दस साल तक मंत्री गूजर ने मंझावली राग अलापा अब मंत्री राजेश नागर ठोंकने लगे ताल

दस साल तक मंत्री गूजर ने मंझावली राग अलापा अब मंत्री राजेश नागर ठोंकने लगे ताल
January 06 00:45 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) वर्ष 2014 में भाजपा की सत्ता आते ही केंद्रीय सड़क मंत्री नितिन गडकरी और मंत्री कृष्णपाल गूजर ने मंझावली पुल का राग अलापा था। तब पिछली कांग्रेसी सरकारों को कोसते हुए मंत्री ने दावा किया था कि तीस साल से जो प्रोजेक्ट नहीं बन सका वह दो साल में पूरा हो जाएगा। तब गडकरी ने कहा था कि यमुना में पानी के जहाज भी चल सकें इसलिए इस पुल की ऊंचाई तीस मीटर रखी जाएगी ताकि जहाजरानी आवागमन निर्बाध हो सके। यातायात की सुविधा के लिए पुल फोर लेन बनाया जाना था।

दस साल में दो लोकसभा और दो विधानसभा चुनाव भी हो गए। मंझावली प्रोजेक्ट को अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताने वाले मंत्री कृष्णपाल गूजर ने इन दस सालों में इसका खूब ढोल बजाया, हर तीसरे चौथे महीने इसको लेकर बयान बाजी करते रहे कि अब बना और तब बना, हर बार पुल के बनने के लाभ गिनाते रहे कि इतनी बचत हो जाएगी, उतना समय बचेगा। इस काल में तीन ठेकेदार कंपनियां भी बदल गई लेकिन पुल पूरा न हो सका। हां, इसके नाम पर कृष्णपाल गूजर ने उस इलाके में प्रॉपर्टी का अपना धंधा बढिय़ा से जमा लिया। अब बारी आ गई नए-नए मंत्री बने राजेश नागर की, अब उन्होंने राग अलापना शुरू कर दिया है। पहले कृष्णपाल गूजर मंझावली पुल का निरीक्षण करते थे अब राजेश नागर करने लगे हैं।

नए नए मंत्री बने राजेश नागर मंझावली प्रोजेक्ट को अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बता रहे हैं, बीते सोमवार उन्होंने निर्माण स्थल का दौरा कर इसे 26 जनवरी को चालू किए जाने की घोषणा कर दी। उन्होंने 26 जनवरी तो बताई लेकिन साल 2025 या 2026 होगा यह नहीं बताया। उन्होंने और भी बड़ा दावा किया कि बढ़ती जनसंख्या के मद्देनजर पुल को और भी ऊंचा और चौड़ा बनाए जाने के कारण प्रोजेक्ट में देरी हो रही है, यह भी दावा किया पुल को ऊंचा करने के लिए एक बार पिलर भी तोडऩे पड़े थे। यह बता कर उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की काबिलियत पर ही सवाल खड़े कर दिए। गडकरी ने तो इस पुल की ऊंचाई इतनी रखवाई थी कि नीचे से जलयान निर्बाध गुजर सकें, हालांकि गडकरी का वह दावा भी हवा हवाई ही था। इसका बेहतरीन उदाहरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वाराणसी में 13 जनवरी 2023 को जोर शोर से शुरू किए गए गंगा विलास क्रूज का है। यह क्रूज तीन दिन बाद ही छपरा में फंस गया था, कई दिनों की मशक्कत के बाद उसे निकाला जा सका था। इसके बाद न तो यह पता चल सका कि क्रूज अपने गंतव्य असम के डिब्रूगढ़ पहुंचा भी या नहीं। मोदी द्वारा चालू की गई गंगा रिवर क्रूज का यह पहला और आखिरी क्रूज था उसके बाद कोई सूचना नहीं है। भाजपाइयों की थूक में पकौड़े बनाने की आदत है। गडकरी भी यमुना में चलाने की बात कह गए थे।गडकरी के प्रोजेक्ट में पुल फोर लेन ही था, अब भी फोर लेन ही है। मंत्री राजेश नागर यह तो बता दें कि पहले चौड़ाई कितनी थी और अब कितनी हो गई।

किसी भी पुल की चौड़ाई, कनेक्टिविटी आदि, आने वाले पचास साल में होने वाली जनसंख्या वृद्धि, उसके आधार पर बढऩे वाले वाहनों की संख्या के अनुमान पर निर्धारित की जाती है। राजेश नागर की मानें तो गडकरी ने ऐसा पुल बनवाया था जो दस साल में ही बेकार हो जाता, तभी तो उसकी चौड़ाई बढ़ानी पड़ी। राजेश नागर को यह भी बताना चाहिए था कि पुल के कितने पिलर तोड़े गए, कब तोड़े गए इसमें कितने धन की बर्बादी हुई और कब दोबारा बनवाए गए। यह भी कि चौड़ाई बढ़ाने के बावजूद पुल फोर लेन ही क्यों रह गया। यदि चौड़ाई बढ़ाई गई है तो कितनी?

मंत्री राजेश नागर 26 जनवरी को पुल चालू होने का दावा कर रहे हैं। मंझावली प्रोजेक्ट की सच्चाई तो तब ही सामने आ गई थी जब निर्माण तो दूर दो साल तक डीपीआर भी बन कर तैयार नहीं हुई थी। अब भी हाल यह है कि अभी तक उत्तर प्रदेश की ओर कनेक्टिविटी ही नहीं हो पाई है। हालांकि यमुनापार भी करीब 900 मीटर जमीन हरियाणा की है उस पर तो अप्रोच रोड बनाई जा सकती है लेकिन वहां से नोएडा को जोडऩे के लिए 2.4 किलोमीटर लंबी सड़क उत्तर प्रदेश को बनानी है जिसका अभी तक कोई अता पता नहीं है। वैसे 26 जनवरी दूर नहीं है, जल्द ही पता चल जाएगा कि राजेश नागर ने कौन से वर्ष की 26 जनवरी को पूल चालू होने का दावा किया है कोई जुमले छोडऩा सीखे तो इनसे सीखे।

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Mazdoor Morcha
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