फऱीदबाद (मज़दूर मोर्चा) 12 साल पहले ख़ारिज किए जा चुके फरीदाबाद-नोएडा-गाजिय़ाबाद एक्सप्रेस वे का ढिंढोरा सरकार बनते ही फिर से बजाया जाने लगा है। इस एक्सप्रेस वे में यमुना नदी पर 600 मीटर लंबा पुल बनाए जाने का भी दावा किया जा रहा है। मंझावली पुल तो बीते दस साल में तैयार नहीं हो सका, तो जो एफएनजी अभी तक फाइलों में ही नहीं उतरा, वह धरातल पर कब उतरेगा यह समझा जा सकता है। वैसे पाठक जान लें कि अभी सारी योजना लोक निर्माण विभाग ने बनाई ही है, इसे सरकार से मंजूरी नहीं मिली है, दूसरी बात इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार या नोएडा, गाजियाबाद के विकास प्राधिकरणों से कोई समन्वय नहीं हुआ है। न ही इसके लिए किसी बजट का प्रावधान किया गया है। ऐसे में यह प्रोजेक्ट मंझावली की तरह ही सरकार की काम नहीं काम का ढिंढोरा पीटने वाली योजना ही नजर आ रही है।
जानकारों के अनुसार एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने वर्ष 1988 में एफएनजी मार्ग बनाने का प्रस्ताव रखा था। नगर निगम के सुझाव पर इस मार्ग को फरीदाबाद के वर्ष 2011 के मास्टर प्लान में शामिल किया गया था। वर्ष 2012 में सर्वे कराने के बाद जमीन की उपलब्धता से लेकर कई स्तर पर दिक्कतें आने के कारण इसे खारिज कर दिया गया था। 2014 में केंद्र और राज्य में भाजपा सरकारें बनीं तो खुद को पिछली सरकारों से बेहतर साबित करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने बिना सोचे समझे स्मार्ट सिटी परियोजना की घोषणा की तो खट्टर ने भी 2015 में एफएनजी की घोषणा कर दी। स्मार्ट सिटी तो पूरी तरह से घोटाला साबित हुई और एफएनजी भी कभी परवान नहीं चढ़ सकी। हां, जनता के बीच वरगलाने के लिए खट्टर से लेकर गूजर तक गाहे बगाहे एफएनजी का झूठ आत्मविश्वास से बोलते रहे। सैनी मुख्यमंत्री बने तो एक बार फिर एफएनजी का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। पीडब्ल्यूडी के कार्यकारी अभियंता प्रदीप संधू के अनुसार एफएनजी का सर्वे पूरा करा लिया गया है, कंसल्टेंसी एजेंसी द्वारा तैयारी डीपीआर में तीन मार्गों को चिह्नित किया गया है, यह फाइल मंजूरी के लिए जल्द ही सरकार को भेजी जाएगी। यानी खट्टर और गूजर जिस एफएनजी का झुनझुना बीते कई वर्षों से जनता के सामने बजा रहे थे अभी तक उसकी डीपीआर भी तैयार नहीं हुई थी।
डीपीआर तैयार हो जाने से यह नहीं माना जाना चाहिए कि परियोजना शुरू ही हो जाएगी। डीपीआर में तीन एलाइनमेंट (मार्ग) का सुझाव दिया गया है। नए सिरे से बनाए गए रूट में एफएनजी की शुरुआत शहर के सेक्टर 88 स्थित अम्मा अस्पताल के पास से होगी, इसके बाद ये खेड़ी कलां होते हुए गांव लालपुर में यमुना नदी किनारे पहुंचेगी। जहां इसे पुल के ज़रिए नोएडा में मंगरोली गांव के साथ जोड़ दिया जाएगा। फरीदाबाद और नोएडा के बीच यमुना नदी पर 600 मीटर लंबा पुल बनाया जाएगा। इस पुल की लागत करीब दो सौ करोड़ आएगी, जिसका 50 प्रतिशत हरियाणा और 50 प्रतिशत उत्तर प्रदेश सरकार वहन करेगी। साथ ही इस पुल को जोडऩे के लिए अप्रोच रोड दोनों शहरों के प्राधिकरण बनाएंगे।
प्रदीप संधू ने डीपीआर और रूट प्लान की जानकारी तो दे दी लेकिन यह नहीं बताया कि नौ किलोमीटर लंबे मार्ग के लिए ज़मीन कहां से लाएंगे? इस ज़मीन के अधिग्रहण के लिए कितना खर्च अनुमानित है? तीन एलाइनमेंट में कौन सा चुना जाना है? यमुना नदी पर पुल कहां बनेगा? इन सवालों को छोड़ भी दिया जाए तो अभी उत्तर प्रदेश सरकार से भी तो इस परियोनजा की स्वीकृति नहीं मिली है, मंझावली पुल सबसे बड़ा उदाहरण है। जल्दबाजी में इसे बना तो दिया गया लेकिन ट्रिपल इंजन सरकारों के बावजूद उत्तर प्रदेश में इसका उतार नहीं हो पा रहा है। दस साल में उत्तर प्रदेश सरकार यह तय नहीं कर सकी है कि इस पुल को किस सड़क से कनेक्टिविटी दी जाए। इसे देखते हुए तो यही लगता है कि सैनी सरकार भी जनता की गाढ़ी कमाई एफएनजी के नाम पर खूब लुटाएगी और इसके बाद पहले तो मामला यमुना पुल के निर्माण पर अटकेगा फिर उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी पर। फिलहाल, इस प्रोजेक्ट को सैनी सरकार से भी मंजूरी मिलनी बाकी है।
जानकारों के अनुसार नोएडा-गाजियाबाद से कनेक्टिविटी के लिए एफएनजी की नई परियोजना पर पैसा बहाने से बेतहर है कि मंझावली परियोजना ही पूरी कर ली जाए तो जनता को काफी हद तक राहत मिल सकती है। जनता को इस मंझावली पुल का कभी लाभ होगा या नहीं होगा, फिलहाल कृष्णपाल ने ज़मीनों की खरीद-फरोख़्त कर मोटा माल कमा लिया है।