फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सत्ता की गोद में बैठ कर हिंदू-मुस्लिम दंगे भड़काने वाले अंधभक्त बिट्टू बजरंजी को अदालत और प्रशासन ने नूंह जिले की ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी। दंगाई बिटुआ के वहां नहीं जाने से वहां जलाभिषेक यात्रा आपसी सौहार्द और भाईचारे के साथ संपन्न हुई। इस साल भी मुस्लिम समुदाय ने जगह जगह कांवडिय़ों का स्वागत कर क्षेत्र की सैकड़ों साल पुरानी बंधुत्व- भाईचारे की परंपरा निभाई। नूंह के नल्हणेश्वर शिव मंदिर में बीते अनेक वर्षों से प्रत्येक सावन महीने में कांवडिय़े जलाभिषक करते आ रहे हैं, दूर और करीब से आने वाले इन कावंडिय़ों का स्थानीय हिंदू- मुसलमान स्वागत करते आ रहे थे। धर्म के नाम पर सामाजिक ताने बाने में आग लगाकर सत्ता हासिल करने वाले संघ-भाजपा के खरीदे हुए बिटुआ जैसे गुंडे सत्ता के समर्थन से हिंदू- मुसलमान दंगा करने को बेताब रहते हैं। 2023 भाजपा की डबल इंजन सरकारों के कार्यकाल का अंतिम वर्ष था और 2024 में चुनाव होने थे तो संघी थिंकटैंक ने हिंदु वोटों का ध्रुवीकरण कराने के लिए हिंदू-मुस्लिम दंगों पर काम शुरू कर दिया था।
इसके लिए मुस्लिम बहुल और हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक नूंह को प्रयोगशाला बनाया गया। खट्टर सरकार के समर्थन में बिट्टू बजरंगी और मोनू मानेसर ने 2023 के सावन में नल्हड़ मंदिर में जलाभिषेक के नाम पर उकसाने वाले बयान जारी किए। इससे माहौल खराब हुआ और यात्रा के दिन बिट्टू बजरंगी ने वीडियो में तलवारें आदि लहराते हुए नूंह वासियों को यह कह कर भड़काया था कि मैं ऐलान करते हुए आ रहा हूं बाद में न कहना कि जीजा जी ने बताया नहीं था। फिर वही हुआ बिटुआ और उसके जैसे दंगाइयों को जान बचाने के लिए चप्पल छोड़ कर भागना पड़ा था। दंगे में दो होमगार्ड सहित पांच लोगों की मौत हुई थी और हिंसा का असर नूंह से गुडग़ांव-फरीदाबाद व आसपास तक फैल गया था जिसमें जान माल की काफी हानि हुई थी। घटना के बाद बिट्टू और मुस्लिम पक्ष से साठ लोगों को जेल भेजा गया था। दंगे का प्रमुख कारण रहे भाजपा के तमाम पालतू बिटुओं को तो अदालत से जमानत मिल गई, दूसरे पक्ष के लोगों पर यूएपीए लगा कर उन्हें लंबे समय तक न केवल जमानत से वंचित रखा गया बल्कि उनके घर भी बुलडोजर से तोड़ दिए गए जिसे पंजाब एंड हरियाणा के हाईकोर्ट तत्कालीन जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस हरप्रीत कौर ने एथेनिक क्लींजिंग (जातीय संहार) का नाम देते हुए खट्टर सरकार को नोटिस जारी किया था।
अनेक लोगों की आज तक भी जमानत नहीं हो पाई है। जिला अदालत ने जमानत देने के साथ ही बिट्टू पर बिना अनुमति (नूंह आदि जैसे) धार्मिक स्थलों पर जाने की रोक लगा दी थी। बीते वर्ष बिटुआ ब्रजमंडल यात्रा में शामिल नहीं हुआ, इस कारण हमेशा की तरह मुसलमानों ने कांवड़ यात्रियों का जगह जगह स्वागत किया, उनके लिए भंडारे लगाए। इससे यह साबित होता है कि दो वर्ष पूर्व बिटुआ के उकसाने पर ही नूंह में दंगा हुआ था। इस बार भी बिटुआ ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ब्रजमंडल यात्रा में शामिल होने की अनुमति मांगी, उसने तर्क दिया कि पूजा करना उसका धार्मिक अधिकार है। समाचार लिखे जाने तक हाई कोर्ट ने किसी प्रकार का आदेश जारी नहीं किया था। राजनीतिक जानकार कहते हैं कि सत्ता के चरणों में नतमस्तक हो चुकी न्यायपालिका वही आदेश देगी जो संघ-भाजपा चाहेगी। क्योंकि अगले लोकसभा-विधानसभा चुनाव करीब चार साल बाद होने हैं ऐसे में बहुत संभव है कि बिटुआ को अनुमति नहीं दी जाए, क्योंकि इस बहाने जज और सरकार खुद को धर्म निरपेक्ष और निष्पक्ष बताएंगे। जानकारों की नजर में बिटुआ से हर साल याचिका डलवाई जाएगी और जब सत्ता चाहेगी तो हाईकोर्ट से उसे अनुमति दिलवा दी जाएगी।
पिछले साल की तरह इस वर्ष भी नूंह में ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा हिंदू-मुस्लिम भाईचारे के बीच संपन्न हुई। प्रशासन भी जानता है कि बिट्टू का उद्देश्य जलाभिषेक करना और शुद्ध अंत: करण से धर्म को मानना नहीं बल्कि दंगे भड़काना ही है इसलिए हाईकोर्ट से अनुमति नहीं मिलने पर उसने भी चैन की सांस ली है। वैसे ध्यान से देखा जाए तो बिटुआ अपने आप में सौदा ही कुछ नहीं है, उसकी उछल कूद भी तब तक है जब भाजपा सत्ता में है। अन्य किसी पार्टी की सरकार आने पर तो बिटुआ बिल से निकल भी नहीं पाएगा, न उस पर रोक लगाने की जरूरत होगी और न ही अनुमति देने की।