पलवल (मज़दूर मोर्चा) संघी भाजपाई सरकार ने अफसरशाही को भी हिन्दुत्व के रंग में रंग दिया है। यहां के डीसी डॉक्टर हरीश कुमार, पाखंडी बाबा बागेश्वर की आगवानी में तो उसके सामने बिछे ही जा रहे थे, कोर्ट में बैठ कर भी वे हिन्दूत्व का बाणा उतारने को आसानी से तैयार नहीें होते। मामला एक कोर्ट-मैरेज का है। उसमें न धर्म का कोई मसला था और न ही जाति का। उसके बावजूद भी डीसी महोदय शादी करने कोर्ट में आए वर-वधू को कहते हैं कि वे कोर्ट-मैरेज क्यों कर रहे हैं? क्यों नहीं पारम्परिक विधि से बारात लाकर पंडित के माध्यम से अग्नि के चक्कर लगा कर शादी करते।
विदित है कि वर-वधू दोनों ही उच्च शिक्षित-प्रशिक्षित डॉक्टर थे जो बाकायदा अपने माता-पिता व परिजनों सहित कोर्ट में पेश हुए थे। यह पेशी भी कोई अचानक नहीं हुई थी। इसके लिए विधिवत एक माह पूर्व डीसी को आवेदन किया गया था, जिस पर खुद डीसी ने उन्हें 14 नवम्बर को शादी हेतु कोर्ट में पेश होने की तारीख दी थी। लेकिन उनकी जुमलेबाजी से ऐसा प्रतीत होता था कि न तो उन्होंने वर-वधू के आवेदन को पढ़ा था और न ही इस बाबत कानून एवं नियमों की कोई जानकारी हासिल की थी। उनके लिए तो बस हिन्दूत्ववादी पाखंडपूर्ण परम्पराएं ही सवोत्तम विवाह विधि होती है। उनके लिए कोर्ट मैरेज करना केवल गैरहिदूओं का काम होता है। इस मामले में उपस्थित गणमान्य एवं प्रतिष्ठित नागरिकों के साथ आए वकीलों ने जब डीसी साहब को कानून पढ़ाया तो वे सीधे रास्ते आ गए और अपना कानूनी दायित्व निभाते हुए विवाह को सम्पन्न करा दिया।