गुडग़ांव-पलवल मेट्रो तो चल पड़ी अब पॉड टैक्सी की बारी

गुडग़ांव-पलवल मेट्रो तो चल पड़ी अब पॉड टैक्सी की बारी
December 08 14:55 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) दस साल से केंद्र और राज्य में बैठी भाजपा की डबल इंजन सरकारों ने गुडग़ांव-पलवल मैट्रो चलाने के नाम पर खूब वोट बटोरे लेकिन आज तक एक ईंट भी नहीं रखी गई। पूरे शहर में लो फ्लोर सिटी बसों का नेटवर्क खड़ा करने के वादे भी दस साल में पूरे नहीं हुए। पिछले पखवाड़े ही ई बसों का बेड़ा शहर को देने का जुमला उछाला गया था, वह भी कम लगा तो अब जनता को वरगलाने के लिए पॉड टैक्सी का जुमला उछाल दिया गया। समझने वाली बात यह है कि जब सरकार ने करना कुछ न हो तो जुमले बड़े शानदार उछालती है। सरकार की तरह ही काम नहीं काम का ढिंढोरा पीटने के गुर में माहिर एफएमडीए के अधिकारी गोदी मीडिया में झूठ उछाल रहे हैं कि एनआईटी को नहरपार ग्रेटर फरीदाबाद से जोडऩे के लिए 2031 तक पॉड टैक्सी चलाई जाएगी।

सुधी पाठकों को बताते चलें कि एक साल पहले दिसंबर 2023 में एफएमडीए के तत्कालीन चीफ टाउन प्लानर समर सिंह चौहान ने पॉड टैक्सी का पाखंड फैलाया था। तब उन्होंने दावा किया था कि एफएमडीए ने फरीदाबाद के 2041 के मास्टर प्लान में पॉड टैक्सी का प्रावधान किया है। बताया था कि पॉड टैक्सी सेक्टर 65 से उत्तर प्रदेश के जेवर में बनाए जा रहे एयरपोर्ट तक चलाई जाएगी। उन्होंने तो इसका 31 किलोमीटर लंबा रूट भी तय कर लिया था कि निर्माणाधीन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे के समानांतर ही इसका ट्रैक बनाया जाएगा। भाजपाई आकाओं को खुश कर अपनी नौकरी बचाने वाले एफएमडीए के अधिकारियों ने जनता को पॉड टैक्सी के सपने दिखा कर दो चुनाव संपन्न करवा दिए।

घोर सरकार विरोधी लहर के बावजूद भाजपा अप्रत्याशित रूप से तीसरी बार भी प्रदेश में पूर्ण बहुमत में आ तो गई लेकिन उसे जनता के रोष का अहसास हो गया है। ऐसे में जनता को खुश करने के लिए रोज नई घोषणाएं की जा रही हैं। इसके तहत ही अब एफएमडीए के नए चीफ टाउन प्लानर सुधीर कुमार ने पॉड टैक्सी का राग अलापा है। उनका राग झूठा यूं है कि उन्होंने 2031 के मास्टर प्लान में पॉड टैक्सी प्रोजेक्ट शामिल किए जाने की बात कही है जबकि समर सिंह चौहान इसके 2041 के मास्टर प्लान में शामिल होना बता रहे थे। इसी तरह समर सिंह सेक्टर 65 से जेवर एयरपोर्ट तक पॉड टैक्सी चला रहे थे जबकि सुधीर कुमार बता रहे हैं कि एनआईटी एक, दो, तीन और पांच से ग्रेटर फरीदाबाद, नहर पार के बीच पॉड टैक्सी चलाई जाएगी। दोनों अधिकारियों के दावों से यह तो तय है कि कोई एक झूठ बोल रहा है या दोनों ही झूठे हैं। सुधीर कुमार को मालूम होना चाहिए कि 2031 का मास्टर प्लान बने भी करीब छह साल बीत चुके हैं ऐसे में उसमें पॉड टैक्सी प्रोजेक्ट को शामिल किया जाना नामुमकिन है।

अपने झूठ को सच जैसा दिखाने के लिए उन्होंने यह भी बताया कि फरीदाबाद-गुडग़ांव मेट्रो प्रोजेक्ट तो सिरे नहीं चढ़ पा रहा इसलिए रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) के तहत शहर के अंदर पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। जो सुधीर कुमार जनता को मूर्ख समझ रहे हैं जनता उनको मूर्ख समझ रही है, आरआरटीएस के तहत मैट्रो की तर्ज पर दो शहरों के बीच तेज गति ट्रेन चलाए जाने का लक्ष्य है न कि पॉड टैक्सी चलाने का। उन्होंने पॉड टैक्सी की उपमा मेट्रो सेवा से करते हुए बताया कि इसकी निर्माण लागत मेट्रो से केवल चौथाई है लेकिन यह नहीं बताया कि मेट्रो में छह डिब्बे होते हैं जिनमें एक बार में अधिकतम तीन सौ लोग सफर कर सकते हैं जबकि पॉड टैक्सी में एक बार में अधिकतम छह। यह बातें तो तब हों जब पॉड टैक्सी चलने लगे, अभी तो सब कुछ हवा हवाई है।

पॉड टैक्सी चलाए जाने की तो बात हो रही है लेकिन कोई भी अधिकारी यह नहीं बता रहा कि इस प्रोजेक्ट की जरूरत का अध्ययन भी किया गया है या नहीं। यानी कि एनआईटी और नहर पार ग्रेटर फरीदाबाद के बीच रोजाना कितने यात्रियों के आवागमन का अनुमान है, उसके लिए कितने यूनिट पॉड टैक्सी की जरूरत होगी। पॉड टैक्सी का ट्रैक कहां और कैसे बनाया जाएगा, ट्रैक के लिए जरूरी आधारभूत संसाधन जमीन आदि की उपलब्धता, कितने स्टेशन बनेंगे।

इन स्टेशनों के लिए जगह चिह्नित की गई है अथवा नहीं। यह अध्ययन भी किया जाना जरूरी है कि टैक्सी ऑपरेशन की लागत होने वाली आय का अनुपात क्या होगा यानी घाटे का सौदा तो नहीं होगा। इस सबसे भी ज्यादा जरूरी है कि सरकार से प्रस्ताव को मंजूरी और बजट जारी किया जाए। इसकी संभावना नजर नहीं आती, जब सीएम अनाउंसमेंट वाले प्रोजेक्टों को सरकार बजट जारी नहीं कर रही है तो पॉड टैक्सी जैसे प्रोजेक्ट को जारी करेगी, लगता नहीं है। समझने वाली बात यह भी है कि शहर की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है ऐसे में भविष्य को देखते हुए ज्यादा सवारियां ढोने वाली सुरक्षित यातायात व्यवस्था विकसित किया जाना सही होगा न कि छह सवारियां ढोने वाली पॉड टैक्सी।

जो सरकार दस साल में गुडग़ांव और पलवल मेट्रो की दसियों बार घोषणाएं करने के बाद उन पर कोई काम नहीं कर रही वह कैसी पॉड टैक्सी चलाएगी समझा जा सकता है।

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Mazdoor Morcha
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