1अक्टूबर को राज्य में मतदान होने की घोषणा के साथ ही हरियाणा सरकार को तमाम वादे ताक पर रखने का बहाना मिल गया फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) केंद्र, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में ट्रिपल इंजन की सरकार होने के बावजूद दस साल में जो मंझावली पुल बनकर तैयार नहीं हो सका, उसे सितंबर तक चालू करने का ढिंढोरा एक बार फिर बजाया जाने लगा है। उत्तर प्रदेश में इस पुल को किस सड़क से जोड़ा जाएगा अभी यह तय नहीं है, अगर पुल बन कर तैयार भी हो गया तो वहां चार किलोमीटर दूर स्थित सड़क तक वाहन कैसे पहुंचेंगे इस पर न तो कोई नेता बोलने को तैयार है और न ही अधिकारी। इसे चालू करने के नाम पर जनता को सभी धोखा दे रहे हैं।
2014 में केंद्र और राज्य में सत्ता हासिल करने के बाद मोदी-खट्टर ने खुद को बेहतर साबित करने के लिए बिना सोचे समझे परियोजनाओं की अंधाधुंध घोषणाएं कर डालीं थीं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और कृष्णपाल गूजर ने भी अगस्त 2014 में मंझावली पुल निर्माण की घोषणा की थी। तब गूूजर ने कहा था कि कांग्रेस ने 1989 में मंझावली पुल की घोषणा की थी लेकिन आज तक कुछ नहीं किया। अब उनकी सरकार दो साल में पुल बना कर यातायात चालू कर देगी। पुल बनने से होने वाले दुनिया जहान के फायदे गिना दिए। उसके न बनने आज तक जो नुकसान हुआ है उसके बारे में नहीं बोलते। दस साल बीते गए लेकिन प्रोजेक्ट आज तक पूरा नहीं हो सका।
हां, दस साल में प्रोजेक्ट की लागत 120 करोड़ से बढ़ कर 315 करोड़ हो गई। बढ़ी लागत तो जनता की गाढ़ी कमाई से वसूली जानी है, इसलिए सरकार और अधिकारियों को इसका कोई दर्द नहीं होता, हां जैसे जैसे लागत बढ़ती है हिस्सापत्ती की रकम भी उतनी बढ़ जाती है।
खट्टर से लेकर गूजर व अन्य भाजपाई दस साल में सैकड़ों बार जनता से झूठ बोल चुके हैं कि अब अगले एक दो माह में मंझावली पुल चालू होने वाला है। लोकसभा चुनाव की घोषणा होते ही इसी जनवरी में गूजर ने घोषणा की थी कि फरवरी 2024 के अंत तक मंझावली पुल पर वाहन फर्राटा भरने लगेंगे। चुनाव जीतने के बाद गूजर इस प्रोजेक्ट पर चुप्पी साध कर बैठ गए। अब विधानसभा चुनाव होने हैं तो अधिकारियों के जरिए सितंबर में शुरू होने का ढिंढोरा पिटवाया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता प्रदीप सिंह संधू के अनुसार हरियाणा की ओर से मंझावली पुल का निर्माण पूरा हो चुका है। केवल पुल बन जाने से तो वाहन दौडऩे नहीं लगते। संधू इस पुल के लिए हरियाणा और उत्तर प्रदेश की ओर बनाए जाने वाले अप्रोच रोड की स्थिति स्पष्ट नहीं करते।
सच्चाई ये है कि अभी फरीदाबाद से पुल तक पहुंचने वाले करीब 20 किलोमीटर संपर्क मार्ग का काम ही पूरा नहीं हुआ है। उत्तर प्रदेश छोर पर पुल को जोडऩे वाली करीब पांच किलोमीटर की रोड भी अभी नहीं बनी है न ही बनाने की कोई चर्चा नहीं है।
सितंबर में अगर ये बन कर तैयार भी हो गई तो वाहन इसके आगे नहीं बढ़ सकेंगे, यहां से उत्तर प्रदेश की सबसे करीब सड़क भी करीब चार किलोमीटर दूर है और योगी सरकार ने इसकी कनेक्टिविटी के लिए अभी जमीन का अधिग्रहण तक शुरू नहीें किया है। यानी आम आदमी के लिए यह प्रोजेक्ट अभी भी दूर की कौड़ी ही है। चुनाव के नजदीक नेताओं का झूठे वादे करना तो समझ में आता है लेकिन सरकारी नौकरी करने वाले अधिकारी भी भाजपा कार्यकर्ताओं की तरह झूठी-सच्ची घोषणाएं करने मेंं लगे हैं। इन्ही प्रदीप सिंह संधू ने लोकसभा चुनाव से पहले इसी पुल को फरवरी में चालू करने का दावा किया था अब विधानसभा चुनाव से पहले फिर झूठ बोल कर जनता को वरगला रहे हैँ, उन्हें भी मालूम है कि वो पूरी ताकत भी लगा दें तो भी सितंबर तो क्या अगले एक साल तक उत्तर प्रदेश से कनेक्टिविटी नहीं होने वाली है।