हम तो सदा कहते आए हैं…

हम तो सदा कहते आए हैं…
December 31 13:38 2024

डॉ. रामवीर

हम तो सदा कहते आए हैं
दोहरा रहे पुन:
देश के माथे पर कलंक है
पारस्परिक कलह।

अगर चाहते हो सुख चैन
न भूलें ये बैन
‘ईवन वार्स आर बोर्न
इन द माइंड ऑव मैन’।

मन में संचित दुर्विचार ही
होते मन का मल
जब तक मन निर्मल नहीं होता
मिटता नहीं खलल।

परपीडा को देख अगर मन
हो जाता है विकल
उसे ही सच्चा मानव मानो
सहृदय और सरल।

‘मनुर्भव’ कह कर वेदों ने
दिया था जो आदेश
क्या कारण है आज उसे ही
भूल रहा है देश।

मनोरोगी हैं जो ढोते हैं
दुर्विचार का भार
शुद्ध विचारों से समाज का
सम्भव है उद्धार।

पता है ऐसी बातें सबको
नहीं हमेशा भातीं
विघ्नतोषी लोगों को अच्छे
लगते हैं खुराफाती।

यह सृष्टि वैविध्यपूर्ण है
तरह तरह के लोग
दुआ करो न लगे देश को
कलह-करण का रोग।

उपदेशों से देश चलाना
वैसे तो है दुष्कर
फिर भी याद रहे कि आम
मिलें न कीकर बो कर।

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