फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) एनएच तीन स्थित ईएसआई मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर दिनांक 14 अगस्त को प्रात: नौ बजे श्रममंत्री मांडविया ने अचानक छापा मारा। नौ बज कर पंद्रह मिनट तक काम पर न आने वाले डॉक्टरों व अन्य स्टाफ के करीब 200 लोगों की गैरहाजिरी लगा दी। इसके अलावा पुरानी खंडहर हो चुकी बिल्डिंग के पास लगे कूड़े के ढेर तथा ऐसी ही अनेकों खामियों का संज्ञान लेते हुए कई अफसरों को नोटिस जारी किये।
मंत्री द्वारा इस तरह से छापा मारना बेशक तमाम अधिकारियों व कर्मचारियों को उनके काम के प्रति सचेत करता है। यहां सवाल यह पैदा होता है कि उनकी नाक के नीचे मुख्यालय में बैठे निकम्मे कमिश्नरों को काम करना वे कब सिखाएंगे? नौ जून से श्रममंत्री के पद पर आसीन मनसुख मांडविया जी ने मज़दूरों के इस महकमे के लिए अब तक किया ही क्या है? बड़े पैमाने पर कॉर्पोरेशन के दफ्तरों व चिकित्सा संस्थानों में पद खाली पड़े हैं, जाहिर है कि जब आवश्यक पदों पर सेवा देने वाले कर्मचारी ही नहीं होंगे तो अंशदाता मज़दूर कॉर्पोरेशन से कैसे क्या ले लेंगे।
मंत्री जी ने नौ बजे छापा मार कर तमाम कर्मचारियों को तो टाइट कर दिया, लेकिन पूरे अस्पताल में आवश्यक स्टाफ की कमी को झेलने वाली उस भीड़ को देखने की जरूरत नहीं समझी, जिनके वेतन से नियमित वसूली करके कॉर्पोरेशन ने अपने खजाने में एक लाख पचपन हजार करोड़ रुपये भर लिये हैं। मंत्री जी ने अस्पताल की खामियों का संज्ञान लेते हुए सम्बन्धित अधिकारियों को नोटिस तो जारी कर दिये लेकिन यह जानने का कतई कोई प्रयास नहीं किया कि यहां काम करने के लिये पर्याप्त स्टाफ है भी या नहीं?
दरअसल गुजरात से चुन कर आने वाले मंत्री मांडविया जी की संस्थान की स्थिति सुधारने में कोई रुचि नहीं है। उन्हें यह जानने की भी जरूरत नहीं है कि फैकल्टी तथा अन्य स्टा$फ किस तरह के दबावों में काम कर रहा है। अपनी गुजराती प्रवृत्ति के अनुरूप उनका एकमात्र उद्देश्य तो काली कमाई करना है।
विदित है कि इस मंत्रालय से पहले वे केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री थे, जहां लूट कमाई का पूरा समुद्र मौजूद है, उसके मुकाबले श्रम मंत्रालय मात्र छोटा सा कुआं है। स्वास्थ्य मंत्रालय में कमाई के अवसर सदैव उपलब्ध रहते हैं। वहां की अपेक्षा श्रम मंत्रालय में ऐसे अवसरों का नितांत अभाव है। इसे लेकर मांडविया जी काफी परेशान चल रहे हैं। भरोसेमंद सूत्रों की यदि मानें तो मंत्रीजी ने स्थानीय मेडिकल संस्थान से लूट कमाई के स्रोत टटोलने का कुछ प्रयास बीते दिनों में किया था। लेकिन यहां सब इतना पारदर्शी ढंग से चल रहा है कि कुछ भी उनके हाथ लगने की संभावना नहीं है।
भुनभुनाये मंत्री जी ने छापा मार कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दिखाया। इसी कड़ी में वे अभी कई और खेल भी खेलेंगे। सम्भव है कि वे कुछ ऐसे अधिकारियों को यहां नियुक्त करें जो उन्हें कुछ कमा कर दे सकें, बेशक चिकित्सा सेवाएं जाएं भाड़ में।