गोबर-गोमूत्र युग

गोबर-गोमूत्र युग
February 03 16:37 2025

विष्णु नागर
बहुत लोगों को शायद याद हो कि जब 1977 में जनता पार्टी की सरकार आई थी तो कहा गया था कि ‘दूसरी आजादी’ आ गई है, हालांकि यह जितनी तेजी से आई थी, उतनी ही तेजी से चली गई। 1980 में ही ‘दूसरी आजादी’ की जगह पहली आजादी ने फिर से ले ली। तब से तीसरी आजादी की तलाश थी, जो अब जाकर सफल हुई सी लगती है। अब पता चल रहा है कि भारत न तो 1947 में आजाद हुआ था,न 1977 में उसे ‘दूसरी आजादी’ मिली थी! बकौल कंगना रनौत भारत 2014 में आजाद हुआ था मगर पता चला,यह भी गलत था।

भारत इसके भी दस साल बाद 2024 में आजाद हुआ, जब माननीय जी ने राममंदिर में राम की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की। इसे ‘असली आज़ादी’ बताया गया है। दिल थाम कर बैठिए। इस सरकार के जमाने में दस साल के अंतर से दो आजादियां आ चुकी हैं तो तीसरी भी आएगी ही और उसके बाद चौथी और पांचवीं भी आ जाए तो आश्चर्य नहीं। अब आजादी लाने के लिए जबान का ही तो इस्तेमाल करना पड़ता है, चाहो तो रोज नई आजादी लाओ! चाहो तो सुबह एक लाओ, शाम को दूसरी लाओ और मन करे तो दोपहर को भी लाओ!

जाहिर है, नई आजादियां आएंगी तो अपना नया संविधान भी लाएंगी। अभी पुराना संविधान पूजनीय होकर दुबका पड़ा है और चुपके से एक नया अलिखित संविधान लाया जा चुका है। इसमें स्वतंत्रता, समता, न्याय, और बंधुत्व सब गायब हो चुके हैं। सब हिंदू- मुस्लिम में समा चुके हैं। एक बात आपने नोट की कि ‘दूसरी आजादी’ और ‘असली आज़ादी’ के बीच एक बड़ा फर्क यह आया है कि मोरारजी देसाई के समय स्वमूत्र पान पर बल था, अब गोमूत्र सेवन पर जोर है। मोरारजी फिट रहने के लिए फल, सब्जी, दूध, दही, जूस, शहद, सूखे मेवों का सेवन पर्याप्त मात्रा में करते थे। लहसुन की पांच कलियां भी रोज चबाते थे मगर अपने अच्छे स्वास्थ्य का श्रेय वह केवल स्वमूत्र पान को देते थे।

मोरारजी गए तो उनके साथ देश से स्वमूत्र पान भी चला गया। इसके विशेषज्ञ भी न जाने कहां लापता हो गए लेकिन तब लोगों में सेंस ऑफ ह्यूमर बाकी था और सरकार में उसे सहने की क्षमता भी बची थी तो लोग उसे ‘मोरारजी कोला’ कहकर उसकी हंसी उड़ाते थे और ऐसा कहने वालों पर तब न एफआईआर दर्ज हुई और न छापा पड़ा!
आत्मनिर्भरता का नारा आज की सरकार लगा रही है मगर मूत्र के मामले में सच्ची आत्मनिर्भर तब थी, आज तो परनिर्भरता आ चुकी है। पहले जब मन किया, सेवन कर लिया। अब सब कुछ गोमाता की इच्छा पर, उनकी पसंद की जगह पर और उनके द्वारा निर्धारित समय पर निर्भर है। आजकल कुछ लोगों को ताजा-ताजा गोमूत्र पीने का शौक है तो खतरा यह भी है कि गाय माता मूत्र पिलाने के बजाय लात का सेवन करा दे! स्व से पर होने में ऐसी सब कठिनाइयां आती ही हैं।

इधर इतना गोबर और गोमूत्र का गायन -वादन है कि बड़े- बड़े इसे अपने जीवन का मिशन बना चुके हैं। आईआईटी, मद्रास की प्रतिष्ठा अभी तक बेहतरीन पढ़ाई के कारण थी, अब उसके डायरेक्टर गोमूत्र के लाभ बताने पर ही नहीं रुके, बल्कि उन्होंने उद्घोषणा की कि वह गोमूत्र सेवन करते हैं। वे इस मामले में अकेले होकर भी अकेले नहीं है।

आई आई टी, दिल्ली के पास भी गाय के गोबर, मूत्र, दूध, दही, घी आदि के लाभों पर शोध के पचास से अधिक प्रस्ताव आए और उन पर काम निश्चय ही हो रहा होगा। बस कमी यह है कि वहां कोई घोषित रूप से गोमूत्र या गोबर सेवन करने वाला सामने नहीं आया है। आईआईटी, पलक्कड़ ने गोमूत्र से बिजली उत्पादन का प्रयोग किया है हालांकि यह कह कर कि मानव मूत्र से भी बिजली उत्पादन हो सकता है, गोमूत्र के महत्व पर थोड़ा सा पलीता लगा दिया है। दूसरे तमाम आईआईटी भी गोमूत्र शोध में लगे होंगे क्योंकि अब यह राष्ट्रीय सिलेबस का हिस्सा है। इस पर अनुसंधान के लिए सरकार ने एक 19 सदस्यीय समिति बनाई थी, जिसमें संघ और विहिप के लोग भी शामिल हैं। इसकी रिपोर्ट अभी तक आ जानी चाहिए थी। आ गई होगी या आने वाली होगी तो उसमें यह तो नहीं लिखा होगा कि यह सब बकवास है। इधर दिल्ली के एक कालेज ने भी गो-पालन और गोमूत्र आदि पर शोध की पहल की है। हां, बरेली के भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के शोधकर्ताओं ने विवादी स्वर जरूर छेड़ा था कि गाय का नहीं, भैंस का मूत्र अधिक प्रभावी होता है। गाय के मूत्र में हानिकारक बैक्टीरिया अधिक होते हैं। इस संस्थान का भविष्य पता नहीं कितना उज्जवल है!

उधर जूनागढ़ का कृषि विश्वविद्यालय गोमूत्र से सोना निकालने में लगा है। हरियाणा के एक डाक्टर साहब ने गोबर खाते हुए अपना एक वीडियो जारी किया था। वह गोबर और गोमूत्र को रोगों को ठीक करने का अचूक इलाज ही नहीं बताते हैं बल्कि उनका कहना है कि प्रतिदिन एक चम्मच गोबर खाने से तन-मन पवित्र हो जाता है। जब तन और मन पवित्र हो जाता है तो धन भी पवित्र हो ही जाता होगा! यह भारत का गोमूत्र-गोबर युग है। आप एक बार गूगल सर्च करो, उसमें आदमी को होने वाले सभी रोगों का इलाज गोमूत्र और गोबर से हो सकता है, ऐसा ज्ञान मिल जाएगा। आंखों का इलाज भी इसी से हो जाता है और कैंसर का भी। यह पाचक, रक्तशोधक, रोग प्रतिरोधक, मोटापा भगावक, पीलिया निवारक, चर्मरोग समापक आदि-आदि है। आप किसी भी रोग का नाम लीजिए, सबकी दवा या तो गोमूत्र है या गोबर है। अभी यह घोषित नहीं हुआ है कि मंत्री-मुख्यमंत्री- प्रधानमंत्री बनना हो तो नियमित रूप से गोबर खाएं और गोमूत्र पियें।

दिमाग खाली हो तो वहां गोबर भरा जा सकता है, इस पुराने शोध से तो आप सब परिचित होंगे ही। किसी दिन यह घोषणा भी हो सकती है कि एम्स सहित किसी सरकारी या निजी अस्पताल की जरूरत नहीं है। गोबर खाएं, गोमूत्र पियें और भारत को 2047 में विकसित बनाएं।

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Mazdoor Morcha
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