ग़ज़ल

ग़ज़ल
May 28 05:35 2025

जंग की बातें न कर कोई और बात कर
दंगो फ़साद पर न जा कोई और बात कर

मज़मून ही सही नहीं कोई और बात कर
तंग आ गए हैं अब कोई और बात कर

अपनी अपनी ही न गा कोई और बात कर
भंग मर्यादा न हो कोई और बात कर

कि़स्सागोई हो चुकी कोई और बात कर
रंग अपना ना दिखा कोई और बात कर

बातें घुमा न बेहया कोई और बात कर
तंज़ करना है बुरा कोई और बात कर

रंजोग़म की छोड़ कर कोई और बात कर
हैं और भी मुद्दे बहुत कोई और बात कर

गिला शिकवा छोड़ कर कोई और बात कर
दे अदावत को न दावत कोई और बात कर।

डॉ. रामवीर

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Mazdoor Morcha
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