फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) हूडा की सर्वे ब्रांच ही प्राधिकरण की जमीनों पर भूमाफिया, बिल्डरों की मिलीभगत से कब्जे करवा रही है। यदि ऐसा न होता तो हूडा प्रशासक से लेकर ईओ तक को जानकारी देने पर अवैध निर्माण एवं कब्जों के खिलाफ कार्रवाई की जाती, इसके उलट हूडा के सेक्टरों में धड़ल्ले से सरकारी जमीन पर कब्जा, अवैध निर्माण और अतिक्रमण बेरोकटोक जारी है। ताजा अवैध कब्जा सेक्टर 46 में मैट्रो रेलवे के बिजली सब स्टेशन के पास का है। यहां केंद्रीय मंत्री कृष्ण्पाल गूजर के सजातीयों ने हूडा की तीन सौ गज से भी अधिक जमीन पर कब्जा कर बाकायदा निर्माण भी शुरू कर दिया है। इस जमीन की कीमत लाखों रुपये वर्ग गज है। यानी हूडा की तीन से चार करोड़ रुपये कीमत की जमीन पर कब्जा हो रहा है। इसी सेक्टर में पीएलपीए में होने के कारण बंद पड़े फायर स्टेशन और आगे सती माता मंदिर के बीच भूमाफिया ने बाकायदा पक्का निर्माण कर डाला है। यह निर्माण खुद को केंद्रीय मंत्री गूजर का खास रिश्तेदार बताने वाले शेर सिंह जैलदार का बताया जा रहा है। आसपास रहने वालों के अनुसार जैलदार ने हूडा की जमीन पर बड़े क्षेत्र में कब्जा कर सैकड़ों कमरे बनवाए हैं, इन्हें प्रवासी मज़दूरों को किराए पर उठा कर प्रतिमाह लाखों रुपये कमा रहा है। सती माता मंदिर के पीछे तो पीएलपीए संरक्षित इलाके में बाकायदा मज़दूरों की कालोनी ही बसा दी गई है, जिसका किराया मंत्री गूजर के सजातीय वसूलते हैं।
इन अतिक्रमण और अवैध कब्जों की जानकारी हूडा प्रशासक अनुपमा अंजली से लेकर ईओ नवीन कुमार और एसडीओ राजपाल तक सबको है। जागरूक नागरिकों ने इन अधिकारियों को वाट्सएप पर अतिक्रमण व अवैध कब्जे करते, रात के समय निर्माण किए जाने की जानकारी दी लेकिन न तो आईएएस अधिकारी के कानों पर जूं रेंगी न ही ईओ साहब ने सर्वे ब्रांच के एसडीओ और जेई को किसी प्रकार की कार्रवाई के आदेश दिए। अधिकारी यदि सरकारी जमीन के हड़पे जाने पर चुपचाप हैं तो इसके दो ही कारण हो सकते हैं। पहला या तो उन पर राजनीतिक या सत्ता का दबाव हो या फिर अवैध कब्जा करने वालों से सांठगांठ हो गई है। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा और निर्माण के एवज में निर्माणकर्ता इन अधिकारियों को बहुत मोटा नजराना अदा करते है। यह भी हो सकता है कि निर्माणकर्ता को सत्ता का संरक्षण भी हासिल हो और वह पैसे के बल पर हूडा अधिकारियों से भी भाईचारा बनाए रखे हो, तब ही जानकारी होने के बावजूद ये अधिकारी कार्रवाई ही नहीं करते।
सती माता मंदिर के पास सोमवार की रात अवैध निर्माण कर दीवार खड़ी की गई। गौर तलब है कि यह मंदिर भी सरकारी जमीन पर कब्जा करने के लिए ही बनाया गया है। संवाददाता ने इस संबंध में ईओ से जानकारी चाही लेकिन उन्होंने फोन ही नहीं उठाया। चल रहे अवैध निर्माण की वाट्सएप पर जानकारी दी गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जानकारों के अनुसार हूडा अधिकारियों की मिलीभगत से ही होली के समय अवैध निर्माण कराया जा रहा है, ताकि छुट्टी और स्टाफ न होने को बहाना बना कर कार्रवाई न की जाए। इसे प्रशासन का दोगलापन कहा जाए या फिर सत्ता के हाथों की कठपुतली कि एक तरफ प्राचीन परसोन मंदिर को अवैध निर्माण के लिए नोटिस भेजा जा रहा है वहीं सती माता मंदिर के आसपास हो रहे अवैध कब्जों की तरफ इसलिए नहीं देखा जा रहा कि ये कब्जे केंद्रीय मंत्री गूजर के मेवला महाराजपुर में रहने वाले उनके भाई-भतीजे कर रहे हैं।सेक्टर 46 ही नहीं सेक्टर 21 सी मार्बल मार्केट में भी हूडा की जमीन पर कब्जा, अतिक्रमण हो रहा है। ईओ नवीन कुमार कहते हैं कि यदि आपको किसी विशेष अतिक्रमण या कब्जे से शिकायत है तो बताइए, कार्रवाई की जाएगी। यानी ईओ साहब केवल उसी अवैध कब्जे को खाली करवाएंगे जिसकी शिकायत दी गई हो। जैसे उनकी तो कोई ड्यूटी है ही नहीं सर्वे कराने और अपने विभाग की सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराने की।
यदि ऐसे ही काम करना है तो फिर हूडा की सर्वे ब्रांच ही बंद कर दी जानी चाहिए। ईओ साहब की जो कार्यशैली है उससे तो लगता है कि यदि किसी कब्जे की शिकायत की गई तो वह खुद ही कब्जाधारक को शिकायतकर्ता का नाम पता दे देंगे कि भाई यही व्यक्ति है तो तुमसे हमारी जमीन खाली करवाने पर तुला है, हम तो कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते, तुम उससे निपट लो। सेक्टर 21 सी मार्बल मार्केट मेें हूडा के प्लॉट नंबर एक, 55, 57, 26 और 27 के सामने भयंकर अतिक्रमण है। इन प्लॉटों के सामने हूडा की ग्रीन बेल्ट यहां तक कि सड़क पर दुकानदारों ने अपना माल डंप कर रखा है। प्लॉट नंबर चार और पांच में सौ प्रतिशत बेसमेंट बना डाला गया है जबकि केवल चालीस प्रतिशत में ही बेसमेंट बनाने की अनुमति मिल सकती है। खेल सिर्फ अतिक्रमण और अवैध निर्माण में नहीं है। अधूरी इमारतों को हूडा के खाऊ अधिकारियों ने कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी कर रखा है। प्लॉट नंबर 101 और 102 डबल स्टोरी शॉप (डीएसएस) हैं, इनमें पहली स्टोरी ही अधूरी बनी हैं लेकिन दोनों को कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। जाहिर है कि अधूरे निर्माण के लिए कंप्लीशन सर्टिफिकेट मुफ्त में नहीं दिया गया होगा, मनमाना निर्माण करने के लिए अधिकारियों ने मनमाने दाम वसूले होंगे।
ये तो वह अवैध निर्माण और अतिक्रमण हैं जो मार्केट में सामने ही नजर आ जाते हैं। यदि सर्वे कराया जाए तो मार्केट की लगभग हर बिल्डिंग में नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा। लेकिन ईओ नवीन कुमार की सुस्ती देख कर लगता नहीं कि वह मातहतों को सर्वे करने का हुक्म सुनाएंगे। हूडा की संपत्ति लुटती है तो लुटने दो अधिकारियों को तनख्वाह तो समय पर मिल ही रही है और भूमाफिया, अवैध कब्जादारों से ऊपरी कमाई का बोनस भी मिल रहा है।