हाइवे पर खड़े वाहन से टकराने पर एनएचएआई पर केस दर्ज, पुलिस केवल खानापूर्ति के लिए

हाइवे पर खड़े वाहन से टकराने पर एनएचएआई पर केस दर्ज, पुलिस केवल खानापूर्ति के लिए
February 14 06:26 2026

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सात फरवरी को केएमपी (कुंडली-मानेसर-पलवल) पर खड़े ट्राले से टकराकर कैंटर-चालक की हुई मौत को लेकर पलवल पुलिस ने एनएचएआई (राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण)के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है। दरअसल, एनएचएआई जिस सड़क पर टोल वसूलता है, उस पर होने वाली किसी भी समस्या या हादसे के लिए वह जिम्मेदार है। यदि कोई वाहन सड़क पर खराब हो गया है तो एनएचएआई का दायित्व है कि टक्कर बचाने के लिए ट्रैफिक कोन लगाकर रास्ता रोके। इसके साथ ही खराब वाहन को टो करके सुरक्षित स्थान पर खड़ा करने की जिम्मेवारी भी एनएचएआई की है। राजमार्ग पर वाहन खड़ा करने के लिए बाकायदा पार्किंग बे बनाई जाती है यदि कोई वाहन इनकी जगह कहीं बेवजह ट्रैक पर रुकता है तो एनएचएआई उसका चालान भी काट सकती है। यातायात सुचारु रखने के लिए एनएचएआई की पैट्रोलिंग वैन, हादसे की स्थिति में एंबुलेंस, वाहन हटाने के लिए टोइंग सर्विस और यहां तक कि ईंधन उपलब्ध कराने की भी जिम्मेदारी है। केएमपी में ट्रैक पर खड़े ट्राले के चारों ओर यदि ट्रैफिक कोन लगा गए और समय रहते उसे सुरक्षित रूप से किनारे कर दिया जाता तो शायद यह हादसा नहीं होता, लेकिन एनएचएआई टोल वसूली के अलावा अन्य जिम्मेदारियोंं को लगता है सिर्फ औपचारिकता समझती है।

अब सवाल यह पैदा होता है कि उक्त कैंटर चालक की मृत्यु मामले में पलवल पुलिस एनएचएआई के किस अधिकारी को आरोपित बना कर गिरफ्तार करके मुकदमा चलाएगी? जाहिर है पुलिस के हाथ कुछ भी लगने वाला नहीं। पुलिस का असल काम तो यह बनता था कि अपने उस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करती जिसके अधिकार क्षेत्र में वह ट्राला खड़ा था जिसके कारण दुर्घटना हुई थी। सड़कों पर इस तरह की अवैध पार्किंग से होने वाली दुर्घटनाओं के लिए किसी भी पुलिस अधिकारी को दोषी न ठहराए जाने के चलते, इस तरह की दुर्घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।

10 फरवरी 2014 को बाटा-मोड़ स्थित हाइवे पर बने गड्ढे में पानी भरा होने तथा स्ट्रीट लाइट के न होने से स्कूटर चालक मनोज वधवा, उनकी पत्नी तथा गोद में बैठे तीन साल के बेटे पवित्र गिर गए थे। पीछे से आने वाले एक छोटे ट्रक की टक्कर से बच्चे की मृत्यु तथा पत्नी भयंकर रूप से घायल हो गई थी। पुलिस ने कार्रवाई के तौर पर सड़क निर्माता को दोषी ठहराने की बजाय, छोटे ट्रक वाले को दोषी ठहरा कर उसका चालान करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। लेकिन वधवा भी इससे संतुष्ट नहीं हुए। वे इस मामले को लेकर हाई कोर्ट तक गए जिसके आदेश पर सड़क निर्माता एनएचएआई व उसकी ठेकेदार कम्पनी को दोषी ठहराने का आदेश दिया। परन्तु दुर्भाग्य की बात यह है कि आज तक किसी भी दोषी व्यक्ति के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। हां, जिला अदालत मेें तारीख पर तारीख जरूर लग रही हैं।

दिनांक 1 फरवरी को पृथला फ्लाईओवर के निकट सड़क पर खड़े ट्रैक्टर ट्राले से ऑटो रिक्शा टकरा जाने से पांच लोग गम्भीर रूप से घायल हो गए थे। कुछ घायलों को पलवल के सिविल अस्पताल द्वारा $फरीदाबाद व दिल्ली तक भी रेफर करना पड़ा था। मज़े की बात तो यह है कि पलवल जि़ले के गदपुरी थाने में इस दुर्घटना का कोई संज्ञान तब तक नहीं लिया जब तक एक सप्ताह बाद कविता नामक घायल महिला ठीक होकर थाना गदपुरी में केस दर्ज कराने नहीं आई। इससे पुलिस की काहिली एवं निकम्मापन स्पष्ट जाहिर होता है। क्या इस मामले में भी पुलिस एनएचएआई को ही आरोपित बनाना चाहेगी अथवा ट्रैक्टर चालक एवं खुद थाना गदपुरी पुलिस को?

सर्वविदित है कि सैकड़ों-हजारों की संख्या में, रात-दिन न केवल ग्रामीण सड़कों पर बल्कि हाइवे एवं शहरी सड़कों पर भी विभिन्न प्रकार के ट्रैक्टर-ट्राले, ट्रालियां व टैंकर बेखौफ होकर ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाते देखे जा सकते हैं। इनके आगे-पीछे न तो कोई लाइटें होती हैं और न ही कोई नम्बर प्लेट तथा रिफलेक्टर आदि। इन्हें सड़क सुरक्षा से कोई लेना-देना नहीं होता। जहां ट्रैक्टर अथवा ट्रॉली बिगड़ जाए उसे वहीं बीच सड़क खड़ा करके चलते बनते हैं, उनसे टकरा कर कोई मरे या जिये इनकी बला से। ऐसी ही एक दुर्घटना दिनांक 18 अगस्त 2025 को सीकरी पुलिस चौकी के निकट भी हुई थी जिसमें एक पिकअप सवार मुस्तफा मारा गया था। लेकिन इन तमाम दुर्घटनाओं के बावजूद पुलिस के कान पर जूं तक नहीं रेंगती। आज भी शहर भर में जहां-तहां सड़क किनारे छोटे-बड़े वाहनों को खड़े देखा जा सकता है। बाटा फ्लाई आरओबी से हार्डवेयर चौक तक सड़क के दोनों ओर बड़े-बड़े ट्रक ट्रालों को, दिन-रात इस तरह खड़े देखा जा सकता है जैसे कि उन्होंने सड़क को पुलिस से खरीद रखा है। इसकी वजह से इस सड़क पर ट्रैफिक जाम लगा रहे तो लगा रहे, किसी को इसकी कोई चिंता नहीं।

  Article "tagged" as:
  Categories:
view more articles

About Article Author

Mazdoor Morcha
Mazdoor Morcha

View More Articles