डॉ. रामवीर जनता के जगने की सारे नेता करते रहते प्रतीक्षा, किन्तु स्वयं सोए रहते हैं अपनी करते नहीं समीक्षा।
जो नेता सार्वजनिक मंच से बेशर्मी से झूठ बोलता, जनता उसको क्या समझेगी क्षण भर भी वह नहीं सोचता।
‘पब्लिक मेमोरी इज शॉर्ट’ पर नेता करते विश्वास, इसी लिए तो अपनी कही को भी वे नहीं डालते घास।
यूं तो सबको दिखाने हेतु जात पांत का करते विरोध, किन्तु पार्टी की बैठक में पैंतीस एक का करते घोष।
हर दल औ हर नेता दिखाता जैसे वह हो गुणों का कोष, उसके सिवा अन्य सारों में भरे हुए हैं दोष ही दोष।
बस इक वे ही बुद्धिमान् हैं केवल वे ही हैं देशभक्त, ऐसी मूर्खता की बातें सुन विचारवान् होते हैं विरक्त।
जनता मूर्ख नहीं है कहते हुए जिसे देखा हमने कल, वही आज जनता से कहता मानो मुझे नोन-बायोलोजिकल।
हर नेता औ हर पार्टी का कविता में सम्भव न बखान, इसके लिए तो रचने पड़ेंगे आधुनिक अठारह पुराण।
इसी लिए तो उदाहरण हेतु चुना है केवल एक वही दल, जो घोषित करता रहता है खुद को विश्व का सबसे बड़ा दल।