ईओ सुशील की हरामखोरी जारी, क्लर्क को भी दिया बिना काम के वेतन

ईओ सुशील की हरामखोरी जारी, क्लर्क को भी दिया बिना काम के वेतन
February 14 06:40 2026

मज़दूर मोर्चा ब्यूरो
रेवाड़ी नगर परिषद का ईओ सुशील कुमार लगता है हरामखोरी की सारी हदेें तोडऩे पर उतारू है। उसने सिर्फ जेई हैप्पी को छुट्टी पर जाने के बावजूद दो माह का वेतन ही जारी नहीं किया बल्कि नगर परिषद के क्लर्क हरीश कुमार गौतम को भी दो महीने की छुट्टी देकर तनख्वाह जारी की। छुट्टी के बदले वेतन जारी करने के एवज में हैप्पी से एक लाख रुपये कीमत वाला स्मार्टफोन लिया था, हरीश ने इसके बदले क्या दिया है यह अभी पता नहीं चल सका है। जानकारों का कहना है कि ईओ साहब ने लूट कमाई का काफी बड़ा साम्राज्य फैला रखा है, जिसमें उनके चेले कर्मचारी वसूली करते हैं।
यदि सुशील के सभी कामों की गंभीरता से जांच की जाए तो बड़े-बड़े घोटाले और भ्रष्टाचार सामने आएंगे, लेकिन विधायक गीता भुक्कल का भतीजा होने के साथ-साथ दलित कवच भी पहने होने के कारण अधिकारी उसके खिलाफ कुछ भी करने से डरते हैं।

रेवाड़ी नगर परिषद कार्यालय सूत्रों के अनुसार डायरी डिस्पैच में तैनात क्लर्क हरीश कुमार गौतम 2025 में मध्य अगस्त से मध्य अक्तूबर तक लगभग दो महीने की छुट्टी पर था। इस दौरान न तो हाजिरी रजिस्टर में उसकी हाजिरी लगी न ही बायोमीट्रिक अटेंडेंस दर्ज हुईं। हरीश करीब दो माह बाद छुट्टी से लौटा, बताया जा रहा है कि ईओ सुशील कुमार ने उससे बिना काम के दो माह का वेतन देने को लेकर सौदेबाजी की, हालांकि सौदा क्या हुआ यह नहीं पता लगा लेकिन ईओ महोदय ने उसको दो माह का वेतन जारी कर दिया। नगर परिषद में चर्चा है कि एससी जाति के ईओ महोदय ने क्योंकि जिला नगर आयुक्त (डीएमसी) ब्रह्म प्रकाश के खिलाफ जाति सूचक शब्दों का प्रयोग कर परेशान करने की शिकायत के रूप में दलित हथियार का इस्तेमाल कर रखा है, इसलिए वह ईओ से सवाल-जवाब करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। सुशील कुमार इसका फायदा उठाते हुए पूरी तरह मनमर्जी चला रहा है। हालांकि बताया जा रहा है कि हैप्पी जेई का वेतन निकाले जाने की बात का खुलासा होने के बाद डीएमसी ब्रह्मप्रकाश ने ईओ से वेतन जारी करने के अधिकार वापस ले लिए हैं।

चर्चा है कि डीएमसी के नर्म रुख से हौसला अफजाई पाकर सुशील कुमार खुले आम भ्रष्ट कार्य कर रहा है, उसने शहर के दस-पंद्रह हॉस्पिटलों को यह देखे बिना कि उनमें मानक व नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं, एनओसी जारी कर दी। समझा जा सकता है कि अस्पतालों को एनओसी मुफ्त में नहीं दी गई होगी, इसके लिए काफी बड़ी कीमत वसूली गई होगी। यह सारा काम आला अधिकारियों की नजर में न आए इसलिए नगर परिषद के रजिस्टर, डिस्पैच रजिस्टर आदि अपनी कोठी पर ही रखता है और वहीं से ये सारे सफेद-काले काम किए जाते हैं। भुक्तभोगियों ने बताया कि ईओ साहब अपने साथ एक धर्मशाला की रसीद बुक साथ रखते हैं, कोई भी काम हो ग्यारह हजार से लेकर इक्यावन हजार, एक लाख जैसा क्लाइंट वैसी ही रसीद काटते हैं। यह धर्मशाला कहां है, इसकी जानकारी किसी को नहीं लेकिन बिना रसीद काटे कोई काम नहीं होता है।

हास्पिटलों को एनओसी ही नहीं ईओ साहब पर फर्जी प्रॉपर्टी आईडी बनाने के भी ढेरों आरोप हैं, इनमें सबसे चर्चित मामला सरकारी जमीन पर बने राष्ट्रीय हाई स्कूल की भूमाफिया से मिलीभगत कर प्रॉपर्टी आईडी भी बनाने का है। करीब दस करोड़ कीमत वाली इस सरकारी जमीन की प्रॉपर्टी आईडी बनाने के लिए पचास लाख रुपये में सौदा होने की चर्चाएं आम हैं। स्कूल की ही तरह भूमाफिया से मिलीभगत कर शहर में करीब एक दर्जन सरकारी जमीनों की फर्जी प्रॉपर्टी आईडी बनाए जाने की भी बातें सामने आ रही हैं। चर्चा है कि नाले की विवादित जमीन पर बनाए गए प्राइम हॉस्पिटल की प्रॉपर्टी आईडी बनाने के लिए दस लाख रुपयों की डील हुई है, ऐसे ही एप्लीकेशन नंबर 0407397843 पर बनी आईडी ३क्तत्रस्नष्ठङ्क६ में डेवलपमेंट चार्ज बचाने के लिए नौ सौ वर्ग गज को केवल पचास वर्ग गज बताया गया है। एप्लीकेशन नंबर 0407397856 पर बनी आईडी 3क्त२ष्ट9571, एप्लीकेशन नंबर 0407397897 की आईडी 3क्त०ङ्घङ्क27, एप्लीकेशन नंबर 0407397869 पर बनी आईडी 3क्त७ङ्घ६ह्र॥5 में भी इसी तरह का खेल किया गया, जाहिर है कि प्रॉपर्टी आईडी में खेल मुफ्त में तो नहीं हुआ होगा, लाखों रुपयों के वारे न्यारे हुए होंगे। ये तो हांडी के एक दो चावल हैं यदि प्रॉपर्टी आईडी की गहनता से जांच की जाए तो बहुत बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। फिलहाल, राष्ट्रीय हाईस्कूल की फर्जी प्रॉपर्टी आईडी बनाए जाने के मामले की जांच एडीसी की अगुवाई में डीआरओ और डीएमसी की तीन सदस्यीय टीम कर रही है।

नगर परिषद में यह भी चर्चा है कि ईओ साहब ने उल्टे-सीधे काम पकडऩे के लिए रॉबिन यादव और जगमिंदर राठी नामक चेले पाल रखे है। कहने को तो रॉबिन यादव नगर परिषद में एचकेआरएन का कंप्युटर ऑपरेटर है लेकिन काम साहब के वसूली एजेंट के रूप में करता है। रॉबिन यादव भी भाजपा के एक छुटभैया नेता धर्मेश यादव का पुत्र होने की बात कह कर खुद को अधिकारी से कम नहीं समझता। बताया जाता है कि रॉबिन के पिता स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के दरबार में जी हुजूरी करने, प्रोग्रामों में दरी बिछाने, कुर्सी उठाने व भीड़ इकट्ठा करने जैसे हुनर के कारण हाल ही में छुटभैया नेता बने है। रॉबिन यादव नेता पिता के कारण बेखौफ होकर ईओ सुशील कुमार के लिए दलाली का काम कर रहा है।

वहीं जगमिंदर राठी नामक सीवरमैन भी ईओ सुशील कुमार की कृपा से अपने आप को बिल्डिंग इंस्पेक्टर बता उसके लिए दलाली व अवैध उगाही करता है, सूत्र बताते हैं कि कर्मचारी जगमिंदर का भी कोई रिश्तेदार रामपुरा हाउस मे पानी पिलाने का काम करता है जिससे वह भी बेखौफ होकर ईओ की दलाली कर रहा है। सच्चाई ये है कि सुशील कुमार जैसे अधिकारी पूरे प्रदेश में हर विभाग में बैैठे हैं और खुलकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं। दरअसल, जब महकमे के मंत्री विपुल गोयल ही पच्चीस करोड़ की कीमत वाले रैनीवेल लगाने के एवज में ठेकेदार से सत्तर लाख की डिफेंडर ले सकता है तो उस महकमे में अधिकारी कर्मचारी से राजा हरिश्चंद होने की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। सुशील कुमार तो प्यादा है, पूरे शहरी स्थानीय निकाय में सरकारी खजाने को लूटने वाले बड़े बड़े मगरमच्छ पड़े हैं।

हैप्पी से अनहैप्पी हुए अधिकारी
दो महीने घर बैठ कर तनख्वाह निकालने के मामले में जेई हैप्पी के साथ अकाउंटेंट जितेंदर कुमार पर निलंबन की गाज गिरी है। शहरी स्थानीय निकाय के डायरेक्टर जनरल अशोक कुमार मीना ने इन दोनों को निलंबित कर मुनिसिपल कमेटी महेंद्रगढ़ से संबद्ध कर दिया है। पाठकों को याद दिला दें कि रेवाड़ी नगर परिषद का जेई हैप्पी सितंबर से दिसंबर तक छुट्टी पर रहा था लेकिन ईओ सुशील कुमार ने उससे एक लाख रुपये वाला स्मार्टफोन भेंट लेकर बदले में दो माह का वेतन जारी कर दिया था। मामले की जांच शुरू हो चुकी है, फिलहाल हैप्पी और अकाउंटेंट जितेंदर कुमार 10 फरवरी से निलंबन का आनंद ले रहे हैं। दोनों के निलंबन का यह अर्थ नहीं है कि ईओ सुशील कुमार बच गए हैं, सूत्र बताते हैं कि उनकी फाइल महकमे के प्रधान सचिव की टेबल पर पहुंच गई है, हालांंकि ईओ सुशील कुमार भुक्कल यह कहते घूम रहे हैं कि उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा क्योंकि उन्होंने ऊपर वालों को मैनेज कर लिया है। अब देखना ये है कि ईओ साहब भी संस्पेेंंड होते हैं या फिर वो जो दावा कर रहे हैं वह सच है।

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