कांवड़ लेने मत जाना तुम

कांवड़ लेने मत जाना तुम
August 03 17:49 2025

(स्कूल अध्यापक रजनीश गंगवार द्वारा विद्यार्थियों को सम्बोधित कविता)
कांवड़ लेने मत जाना तुम ज्ञान के दीप जलाना
मानवता की सेवा करके तुम सच्चे मानव बन जाना
शिक्षा है जग जग की जननी उसका दूध पियो तुम
सत्कर्मों का रहस्य बड़ा है उसका रूप गुनो तुम
सत्य आचरण प्रेम परोपकार हैं सब जीवन के साथी
ज्ञान विवेक का दीप जलाओ है यही तुम्हारी थाती
धूर्त बहुत हैं कपट प्रपंची उनका जाल समझना
मन का मैल ज्ञान से धोकर शिव का महत्व समझना
मानवता की सेवा करके सच्चे मानव बन जाना
कांवड़ लेने मत जाना तुम ज्ञान का दीप जलाना
राजनीति अब धर्मनीति अब ये पूंजीवादी युग है
जनता की है धर्म अफीम इससे बौराया जग है
अंधी आस्था और मिथ्या आडंबर है इसको मार भगाना
ज्ञान बोध की ज्योति जगाकर खुद दीपक बन जाना
ध्यान साधना त्याग तपस्या इन सबसे मेल बढ़ाना
शिक्षा है हथियार तुम्हारा हर जन जन तक पहुंचाना
कांवड़ लेने मत जाना तुम….

अंडा, पुरोहित नेता पूंजीपतियों की चालों को जानो
ये सब पलते हैं षणयंत्रों पर इसको तुम पहचानो
ईश्वर के मिथ्या सुख की ये तुमको राह दिखाते
धर्म संकट है बहुत बड़ा जन जन तक भ्रम फैलाते
खुद के बच्चे पढ़े विदेशों में तुम कांवड़ लेने जाओ
घर में जो संचित धन रखा न उसको व्यर्थ बहाओ
मत फंसना इनकी बातों में तुम खुद के दीप जलाना
कांवड़ लेने मत जाना तुम…

कांवड़ ढोकर कोई वकील डीएम एसपी नहीं बना है
कांवड़ जल से कोई बनिया हाकिम वैध नहीं बना है
कांवड़ से बुदिध विवेक का तनिक विकास न होगा
भांग धतूरा गांजा सुल्फा मद से कोई उद्धार न होगा
जाति धर्म का नशा छोड़कर स्व क्ल्याण करो तुम
शिक्षालय पुस्तकालय मेें पढ़कर ज्ञान प्रगाढ़ करो तुम
सत्कर्मों से मानव सेवा कर प्रेम का दीप जलाना।

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Mazdoor Morcha
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