नीलिमा झा बिहार दरभंगा के डीएमसीएच (दरभंगा मेडिकल कॉलेज) कैंपस में पांच अगस्त को दिनदहाड़े सेकेंड ईयर के मेडिकल छात्र राहुल मंडल को उसके ससुर प्रेम शंकर झा (उम्र 45) ने गोली मार कर हत्या कर दी। राहुल की गलती यही थी कि उसने आरोपी की बेटी तनु प्रिया जो मेडिकल कॉलेज के फस्र्ट ईयर की छात्रा थी, से 15 मई को बजरिए कोर्ट मैरिज अंतरजातीय विवाह कर लिया था। राहुल को पेट में बाएं ओर (पंजरे में) गोली लगने पर कॉलेज में हड़कंप मच गया, और गंभीर हालत में उसे डीएमसीएच में भर्ती कराया, जहां उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। घटनास्थल से भागने का प्रयास कर रहे झा को कॉलेज के छात्रों ने पकड़ कर बेरहमी से पीट दिया। जख्मी आरोपित फिलहाल डीएमसीएच में भर्ती हुआ और अब जेल में है।
आरोपी शंकर झा सहरसा जिले का रहने वाला है और राहुल वहीं आसपास के सुपौल जि़ले का। राहुल अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। दरअसल शंकर झा बेटी के अंतरजातीय विवाह से खफा था। राहुल के पिता छोटे ने किसान होते हुए और अपने बेटे को होनहार देखते हुए कोटा भेजकर उसे मेडिकल की कोचिंग करवा कर डीएमसीएच में एडमिशन करवाया। एक गरीब पिता की इतनी बड़ी ख्वाहिश थी कि कर्ज लेकर व जमीन बेचकर अब तक 40 लाख रुपये खर्च कर दिए थे। तनु प्रिया तो रो-रो कर कहती है कि मेरे पति के हत्यारे मेरे पिता शंकर झा के दिमाग में जाति का कीड़ा भरा है। यहां तक कि शंकर झा ने तनु प्रिया से फोन पर कहा था कि तुम तो हमारी बेटी हो, तुम से मोह-ममता है लेकिन तुम्हारे पति को मैं अवश्य जान से मार दूंगा।
राहुल मंडल की मौत से दुखी उनकी पत्नी तनु प्रिया झा ने धमकी दी है कि अगर एक महीने के अंदर सीबीआई जांच कर हत्यारों को फंासी नहीं होती है तो, वह हत्या में शामिल लोगों (पिता और भाई) का मर्डर करके खुद सुसाइड कर लेगी। वह कह रही है कि जब मेरा पति नहीं रहा, खानदान ही उजड़ गया तो मैं अकेली इस दुनिया में रह कर क्या करूंगी? तनु ने मीडिया से कहा कि पहलगाम में लोगों को धर्म पूछ कर मारा गया और यहां उनके पति की जाति देखकर, कलयुगी पिता ने अपनी ही बेटी का सिंदूर उजाड़ दिया, जिसने मात्र तीन महीने पहले ही शादी की थी। कारण यही है कि तनु ब्राह्मण है और राहुल पिछड़ी जाति से। तनु के पिता प्रेम शंकर झा को ब्राह्मण होने का घमंड है, गुस्से में आकर बेटी की शादी से नाराज था कि समाज से मेरी इज्जत-प्रतिष्ठा चली गई, तो वो अपनी बेटी को सजा देता लेकिन अपनी बेटी को संतान मोह में छोड़ दिया।
पंडित शंकर झा, आपकी परवरिश में क्या कमी रह गई थी कि आपकी बेटी ने अंतरजातीय प्रेम विवाह किया? एक बेटी तय करती है कि उसका पिता समाज में कितना सर ऊंचा करके चल सकता है, अगर इतनी ही अच्छी सोच थी तो अपनी बेटी में ऐसे संस्कार क्यों नहीं दिए? अपने बच्चे को पहचाने क्यों नहीं? राहुल के माता-पिता की क्या गलती थी जो उनको अपना बेटा खोना पड़ा? शंकर झा की जो इज्जत-प्रतिष्ठा बची थी वो सब खाक हो गई। अब समाज को कौन सा मुंह दिखाएंगे? इज्जत तब नहीं गई थी जब बेटी ने पिछड़ी जाति में विवाह किया था, इज्जत तो अब उछल रही है। शंकर झा समाज में गर्व से ये भी कहते कि मेरी बेटी डॉक्टर है और डॉक्टर को ही पसंद करके शादी की। अब इनकी करनी पर, इन्हीं की बेटी ने मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा।
पाखंडी ब्राह्मण प्रेम शंकर झा व्यवसाय से एक क्लीनिक चलाता है। ये तो अच्छी बात है कि अपनी बेटी को डॉक्टर बना रहा था, लेकिन ये तो जघन्य अपराध किया कि जब बेटी ने प्रेम विवाह कर लिया तो दामाद को सीधे स्वर्ग पहुंचा कर बेटी का सुहाग ही उजाड़ दिया। ये आरोपी, अपने को ब्राह्मण कहलाने वाला शंकर झा ये नहीं जानता कि दामाद को विष्णु माना गया है, विवाह के समय चरण पखार कर फूल-अक्षत् और गंगाजल चढ़ाकर, हाथ जोड़ कर पूजा करके अपनी कन्या को लक्ष्मी रूप में उसके हाथों में समर्पित करने की परम्परा है। वहीं इस जल्लाद, राक्षस ने ससुर-दामाद के रिश्ते को कलंकित कर दिया। किसी को जान से मारने की आज्ञा न कानून देता है न कोई धर्म, न ही संस्कार-परम्परा।
भारत की वैदिक सभ्यता जहां, पुत्री द्वारा स्वयंवर पिता, कुल, राज्य, देश और समाज के लिए गर्व और सौभाग्य की बात थी। पिता गर्व से अपनी पुत्री का स्वयंवर करता था और बेटी जिसे पति रूप में वरण करती थी, चाहे वो किसी भी जाति का क्यों न हो, सम्मान के साथ उसके माता-पिता उसी से उसका विवाह कर देते थे, और आज लड़कियां ऐसी दुर्दशा का शिकार हैं। वैदिक धर्म में अंतरजातीय विवाह की अनुमति है। शास्त्र भी यही कह रहा है कि कन्या जिसे वरण करती है,चाहे वह किसी भी जाति का क्यों न हो, कन्या के पिता उसे अपना दामाद मानकर उसके साथ पाणिग्रहण कर देना चाहिए। अगर, धर्म को मानते हो तो यही धर्म है। सीता-राम अंतरजातीय विवाह की चर्चा तो पुराणों में ही है कि राम क्षत्रिय और राजा जनक ब्राह्मण। सीता स्वयंवर में तो 10 हजार राजा आए थे, उनमें दैत्यों का राजा रावण भी मौजूद था। इसके अलावा कुंती यादव जाति से थी और पाण्डू क्षत्रिय, सत्यवती मल्लाह थी और राजा शान्तनु क्षत्रिय। ऐसे अनेकों चर्चाएं हैं। इन सब का ही अंतर्जातीय विवाह हुआ है।
ये बहुत निंदनीय घटना हुई है। बहुत ऐसे पिता हैं जिन्हें जानकारी रहती है कि उनकी बेटी की ससुराल में बहुत दुर्गति हो रही है और उनकी बेटियां खूब प्र्रताडि़त होती रहती हैं, यहां तक कि उनकी हत्या तक कर दी जाती है। लेकिन फिर भी पिता चुपचाप बैठ जाते हैं। लेकिन एक बालिग लड़की द्वारा अपनी पसंद की शादी करने पर ऐसा जघन्य अपराध हो गया कि उस लड़की के पिता ने अपनी ही बेटी को विधवा बना दिया, और लोगों को अपनी संस्कृति की याद आ रही है। आज जो बाप महोदय शान से बोल रहे हैं कि इतने दिनों से सोया नहीं था अब जेल में चैन की नींद सोऊंगा और मुफ्त की रोटियां तोड़ूंगा, चार दिन में यह सोच दिमाग से निकल जाएगी। जिस समाज के लोगों के तानों के डर से यह कृत्य किया है, अब देखिये कि कौन आता है इन्हें और इनके परिवार को देखने? सबसे बड़ी बात है इंसानियत। राहुल ने इतना तो किया कि अपने मां-बाप द्वारा रखे गए राहुल नाम के नेपथ्य में मौजूद बुद्ध महापंडित का अनुसरण करते हुए प्रेम के लिए अपनी बलि दे दी। मगर वह पिता, जिसका नाम प्रेम शंकर झा है, उसने तो घृणा की मनुवादी आग में कई जिंदगियां खत्म कर दीं। अंतरजातीय विवाह से संस्कृति बाधित नहीं होती, बल्कि और विस्तार होता है और लोगों को एकजुट करके समाज को मजबूत बनाता है।आज समाज के लिए जाति एक बोझ है जिसे हम पर लादा गया है और हम इसे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक ढोते आ रहे हैं।