दिलाने के लिए टेंडर लॉक करने, ठेकेदारों से मनमाना कमीशन वसूलने जैसी धांधलियां करने का आदी ओमदत्त अंबाला में वह सब नहीं कर सका। दबंगई इतनी कि एक्सईएन होते हुए भी बल्लभगढ़ में संयुक्त आयुक्त के लिए बने आवास पर कब्जा जमाया और बिना नक्शा, अनुमति लिए ही सरकारी खर्च पर उसमें अतिरिक्त निर्माण भी करवा डाले। तबादला हुए एक साल होने को है लेकिन कोई निगमायुक्त उससे सरकारी आवास खाली नहीं करा सका। नियमानुसार तबादला होने पर तीन महीने में सरकारी आवास छोडऩा होता है अन्यथा दोगुुने किराए के साथ जुर्माना राशि भी वसूली जाती है। गूजर के इस बेटे ने आवास तो खाली किया नहीं और निगम सूत्रों के अनुसार उससे जुर्माना तो दूर अतिरिक्त किराया तक नहीं वसूला जा रहा, समझ नहीं आता कि विपुल गोयल यहां क्यों ठंडे पड़े हुए हैं।

अंबाला में लगभग एक साल से छटपटा रहे ओमदत्त को मालूम है कि विपुल गोयल के होते हुए वह फरीदाबाद नगर निगम नहीं लौट सकता तो उसने पिता गूजर के जरिए पलवल या गुडग़ांव नगर निगम में तबादला कराने के महती प्रयास किए लेकिन कैबिनेट मंत्री ने पिता-पुत्र की दाल नहीं गलने दी। बताया जा रहा है कि बेटे की बेचैनी देख मंत्री गूजर ने सीएम सैनी से कहा लेकिन उन्होंने भी कोई खास ध्यान नहीं दिया, मजबूर होकर गूजर ने अपने संघी साथियों से मिन्नत चिरौरी की तब कहीं जाकर सीएम पिघले, लेकिन उन्होंने भी पलवल या गुडग़ांव नगर निगम भेजने से इनकार कर दिया। इसके बाद बीच का रास्ता निकाला गया कि सीएम ओमदत्त को अपने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग महकमे के तहत आने वाले एफएमडीए में भेजेंगे। तीन मार्च को ओमदत्त को एफएमडीए में एडिशनल चार्ज देकर भेजा गया है। जानकारों के अनुसार एडिशनल चार्ज तो बहाना है, दरअसल, नगर निगम से भी ज्यादा बड़े बजट वाले एफएमडीए में कहीं ज्यादा लूट कमाई की संभावनाएं हैं इसलिए अब ओमदत्त स्थायी रूप से यहीं दिखेगा और कभी कभार अंबाला भी चला जाया करेगा। वैसे भी लोक निर्माण विभाग, हूडा, स्मार्ट सिटी में रहकर शहर की एैसी तैसी करने और लूट कमाई में माहिर सेवानिवृत्त अधिकारियों की फौज ही एफएमडीए में रहकर विकास का बेड़ा गर्क कर रही है, अब फर्जी डिग्री वाला ओमदत्त उनके साथ मिलकर भ्रष्टाचार में चार चांद लगाएगा।

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Mazdoor Morcha
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