डॉ. रामवीर
जो टीवी पर नित्य नियम से सुनते हैं समाचार उन्हें गलत लगने लगता है दो एवं दो चार।
उनके लिए वही सच है जो बतलाती सरकार सत्यान्वेषी पत्रकार सब उन्हें लगें बेकार।
यह जो एंकर बोल रहा है किसका है यह नौकर किसके कहने से यह बातें बना रहा बढ चढ कर।
हां हां खबरें होती नहीं हैं बनाई भी जाती हैं मालिक के आदेश से टीवी पर दिखाई जाती हैं।
टीवी देख के जो जो मुझको सुना रहा था दोस्त मैंने पूछा यार तू भी क्या खाने लगा है पोस्त।
यार दुखी तो हुआ परन्तु कुछ दिन बाद ये बोला धन्यवाद प्रिय मित्र असल में मैं ही था निरा भोला।
जब से तूने गोदी मीडिया का भांडा फोडा तब से मैंने टीवी देखने से ही मुंह मोडा।
पहले अफवाहें भी मुझको लगतीं थी सन्देश अब मैं समझ गया हूं किसने बहकाया है देश।