फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सांस लेने को शुद्ध हवा नहीं, पीने को स्वच्छ पानी नहीं, पढऩे को स्कूल नहीं, इलाज को अस्पताल नहीं, काम को रोजगार नहीं तो कोई चिंता नहीं। चिंता है तो केवल ‘लव जिहाद’ की।
मीडिया में आ रही खबरों से पता चल रहा है कि अपने आप को हिन्दू संगठन कहने वाले कुछ तथाकथित समाज से भी ‘लव जिहाद’ के कुछ फर्जी मामलों को उठाए-उठाए थानों से लेकर पुलिस आयुक्त तक के चक्कर लगा रहे हैं। इन तथाकथित धर्मके ठेकेदारों के अनुसार आठ हिन्दू लड़कियों ने अपनी मर्जी से किसी अन्य सम्प्रदाय में शादी कर ली है। अन्य सम्प्रदाय का अर्थ स्पष्ट समझा जा सकता है कि इशारा मुस्लिम धर्म की ओर है। ये धार्मिक ठेकेदार चाहते हैं कि पुलिस अन्य सभी काम छोड़ कर उन लड़के-लड़कियों को खोज कर लाए और लड़कों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।
गौरतलब है कि इन मामलों में न तो लड़की वालों को कोई तकलीफ है और न ही लड़के वालों को। तकलीफ है तो केवल इन धार्मिक ठेकेदारों को और यह तकलीफ भी केवल इसलिए है कि जनता का ध्यान बढ़ती महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी व अन्य रोजमर्रा की परेशानियों से ध्यान भटकाने के लिए है। धर्म के ये ठेकेदार नहीं चाहते कि जनता अपनी मुसीबतों से छुटकारा पाने के लिए लामबंद होकर शासन-प्रशासन के विरुद्ध खड़े हो जाएं। इसके लिए जरूरी है कि जनता में साम्प्रदायिकता का जहर घोला जाए। धर्म के नाम पर एक दूसरे को लड़ाया जाए। इनका यह काम भी केवल समाज के शोषित एवं गरीब लोगों तक ही सीमित है। संघ एवं भाजपा के जिन बड़े-बड़े नेताओं ने अपनी बेटियां मुसलमानों से ब्याह रखी हैं उनके विरुद्ध मुंह खोलने की हिम्मत ये ठेकेदार नहीं कर सकते।
जहां तक सवाल है इन नवदम्पतियों के फरार होने का तो यह उनकी मजबूरी है। शासन-प्रशासन की शह पर ये धार्मिक गुंडे इन लोगों पर कातिलाना हमले करते हैं, उनके घरों को लूटते एवं बर्बाद करते हैं। इसी गुंडागर्दी से बचने के लिए इन लड़के-लड़कियों को कहीं दूर दराज छिप कर रहना पड़ता है। यदि शासन-प्रशासन सही ढंग से काम करे तो ये लोग भी शान्तिपूर्वक अपने-अपने घरों में रह कर वैवाहिक जीवन व्यतीत कर सकते हैं।