एफएमडीए एक्सईएन रमेश बागड़ी सरकारी इशारे पर बना रहा हवाई किले

एफएमडीए एक्सईएन रमेश बागड़ी सरकारी इशारे पर बना रहा हवाई किले
December 31 11:50 2024

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) जनता की गाढ़ी कमाई के अरबों रुपये विकास कार्यों के नाम पर लूट-बांट करने वाले एफएमडीए के भ्रष्ट अधिकारी अपने निकम्मेपन को छिपाने के लिए आए दिन चंडू खाने की योजनाएं पेश करने में जुटे हैं। अब एक्सईएन रमेश बागड़ी दशहरा ग्राउंड से डबुआ मंडी से पहले रेड लाइट तक फ्लाईओवर बनाए जाने की योजना लेकर आए हैं। उनका दावा है कि डीपीआर भी तैयार हो गई है और सरकार के मंजूरी मिलते ही काम भी शुरू करा देंगे।

बागड़ी के मुताबिक यह एलिवेटेड रोड दशहरा ग्राउंड से अवंती बाई चौक वहां से मस्जिद चौक होते हुए डबुआ मंडी से पहले रेड लाइट के पास उतरेगा। बागड़ी या तो हवा हवाई बातें कर रहे हैं या उन्हें शहर की भौगोलिक परिस्थितियों की जानकारी नहीं है। अवंती बाई तिराहा है न कि चौक।

जिस एलिवेटेड रोड की बात वह कर रहे हैं वह दशहरा ग्राउंड से अवंती बाई चौक तक किस रूट से गुजरेगा उन्हें बताना चाहिए। बागड़ी ने एलिवेटेड रोड का जो नक्शा बताया है वह व्यवहारिक नहीं है। रूट तय करने के लिए उन्होंने इलाके का दौरा नहीं किया और नक्शे का भी अध्ययन नहीं किया, जो मन में आया उसे प्रोजेक्ट का नाम दे दिया। यदि उन्होंने कुछ किया है तो इसकी फीजिबिलिटी रिपोर्ट और डीपीआर प्रकाशित क्यों नहीं करते? लगता है बागड़ी डीपीआर का मतलब नहीं समझते डीपीआर में पूरे प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से बयान होता है जैसे कि एलिवेटेड रोड की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई क्या होगी। प्रोजेक्ट के लिए जरूरी जमीन की उपलब्धता, जमीन अधिग्रहण में आने वाली कानूनी अड़चनें और उनका हल, निर्माण में लगने वाली सामग्री, लेबर आदि का आकलन और प्रोजेक्ट पूरा होने में लगने वाला समय सब निर्धारित किया जाता है। यह एक लंबी प्रक्रिया है, जिस तरह बागड़ी आए दिन एक के बाद एक घोषणाएं कर रहे हैं उससे तो यही नजर आ रहा है कि वह अपनी नौकरी बचाए रखने के लिए प्रोजेक्ट बनाने का पाखंड ही कर रहे हैं।

यहां एक बात और समझने वाली है कि अगर सरकार ने बागड़ी के प्रस्तावित एलिवेटेड प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी जिसकी संभावनाएं कतई नहीं हैं, तो फिर बड़बोले बडख़ल विधायक धनेश अदलखा के प्रोजेक्ट का क्या होगा। उसने भी तो सीएम को पत्र लिख कर मेट्रो चौक से ईएसआई चौक होते हुए सैनिक कॉलोनी तक एलिवेटेड रोड बनाए जाने की मांग की है। सरकार दोनों प्रोजेक्ट को तो मंजूरी देने से रही। सच्चाई तो यह है कि चाहे विधायक हों या एफएमडीए के निकम्मे अधिकारी, काम नहीं करने लेकिन काम का ढिंढोरा पीटने के सरकारी के पुराने ढर्रे पर ही चल रहे हैं।

यह सब हवाई किले शहर को जाम मुक्त करने के नाम पर बनाए जा रहे हैं जबकि यही काम बड़ी आसानी से शहर की सड़कों को अवैध कब्जों से मुक्त करा कर किया जा सकता है। विदित है कि शहर की सड़कों पर दो तिहाई भाग अवैध कब्जों व पार्किंग में दबा हुआ है, केवल एक तिहाई सड़क ही यातायात के लिए बचती है जिस पर जाम लगना स्वाभाविक है। यदि यह अवैध कब्जे हटा दिया जाएं तो चौड़ी सड़कों पर यातायात की समस्या ही न रहे, लेकिन सरकार यह नहीं करेगी और बागड़ी जैसों से हवाई किले बनवाती रहेगी।

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Mazdoor Morcha
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