नई दिल्ली (मज़दूर मोर्चा) ईएसआई कॉर्पोरेशन द्वारा 10 नए मेडिकल कॉलेज बनाने की घोषणा का विस्तृत विवरण गतांक में प्रकाशित किया जा चुका है। बेशक उन 10 स्थानों में से किसी पर भी अभी तक कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है, इसके बावजूद केन्द्रीय श्रममंत्री मनसुख मांडविया ने कॉर्पोरेशन के डीजी अशोक सिंह को यह आदेश दे दिया है कि 2025 से इन कॉलेजों में एमबीबीएस का दाखिला शुरू करना है। यह आदेश मिलते ही पूरे कॉर्पोरेशन में हड़कंप सा मचा हुआ है। निकम्मे व निकृष्ट अधिकारी जो कभी फाइल को चलने नहीं देते थे अब इधर से उधर भागे फिर रहे हैं।
इस काम को गति प्रदान करने के लिए कॉर्पोरेशन की ओर से आवश्यक कदम उठाते हुए $फरीदाबाद मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अनिल कुमार पांडे को नोएडा में बनने वाले मेडिकल कॉलेज का मेंटर नियुक्त कर दिया गया है। यानी कि उस मेडिकल कॉलेज को आगामी वर्ष आने तक दाखिले के लिए तैयार करना उनकी जिम्मेवारी होगी। जाहिर है कि मंत्री जी ने डॉक्टर पांडे की योग्यता एवं दक्षता पर भरोसा करते हुए यह दायित्व उन्हें सौंपा है।
समझा जाता है कि डॉक्टर पांडे ने अपने दायित्व को निभाने के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया है। आवश्यक फाइल वर्क के साथ-साथ नोएडा में जा कर जमीनी हकीकत पर भी काम शुरू कर दिया है। फिलहाल वहां 300 बिस्तरों वाला एक अस्पताल कॉर्पोरेशन द्वारा चलाया जा रहा है। नई बिल्डिंग का काम शुरू होने का इंतजार किए बगैर एमबीबीएस के प्रथम वर्ष का दाखिला इसी अस्पताल में शुरू कर दिया जाएगा। बिल्डिंग की कमी को पूरा करने के लिए स्थाई तौर पर पोर्टा केबिन भी लगाए जा सकते हैं। शुरू में यहां केवल 50 छात्रों को ही दाखिला दिया जाएगा जिसके लिए एनएमसी (नेशनल मेडिकल कॉउंसिल) को भी कोई एतराज नहीं होगा।
स्थाई रूप से काम शुरू करने के साथ-साथ पूरी बिल्डिंग के निर्माण हेतु आवश्यक भूखंड प्राप्त करने तथा उस पर निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारियां भी पूरे जोर-शोर से चल रही है। नोएडा की ही तर्ज पर अन्य मेडिकल कॉलेजों को लेकर भी लगभग ऐसी ही नीति अपनाई जा रही है। समझा जा रहा है कि तेजी से काम करने वालों की गति में रोड़े अटकाने वाले निकृष्ट एवं कामचोर उच्चाधिकारियों को अब और सहन नहीं किया जाएगा।
जैसा कि गतांक में लिखा जा चुका है कि काम का बोझ पड़ते ही जिन अधिकारियों ने नौकरी छोडऩे के नोटिस दे दिए थे, उन्हें जल्द ही रुख़्सत कर दिया जाएगा। इसके अलावा भी तैनातियों में भारी परिवर्तन सम्भावित हैं क्योंकि मंत्री जी हर हाल में अपने आदेश को फलीभूत होते हुए देखना चाहते हैं।
एक और खुशी की बात यह सुनने में आई है कि इन तमाम मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस के साथ-साथ पीजी की पढ़ाई भी शुरू कर दी जाएगी। यह मंत्री जी की दूरदर्शिता ही है जो उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में पीजी की पढ़ाई को महत्वपूर्ण समझा है। ‘मज़दूर मोर्चा’ को बखूबी याद है कि जब फरीदाबाद में पीजी शुरू करने का प्रयास किया गया था तो मुख्याल एवं तथाकथित मेडिकल यूनिवर्सिटी रोहतक ने अड़ंगे लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। जाहिर है कि जब मंत्री जी ही पीजी शुरू करने की पहल कर रहे हों तो मुख्यालय में बैठे हरामखोरों की क्या बिसात जो अड़ंगेबाजी कर पाएं? रही बात रोहतक वाली तथाकथित मेडिकल यूनिवर्सिटी की तो मंत्री जी जब चाहें उससे ङ्क्षपड छुड़ाकर अपने 20 मेडिकल कॉलेजों की एक अलग यूनिवर्सिटी भी बना सकते हैं जिससे ईएसआई के अलावा अन्य मेडिकल कॉलेज भी जुड़ सकेंगे।