ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती के नाम पर हो रही रिश्वतखोरी बेकाबू

ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती के नाम पर हो रही रिश्वतखोरी बेकाबू
May 20 10:11 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) बीते एक साल के भीतर भीतर ये दूसरा मामला है जब एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) ने भर्ती के नाम पर तीन लाख रुपये वसूलने वाले चार लोगों को छह मई को रंगे हाथों गिरफ़्तार किया। ये दो मामले तो वे हैं जो पकड़ में आ गए और ऐसे कितने मामले होंगे जो पकड़ में आए बगैर सफलतापूर्वक सिरे चढ़ गए, कहावत भी है चोर वो जो पकड़ा जाए बाकी सब शाह।

इस मामले में नाम न छापने की शर्त पर एक होडल निवासी ने एसीबी कार्यालय में जाकर शिकायत दर्ज कराई कि उसस मेडिकल कॉलेज में स्टाफ नर्स के पद पर भरती कराने के नाम पर तीन लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई है। रिश्वतखोर गिरोह इस बात से भलीभांति परिचित था कि एसीबी वाले कभी भी रंगे हाथों पकड़ सकते हैं वे अभी भूले नहीं थे कि चंद माह पूर्व भी इसी तरह के मामले में उन जैसा एक गिरोह पकड़ा भी गया था। इसी बात के मद्देनजऱ उन्होंने पूरी सतर्कता बरतते हुए बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से वसूली करने की योजना बनाई थी। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि पुलिस वाले उनसे भी ज्यादा शातिर निकलेंगे।

योजना के अनुसार मेडिकल कॉलेज के पिछवाड़े दशहरा ग्राउंड में वसूली करने के लिए आउटसोर्सिंग कंपनी के अर्दली दीपक शर्मा को कार में बैठाया गया। तयशुदा प्रोग्राम के अनुसार जब शिकायतकर्ता से दीपक ने तीन लाख रुपये पकड़ लिए तो एसीबी वालों ने दोनों को दबोच लिया और उनकी कार में ही बैठ गए। इतना देखते ही दीपक के होश फाख़्ता हो गए, एसीबी वालों के कहने पर दीपक ने फोन कर दीनदयाल को भी बुला लिया तो वह भी लपेटे में आ गया। उन दोनों से पूछताछ करने तथा टेलीफोन पर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग के आधार पर एसीबी ने आउटसोर्स कंपनी मैनेजर योगेश शर्मा और सहायक नर्सिंग अधीक्षक हरिसिंह को भी दबोच लिया, मुकदमा दर्ज करके सभी को हवालात में बंद कर दिया।

समझने वाली बात यह है कि पकड़े गए इन चारों लोगों की औकात नहीं कि किसी को नौकरी पर रख सकें। नौकरी पर रखने का अधिकार आउटसोर्स कंपनी तथा ईएसआई कारपोरेशन के उच्चाधिकारियों के हाथ में होता है। इसी बात के मद्देनजर एसीबी ने दोनों अर्दलियों को तो न्यायिक हिरासत में जेल भिजवा दिया तथा हरिसिंह व योगेश शर्मा को गहन पूछताछ हेतु दो दिन के लिए अपनी हिरासत में ले लिया। उनसे यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि वे रिश्वत लेने के बाद किन किन अधिकारियों को आगे हिस्सापत्ती देकर कैसे नियुक्तियां दिलाते हैं और इससे पहले कितनी को दिला चुके हैं।

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Mazdoor Morcha
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