तहसीलों में भ्रष्टाचार के लिये अर्जीनवीसों को दोषी माना

तहसीलों में भ्रष्टाचार के लिये अर्जीनवीसों को दोषी माना
April 03 16:27 2022

फरीदाबाद (म.मो.) तहसील में तहसीलदारों द्वारा तमाम तरह की रजिस्ट्रीयों आदि के नाम पर जो जनता को लूटा जाता है उसके लिये खट्टर सरकार अर्जीनवीसों को दोषी मानती है। यानी कि तहसीलदार उनके ऊपर बैठे डीआरओ, एसडीएम व डिप्टी कमिश्नर तो तमाम दूध के धुले हुए हैं। इन सब की तैनाती कराने वाले राजनेता तो और भी पाक-साफ हैं। इसलिये खट्टर ने तहसीलों से भ्रष्टाचार खत्म करने के लिये अर्जीनवीसों का काम ही समाप्त कर दिया।

विदित है कि तहसील में किसी भी प्रकार का पंजीकरण कराने के लिये स्टैम्प पेपर पर पूरा प्रकरण किसी अर्जीनवीस द्वारा ही लिखा जाता है। लिखाई का यह काम हर कोई नहीं कर सकता। इसके लिये बाकायदा सरकार द्वारा आयोजित एक परीक्षा पास करनी पड़ती है, उसके बाद ही वह दस्तावेज़ लिखने को अधिकृत होता है। इस बात में कोई संदेह नहीं कि ये अर्जीनवीस ही तहसीलदारों के लिये बिचौलिये की भूमिका निभाते हुए दिन भर रिश्वत की रकम एकत्र करके शाम को तहसीलदारों के घर पहुंचा देते हैं। रिश्वतखोरी का यह धंधा निहायत ही ईमानदारी से चलता है। तहसीलदारों द्वारा प्रति रजिस्ट्री रिश्वत की दर तय कर दी जाती है जिसे ये लोग वसूल कर उन्हें सही सलामत पहुंचा देते हैं।

सरकार द्वारा अर्जीनवीसों को लाइसेंस जारी करते वक्त दस्तावेज लिखाई के रेट तय कर दिये जाते हैं, लेकिन ये इतने कम होते हैं कि कोई भी अर्जीनवीस इन रेटों पर गुजर-बसर नहीं कर सकता। ऐसे में ये लोग लिखाई के नाम पर काफी अधिक वसूली भी करते हैं। इसके अतिरिक्त दस्तावेज़ बनवाने वाले लोग कई बार कानूनी सलाह मशवरा भी इन्हीं लोगों से लेते हैं। जो अर्जीनवीस इस तरह के कामों में अधिक दक्ष होता है, लोग उसी के पास अधिक जाते हैं। इसके अलावा इस धंधे में विश्वसनीयता भी बहुत महत्वपूर्ण होती है। कोई भी व्यक्ति यह नहीं चाहता कि उसका दस्तावेज सार्वजनिक हो जाये। इसलिये विश्वासपात्र व्यक्ति से ही काम करवाया जाता है।

खट्टर की घोषित योजना के अनुसार 25 तरह के पर फॉर्मा सरकारी वेबसाइट पर लोड कर दिये जायेंगे। जरूरतमंद लोग इन्हीं में से किसी एक को चुन कर अपनी आवश्यकतानुसार भर कर ऑनलाइन तहसीलदार को भेजेंगे। इसके लिये किसी को भी तहसील में जाकर किसी से मिलने की आवश्यकता नहीं होगी। वास्तव में यह योजना लोगों को केवल बेवकूफ बनाने के लिये है। इस योजना के अनुसार भी ऑनलाइन काम भी अर्जीनवीसों द्वारा ही किया जायेगा। हां, इस योजना में अब उन्हें अपना नाम व लाइसेंस नम्बर आदि लिखने की जरूरत नहीं होगी। ऐसा करने से वे हर तरह की कानूनी जिम्मेदारी से भी मुक्त हो जायेंगे। दूसरे, बिना लाइसेंस वाले भी अपने कैफे खोल कर बैठ जायेंगे व लोगों को अपने ढंग से बेवकूफ बना कर लूटेंगे।

ऑनलाइन का ड्रामा समझने के लिये ड्राइविंग लाइसेंस व वाहनों की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को देखा जा सकता है। ऑन लाइन होने के बावजूद इन कामों के लिये लोगों को दलालों की सहायता लेकर सम्बन्धित दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। पहले तो केवल कागजी फाइल तैयार करके दफ्तर में जमा करानी होती थी, अब ऑनलाइन भी कराओ और कागजी फाइल भी बनवाओ। परिणाम स्वरूप जनता पर रिश्वत की दोहरी मार पडऩे लगी है।

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Mazdoor Morcha
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