पानीपत। पूरे देश में सरकारी व प्राइवेट कंपनियों द्वारा अधिकाधिक मुनाफा हथियाने के उद्देश्य से अधिक-से-अधिक कामों को ठेका-प्रणाली के अंतर्गत लाया जा रहा है। एक ओर, जहां भीषण शोषण की चक्की में पिसते हुए ठेका-मजदूर जानवर से भी बदतर जीवन जीने को मजबूर हो रहे हैं, वहां ठेकेदार -कंपनियाँ मालामाल हो रही हैं। अगर पानीपत रिफाइनरी की बात करें तो वहां कार्यरत करीब 50 हजार मजदूरों में लगभग 30 से 40 हजार ठेका मजदूर हैं। ठेका -मजदूरों से बिना ओवरटाइम का भुगतान किए 8 घंटे की मजदूरी देकर 12 घंटे तक काम लिया जा रहा है। उन्हें साप्ताहिक छुट्टी भी नहीं मिलती। कार्य-स्थल पर शौचालय, स्वच्छ पेयजल, शेड एवं कैंटीन व्यवस्था नहीं होने से उन्हें रोज-रोज भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। मजदूरी का हर महीने निश्चित तिथि पर भुगतान तो नहीं ही होता है, दो-तीन महीने का वेतन बकाया रहता है। इसके अलावा भविष्य निधि (पीएफ), इएसआई के मामले में कंपनियांँ धाँधली करती हैं। कार्य-स्थल पर सुरक्षा-व्यवस्था के अभाव में अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। हाल ही में छत्तीसगढ़ के एक स्टील प्लांट एवं बिहार की बरौनी रिफाइनरी में सुरक्षा व रख-रखाव में आपराधिक लापरवाही के कारण कई मजदूरों की मौत हो गई थी। बार-बार शिकायत के बावजूद कंपनी-प्रबंधन व ठेका-कंपनियां कान में तेल डालकर बैठी रहती हैं। मजदूरों द्वारा निर्धारित प्रावधानों के उल्लंघन पर सवाल उठाए जाने पर उन्हें काम से निकालने की धमकी दी जाती है, उनके गेटपास छीन लिए जाते हैं। कहना न होगा कि चारों लेबर कोड के लागू होने के बाद पूँजीपति वर्ग और कंपनियों को हर तरह से मनमानी करने की कानूनी छूट मिल गई है जिससे मजदूरों के शोषण-उत्पीडऩ की स्थिति भयावह होती जा रही है।
सरकारी कंपनी ‘इण्डियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड'(आईओसीएल) की हरियाणा में स्थित पानीपत रिफाइनरी में दुर्घटनाग्रस्त दो मजदूरों की मौत एवं एक मजदूर के घुटने तक पैर कट जाने से पूँजीवादी व्यवस्था के अधीन गुलामी का दंश झेल रहे मजदूरों के सब्र का बांध टूट गया। हजारों की संख्या में मजदूर विगत 23 फरवरी, 2026 को काम बंद कर कंपनी के गेट पर आ जुटे और शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करने लगे। औद्योगिक सुरक्षा बल द्वारा लाठीचार्ज व हवाई फायर किए गए।
कई मजदूर घायल हुए लेकिन फिर दूसरे दिन वे हड़ताल पर रहते हुए कंपनी के गेट पर जमे रहे। उन्होंने अपनी मांगों की सूची राज्य-प्रशासन को सौंप दी। आज 25 फरवरी, 2026 को भी मजदूरों ने काम बंद कर रखा है और अपनी मांगों के पूरी होने तक हड़ताल पर जमे रहने का नारा बुलंद कर रहे हैं। प्रबंधन, ठेका-कंपनी और उनके रक्षक राज्य के प्रशासक सूचना मिलने तक संघर्षरत मजदूरों से किसी समझौते पर नहीं पहुँच पाए हैं। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं : (1)12 घंटे की बजाय 8 घंटे की ड्यूटी लागू करो! (2) वेतन-भुगतान हर महीने 1 से 7 तारीख के बीच करो! (3) आईओसीएल के बोर्ड रेट के अनुसार वेतन प्रदान करो! (4) ओवरटाइम का दुगुना भुगतान करो! (5)पीएफ कटौती में धाँधली रोको और सारे मजदूरों को ईएसआई कार्ड उपलब्ध कराओ! (6) महीने में 26 दिनों की ड्यूटी को सुनिश्चित करो! (7) रिफाइनरी में अस्पताल, कैंटीन, शौचालय व स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था करो! (8)दुर्घटना में मृतक परिवार को मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी प्रदान करो! (9) ठेकेदारों द्वारा नियमों के उल्लंघन करने पर एफआईआर दर्ज करो एवं उन्हें काली सूची में डालो! ‘बिहार निर्माण व असंगठित श्रमिक यूनियन’ उपरोक्त माँगों का समर्थन करती है एवं तमाम मजदूर -संगठनों व मजदूरों से मजदूर वर्ग के हितों के मद्देनजर हड़ताली मजदूरों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने का आह्वान करती है ताकि बेलगाम पूंजीपति वर्ग और कंपनियों की मनमानी को रोका जा सके। आज शोषक पूँजीपति वर्ग और कंपनियों के मनमाने कुकृत्यों के खिलाफ लडऩे के साथ -साथ शोषण पर आधारित इस मानवद्रोही पूँजीवादी व्यवस्था के विरुद्ध भी अभियान तेज करने की जरूरत है। क्रांतिकारी अभिवादन के साथ बिहार निर्माण व असंगठित श्रमिक यूनियन