मज़दूर मोर्चा ब्यूरो रेवाड़ी नगर परिषद में ईओ सुशील कुमार और जूनियर इंजीनियर हैप्पी ने गज़ब कारनामा अंजाम दे डाला। पिता की सेवा सुश्रूषा के नाम पर हैप्पी ने चार महीने की नॉन पे लीव ली और ईओ महोदय ने महज एक लाख रुपये के फोन के एवज में उसकी दो महीने की तनख्वाह भी जारी कर दी। भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि ईओ महोदय तो बाकी की दो माह की तनख्वाह भी देने वाले थे लेकिन भेद खुल गया। ईओ साहब अब अपनी सफाई देते घूम रहे हैं।
पाठकों को बताते चलें कि ये वही हैप्पी जेई है जो कुछ समय के लिए फरीदाबाद नगर निगम में भी तैनात रहा था, लेकिन यहां उससे भी बड़े मगरमच्छों ने उसकी दाल नहीं गलने दी तो उसने रेवाड़ी ट्रांसफर करवा लिया था। फरीदाबाद नगर निगम में हैप्पी के कारनामों की चर्चाएं जोरों पर है। चर्चा है कि हैप्पी ने एक अगस्त से 18 दिसंबर तक नॉन पे लीव ली थी। हैप्पी ने 19 दिसंबर को ड्यूटी ज्वाइन की लेकिन ईओ सुशील कुमार ने अपने चहेते को बिना काम के तनख्वाह देने का जुगाड़ भिड़ाया और जेई की दो महीने की तनख्वाह जारी कर दी। यह खुलासा होता नहीं लेकिन हैप्पी ने अपने किसी खास साथी को बताया कि ईओ साहब को एक लाख रुपये कीमत वाला वीवो एक्स 300 फोन गिफ्ट किया तो उन्होंने इसके बदले बिना काम के दो महीने का वेतन दिलवा दिया, बहुत शानदार अधिकारी हैं। उस खास आदमी से यह बात फरीदाबाद नगर निगम तक पहुंची।
नगर निगम में हो रही चर्चा के सत्यापन के लिए संवाददाता ने जिला नगर आयुक्त डीएमसी ब्रह्मप्रकाश से बात की, उन्होंने हैप्पी के छुट्टी पर जाने की बात तो मानी लेकिन वेतन जारी किए जाने से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि जांच कराएंगे। ईओ सुशील कुमार से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि हैप्पी छुट्टी पर गया तो था लेकिन बीच में आकर उसने ज्वाइन कर लिया था। सूत्र बताते हैं कि हैप्पी 18 दिसंबर तक अनुपस्थित रहा था। सुशील कुमार ने संवाददाता से कहा कि आप हैप्पी के समर्थन में जानना चाहते हैं या विरोध मेें, अंतत: उन्होंने समझाते हुए कहा कि इस तरह की खबर नहीं छापी जातीं। उनकी बातों से स्पष्ट हो गया कि कीमती फोन के बदले तनख्वाह का खेल हो गया।
सूत्र बताते हैं कि ईओ साहब ने अपने बचाव के लिए हैप्पी से बैक डेट में सितंबर माह में ज्वाइनिंग का पत्र ले लिया जबकि बायोमेट्रिक हाजिरी में वह लगातार अनुपस्थित था। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के युग में यदि हैप्पी के फोन की लोकेशन डिटेल ही जांच ली जाए तो स्पष्ट हो जाएगा कि वह न्रपा रेवाड़ी में काम कर रहा था या अपने घर में। कुल मिलाकर फरीदाबाद नगर निगम हो या रेवाड़ी नगर परिषद कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के इस महकमे में हर जगह हरामखोरी, भ्रष्टाचार और सरकारी खजाने की लूट मची है।
ईओ साहब के चर्चे और भी हैं रेवाड़ी नगर परिषद के ईओ सुशील कुमार खुद को कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल का भतीजा बता कर अधिकारियों पर रौब झाड़ते रहते हैं। भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि ईओ साहब एससी-एसटी एक्ट लगवाने का डर दिखा कर मनमर्जी करने में माहिर हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने परिषद के एक आला अधिकारी पर उनसे अभद्रता करने और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए अपने वाट्सएप से डीसी रेवाड़ी, चाची विधायक गीता भुक्कल और दीपेंद्र हुड्डा, डायरेक्टर अर्बन लोकल बॉडी से शिकायत भेजी थी। यही कारण है कि नगर परिषद के आला अधिकारी भी ईओ साहब के काले-सफेद पर कुछ बोलने सा जांचने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। बताया जा रहा है कि ईओ साहब खुद को फंसता देख वेतन जारी करने का सारा दोष अकाउंटेंट के मत्थे मढऩे की तरकीबें भिड़ा रहे हैं, अपने शुभिचंतकों के बीच कहते सुने गए हैं कि एकाउंटेंट ने वेतन बना कर जारी कर दिया। एकाउंटेंट वेतन बना भी दे तो जारी तो ईओ साहब के हस्ताक्षर के बाद ही होगा, समझा जा सकता है कि विधायक बुआ का रौब दिखाने वाले ईओ के आदेश पर ही या तो एकाउंटेंट ने हैप्पी का वेतन बनाया होगा या यदि उसने गलती से सैलरी जारी की तो सुशील कुमार ने बिना देखे-जांचे ही कागजों पर हस्ताक्षर कर दिए। जो भी हो हर हाल में सरकारी खजाने को ही नुकसान हुआ।