1. पहली मई मैं बीस साल का हूं लेनिन जि़न्दा हैं लाल चौक लदा हुआ है झण्डों से और खड़े हैं कतारबद्ध पन्द्रह करोड़ लोग
पैंतीस साल बीत गए मैं फिर बीस साल का हूं लेनिन भी जि़न्दा हैं और लाल चौक की धरती पर हैं एक अरब लोग 1958
2. तुम्हारे हाथ तुम्हारे हाथ पत्थरों जैसे मजबूत जेलखाने की धुनों जैसे उदास बोझा खींचने वाले जानवरों जैसे भारी-भरकम तुम्हारे हाथ जैसे भूखे बच्चों के तमतमाए चेहरे तुम्हारे हाथ शहद की मक्खियों जैसे मेहनती और निपुण दूध भरी छातियों जैसे भारी कुदरत जैसे दिलेर तुम्हारे हाथ, तुम्हारे हाथ खुरदरी चमड़ी के नीचे छिपाए अपनी दोस्ताना कोमलता। दुनिया गाय-बैलों के सींगों पर नहीं टिकी है दुनिया को ढोते हैं तुम्हारे हाथ। (‘तुम्हारे हाथ और उनके झूठÓ कविता का एक हिस्सा,1949)
3. यही तो सवाल है दुनिया की सारी दौलत से पूरी नहीं हो सकती उनकी हवस चाहते हैं बनाना वे ढेर सारी रकम उनके लिए दौलत के अंबार लगाने के लिए तुम्हें मारना होगा औरों को, खुद भी मरना होगा दम-ब-दम। झांसा पट्टी में उनकी आना है? या धता बताना है? तुम्हारे सामने यही तो सवाल है! झांसें में न आए तो जियोगे ता-कय़ामत और अगर आ गए तो मरना हरहाल है। (1951) (लंबी कविता का एक अंश)
4. एक सबसे सुन्दर समुद्र अभी तक पार नहीं किया गया सबसे सुन्दर बच्चा अभी तक बड़ा नहीं हुआ हमारे सबसे सुन्दर दिन हमने अभी तक देखे नहीं जो सबसे सुन्दर शब्द तुमसे कहना चाहता था अभी तक कहे नहीं। उन्होंने हमें कैद कर लिया है और बंदी बना दिया है मुझे जेल की दीवार के भीतर के भीतर और तुम्हें बाहर। लेकिन ये तो कुछ भी नहीं सबसे खऱाब होता है जब लोग- जाने या अनजाने अपने भीतर जेल ले कर घूमते हैं। ज्यादातर तो ये करने के लिए मजबूर किये जाते हैं ईमानदार, मेहनतकश, भले लोग जो उसी भांति प्यार किये जाने के काबिल हैं जैसे मैं तुम्हें करता हूं।