फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) एनएच तीन स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तैनात कार्डियोलॉजी के डॉक्टर राकेश वर्मा पर अनेक महिला कर्मचारियों ने छेडख़ानी के आरोप लगाए हैं। इसे लेकर मजदूर मोर्चा के 22-26 मार्च अंक में ”ठरकी डॉक्टर राकेश वर्मा को कैथलैब से भगाया गया, महिलाओं को छेड़ता था डॉक्टर काम नहीं करता था?” शीर्षक से विस्तृत समाचार भी प्रकाशित किया गया था। उसमें बताया गया था कि कैथ लैब में काम करते वक्त मध्यम रोशनी का लाभ उठाकर यह नीच प्रवृत्ति का डॉक्टर नर्सों व अन्य महिला कर्मचारियों से छेडख़ानी करता है। इससे बचने के लिए जब महिला नर्सों की जगह पुरुष नर्सों को लगाया जाने लगा तो वह ड्यूटी लगाने वालों को धमकाते हुए कहता था कि उसकी लैब में केवल महिला नर्सों को ही भेजा करें, जबकि कोई भी महिला उसके साथ काम करने को तैयार नहीं होती थी। हद तो तब पार हो गई जब इस घटिया आदमी ने एक महिला डॉक्टर पर ही हाथ डाल दिया।
डॉक्टर वर्मा ने कार्डियोलॉजी विभाग में पूरे स्टाफ पर अपना आतंक जमा रखा है। वह खुले आम कहता है कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, वह जो चाहेगा जैसा चाहेगा वैसा करेगा, उससे टकराने वाला इस अस्पताल में टिक नहीं सकेगा। अपनी इस धमकी के सबूत के तौर पर वह बताता है कि न केवल दो बेहतरीन कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टरों (अरविंद तथा बिनय पांडे) को यहां से निकलवा चुका है, बल्कि पूर्व डीन अनिल पांडे को भी निलंबित कराने का श्रेय वह लेता है। मजे की बात तो ये है कि डॉक्टर अरविंद बेहतरीन कार्डियोलॉजिस्ट होने के साथ-साथ कॉरपोरेशन के नियमित कर्मचारी थे, जबकि खुद डॉक्टर वर्मा ठेकेदारी में चल रहा है।
जब डॉक्टर वर्मा की नीच हरकतें तमाम सीमाएं लांघने लगीं तो चार-पांच महिलाओं ने इसकी शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ आईसीसी यानी भीतरी जांच कमेटी को भी कर दी। जांच कमेटी कोई निर्णय करे तब तक के लिए प्रशासन ने वर्मा को कैथ लैब की बजाय ओपीडी में ड्यूटी करने का आदेश दिया। अपनी ऐंठ में रहने वाले वर्मा ने इस आदेश की पालना नहीं की, व एक दिन को भी ओपीडी नहीं गया। दरअसल वह आता ही ग्यारह बजे के बाद है और दो बजे तक निकल लेता है। सभी डॉक्टरों व अन्य स्टाफ के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी लगाना आवश्यक है, जो इसने कभी नहीं लगाई और वेतन भी पूरा पा रहा है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसे दो अप्रैल को जांच कमेटी के सामने उपस्थित होकर अपनी सफाई में बयान देना था, लेकिन इसने जांच कमेटी के सामने पेश होने की जरूरत ही नहीं समझी। समझा जा रहा है कि अपने ऊंचे संबंधों के चलते इसने अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक से भी बीते दिनों धमकी भरी कोई बातचीत की थी। इस बाबत चिकित्सा अधीक्षक का पक्ष जानने के लिए इस संवाददाता ने कई बार फोन किया था, जो उन्होंने नहीं उठाया। यह भी पता चला है कि जांच कमेटी की अध्यक्ष को भी इसने किसी के माध्यम से धमकी भिजवाई है कि वह उनका भी तबादला करा देगा। डॉक्टर वर्मा का इतिहास खोजने पर पता चला कि इसे कार्डियोलॉजी का तो कोई ज्ञान है नहीं, लेकिन जुगाड़बाजी में महारत इतनी जबरदस्त है कि डीजीएचएस (डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज) के पद तक जा पहुंचा। यह पद इतना बड़ा होता है कि भारत सरकार के स्वास्थ्य विभाग का सचिव भी इसके सामने बौना नजर आता है। वहां इसके द्वारा की गई घपलेबाजी में बुरी तरह फंसने के बावजूद भी जेल न जाकर सफदरजंग अस्पताल में तैनात होकर नौकरी बचा ली। इसी तरह की जुगाड़बाजी में माहिर होने के चलते ये ठरकी डॉक्टर फरीदाबाद के इस बेहतरीन संस्थान को खराब करने में जुटा है। इसकी दादागिरी के चलते यहां का कार्डियोलॉजी विभाग पूरी तरह से उजड़ चुका है। यदि समय रहते इसके विरुद्ध कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई तो गंभीर परिणाम निकल सकते हैं।