पलवल (मज़दूर मोर्चा) धान से निपटने के बाद अब किसान गेहूं बुवाई पर लगे हुए हैं। इसके लिए उन्हें डीएपी नाम रसायनिक खाद की जरूरत होती है। सरकारी एजेंसियों कृभको व इफ्को द्वारा 1350 रुपये में बेचा जाने वाला इस खाद का एक कट्टा पलवल शहर में भाजपा से जुड़े तमाम दुकानदार 1600-1700 रुपये तक बेच रहे हैं। मजे की बात यह है कि इसका वितरण करने वाली उक्त दोनों एजेंसयो के पास स्टॉक निल रहता है जबकि संघ भाजपा से जुड़े शहर के तमाम व्यापारी धड़्ल्ले से खुलेआम इसे ब्लैक में बेच रहे हैं। यह काला बाजारी कोई इक्का दुक्का दुकान पर नहीं बल्कि पचासों दुकानों पर चल रही है। भुवनगेट पुलिस चौकी के निकट स्थित एक व्यापारी तो खुलेआम सड़क पर खड़े ट्रक में से निकाल कर यह कालाबारी बेखौफ होकर कर रहा है।
एक वक्त था जब इस कालाबाजारी की जरा सी भी सूचना मिलने पर सरकारी अधिकारी मौके पर पहुंच कालाबाजारी करने वाले को पकड़ कर उचित कार्रवाई करते थे लेकिन अब यह काम पूरी बेशर्मी से बेखौफ होकर किया जा रहा है। सत्तारूढ़ भाजपा से तो कोई क्या उम्मीद करे कांग्रेस सहित कोई भी राजनीतिक दल या कोई किसान संगठन इस मामले पर आवाज उठाने या आंदोलन करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा। किसानों की आमदनी दोगुनी करने का दावा करने वाली मोदी सरकार ने इनकी आमदनी तो क्या बढ़ानी थी उन्हें लूटने के लिए खाद भी ब्लैक में बिकवानी शुरू कर दी है।