ईकोग्रीन की नाकामियों का खामियाजा भुगत रहा नगर निगम

ईकोग्रीन की नाकामियों का खामियाजा भुगत रहा नगर निगम
August 05 08:13 2024

एनजीटी ने ग्रेप लागू होने के बावजूद खत्तों से कूड़ा नहीं उठाने पर नगर निगम पर लगाया 2 करोड़ 24 लाख का जुर्माना

फऱीदाबाद ( मज़दूर मोर्चा) मोदी-खट्टर सरकार की फ्लैगशिप कंपनी ईकोग्रीन तो कूड़े से बिजली बनाने के नाम पर फऱीदाबाद और गुडग़ांव नगर निगम को कचरा कर गई लेकिन उसकी फैलाई हुई गंदगी का खामियाजा इन निगमों को भुगतना पड़ रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन नहीं करने के कारण फऱीदाबाद नगर निगम पर 2 करोड़ 24 लाख 34 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई करने के एवज में वसूला जा रहा है। यह जुर्माना सरकार ही भरेगी और वसूलेगी भी वही, यानी पर्यावरण सुधार की कोई गारंटी नहीं है, नगर निगम के खत्तों के पास रहने वाले आम लोगों को बदबूदार कचरे के साथ ही जीने को मजबूर होना पड़ेगा।

मामला अक्तूबर 2023 का है। वायु प्रदूषण अपने चरम पर होने के कारण शहर में ग्रेडेड एक्शन रिस्पांस प्लान (ग्रेप) लागू था। शहर के कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन और निस्तारण करने की जिम्मेदार ईकोग्रीन कंपनी का प्रबंधन नगर निगम से तो लगातार भुगतान उठा रहा था लेकिन कर्मचारियों का वेतन नहीं दे रहा था। वेतन नहीं मिलने पर कर्मचारियों ने इसी दौरान हड़ताल कर दी। नतीजा ये हुआ कि पूरे शहर में कूड़े कचरे के ढेर लग गए। खत्तों में भी उठान नहीं होने के कारण कूड़े की सडऩ से आसपास रहने वालों की मुश्किलें बढ़ गईं थी। अखबारों में खबर छपी तो एनजीटी ने संज्ञान लेकर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड फरीदाबाद के अधिकारियों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए, साथ ही एक की जांच कमेटी बैठा दी। 31 अक्तूबर 2023 को सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट भी पेश की थी। इस पर एनजीटी ने उन्हें पर्यावरण संरक्षण के लिए पर्याप्त कदम उठाने के निर्देश जारी किए। साथ ही यह निश्चित करने को कहा कि कहीं भी खत्तों में और उनके बाहर कचरा पड़ न रहे, खत्ते रोजाना पूरी तरह खाली किए जाएं। एनजीटी के आदेश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नगर निगम को नोटिस जारी किया।

30 अक्तूबर को नगर निगम अधिकारियों ने जवाब दिया कि ईकोग्रीन कंपनी कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कूड़ा प्रबंधन नहीं कर पा रही है, नगर निगम खुद शिकायत वाली जगह यानी बीपीटीपी ट्रांसफर स्टेशन पर अपने चार डंपर, जेसीबी लगवा कर कचरा हटवा कर बंधवाड़ी पहुंचा रहा है। जांच कमेटी ने पाया कि नगर निगम के दावे सही नहीं थे और कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन नहीं किया जा रहा था। 12 दिसंबर 23 की सुनवाई में एनजीटी ने कचरा प्रबंधन में लापरवाही के लिए नगर निगम पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूलने और कार्रवाई करने का आदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दिया। बोर्ड ने जनवरी 2024 को नगर निगम को कारण बताओ नोटिस और पर्यावरण को होने वाली क्षति की पूर्ति के लिए 2 करोड़ 24 लाख 34 हजार रुपये जुर्माना भरने को कहा। नगर निगम ने जवाब दिया कि जुर्माने की रकम मोदी-खट्टर के चहेते अग्रवाल परिवार की ईकोग्रीन कंपनी से वसूली जानी चाहिए।

लोकसभा चुनाव में ईकोग्रीन कंपनी की नाकामियां और कचरा प्रबंधन के नाम पर प्रदेश मेें सरकार के खिलाफ कोई माहौल न बने इसके लिए खट्टर ने अपने चहेते और संघ के करीबी अग्रवाल परिवार को बचाने की कवायद शुरू कर दी। इधर कंपनी से जुर्माना वसूलने की बात चल रही थी उधर खट्टर सरकार के शहरी निकाय मंत्री ने फरवरी 2024 में ईकोग्रीन कंपनी का करार रद्द करने की घोषणा कर दी। निगम सूत्रों के अनुसार कंपनी का केवल डोर टू डोर कचरा कलेक्शन वाला करार रद्द किया गया था, खत्तों से कूड़ा उठा कर बंधवाड़ी पहुंचाने का काम उसी का था। डोर टू डोर कलेक्शन से होने वाली कमाई बंद हुई तो कंपनी ने खत्तों से कूड़ा उठाने के काम में भी ढील कर दी। इस पर शहरी निकाय मंत्री सुभाष सुधा ने जून में ईकोग्रीन का पूरा करार रद्द करने की घोषणा कर दी।

जानकारों के मुताबिक ये सब नाटक सरकार को बदनामी और अग्रवाल परिवार को नुकसान से बचाने के लिए रचा गया है। सरकार जिस कंपनी को ठेका देने जा रही है वह भी खट्टर के चहेते अग्रवाल परिवार की ही है यानी सिर्फ ईकोग्रीन का नाम हटेगा काम तो वही नए नाम पर पुराने लोग ही करने वाले हैं। विधानसभा चुनाव में जनता को बताया जाएगा कि काम नहीं करने वाली कंपनी को सरकार ने हटा दिया और इस तरह जनता को मूर्ख बनाया जाएगा। सच्चाई ये है कि पर्यावरण क्षतिपूर्ति के लिए जो 2 करोड़ 24 लाख रुपये ईकोग्रीन से वसूला जाना था उसका भुगतान अब नगर निगम फरीदाबाद को करना है।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव प्रदीप कुमार की ओर से नगर निगम फरीदाबाद को नोटिस जारी कर एक माह में पर्यावरण क्षतिपूर्ति की जुर्माना राशि जमा करवाने का सख्त आदेश जारी किया गया है। दरअसल यह भी नाटक ही है, जुर्माने की यह रकम न तो दोषी अधिकारियों से और न ही दोषी कंपनी से वसूली जाएगी, सरकार ही जुर्माना भरेगी और सरकार ही वसूलेगी लेकिन जिस मद के नाम पर इसे वसूला जा रहा है उस पर एक धेला भी खर्च होने वाला नहीं हैं क्योंकि खर्च करने वालों को पता ही नहीं कि कैसे खर्च करना है। यह जुर्माना पर्यावरण को होने वाली क्षति की क्षतिपूर्ति के नाम पर वसूला जाएगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लंबे चौड़े अमले के बावजूद शहर में प्रदूषण का स्तर लगातार खराब होता जा रहा है, पर्यावरण चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुका है। प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर बोर्ड न जाने कितने जुर्माने लगा चुका है लेकिन वसूली गई इस रकम से पर्यावरण को हुई क्षति को कब और कैसे दूर किया गया यह कोई नहीं बताता।

यदि कुछ किया गया होता तो फरीदाबाद की विश्व के 25 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में गणना नहीं होती। कुल मिला कर सरकार जनता की खून पसीने की कमाई को कभी चहेतों पर तो कभी जुर्माने की मोटी रकम भरने में ही बर्बाद कर रही है। हां, जगह जगह सेंसर और स्क्रीन लगाकर प्रदूषण का बढ़ता स्तर जरूर बताया जाता है, उसे घटाने के लिए किए गए किसी भी प्रयास का उल्लेख कभी नहीं किया जाता। द ुर्भाग्य की बात तो ये है कि जनता भी प्रदूषण के बढ़ते आंकड़ों को लेकर सडक़ों पर उतरने के बजाय अपनी आंखें मीचना ही बेहतर समझती है।

  Article "tagged" as:
  Categories:
view more articles

About Article Author

Mazdoor Morcha
Mazdoor Morcha

View More Articles