छठ पूजा की आड में मुसलमानों के पेट पर लात मारता संघ परिवार

छठ पूजा की आड में मुसलमानों के पेट पर लात मारता संघ परिवार
November 02 17:43 2025

तुहिन
भाजपा के राज में भारत,खासकर उत्तर भारत में फासिस्ट संघ परिवार के आनुषंगिक हिंदुत्ववादी संगठनों का अल्पसंख्यक विशेषकर मुसलमानों के प्रति नफऱत जगजाहिर है।दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने फासीवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क्रस्स् की मौजूदगी का परिचायक ही है दूसरे धर्मो के प्रति विद्वेष।क्रस्स् के वैचारिक आधार मनुवादी हिंदुत्व के मूल में है नफऱत और विभाजन।जिसका मूल मर्म गैरकानूनी,गैर संवैधानिक और समाज के लिए खतरनाक आतंकी स्वरूप लिए है।इन फिर्कापरस्तों की बहुत सारी कारगुज़ारियों से आप परिचित ही हैं।तो अब इसमें नया है बिहार चुनाव में येन तेन प्रकारेन जीत हासिल करने के लिए छठ पूजा का राजनैतिक इस्तेमाल कर उसे बड़े पैमाने पर भुनाना।

छठ पूजा के अवसर पर भारतीय रेल ने देश के 30 रेलवे स्टेशनों पर छठ पूजा के गीत बजवाने का इंतेज़ाम किया है।ये वो स्टेशन हैं जहां से बिहारी मजदूरों से ठसाठस भरी ट्रेनें पश्चिम और दक्षिण भारत के लिए गुजरती हैं ।अब ये मत पूछिएगा कि पूरे देश में सर्वाधिक गरीब और मानव विकास सूचकांक की दृष्टि से सबसे पिछड़ा राज्य है बिहार ,तो वहां के मजदूरों को क्यों भाजपा – नीतीश कुमार की राज्य सरकार रोजगार मुहैया नहीं करवाती या ट्रेनों में भेड़ बकरियों की तरह यात्रा करने वाले बिहारी मजदूरों के लिए साल भर ट्रेनों में अनारक्षित और द्वितीय श्रेणी में ज्यादा कंपार्टमेंट उपलब्ध करवाना और बेहतर सेवाएं प्रदान करने का काम मोदी सरकार क्यों नहीं करती? इधर बंगाल चुनाव के समय जैसा उन्होंने कोलकाता में दुर्गा पूजा में भाग लिया था उसी तरह बिहार के मतदाताओं को प्रसन्न करने के लिए छठ पूजा में अपने पवित्र स्नान के लिए मोदी जी ने तो दिल्ली में पेय जल से भरे एक नकली यमुना नदी का निर्माण किया था।लेकिन इस बात के खुलासे ने उनकी उम्मीद पर पानी फेर दियाऔर वो छठ पूजा का स्नान नहीं कर पाए।

खैर आज जिस विषय पर हम बात करना चाहते हैं वह है दिल्ली में छठ पूजा के समय जारी विश्व हिंदू परिषद का फरमान।विश्व हिंदू परिषद (ङ्क॥क्क)ने ये घोषणा की है कि प्रत्येक जिले में वे स्टॉल लगाएंगे जहां पर छठ पूजा की “पवित्र विशुद्ध सामग्रियां” मिलेंगी।इसके अलावा जो हिंदू दुकानदार ,फेरीवाले या छोटे व्यापारी पूजा की सामग्री बेचेंगे उनकी दुकानों/ स्टॉल पर “सनातन प्रतिष्ठा “नामक स्टीकर चस्पा किया जाएगा।अब आप ये न पूछिएगा कि सनातन प्रतिष्ठा का छठ पूजा से क्या संबंध है,क्योंकि उत्तर आपको मालूम है।जिन दुकानों पर स्टीकर चस्पा नहीं होगा मतलब वो दुकान विधर्मियों या अल्पसंख्यक समुदाय की है।स्टीकर चस्पा करने का असल उद्देश्य ये है कि मोहल्लों में मुस्लिम दुकानदारों को चिन्हित करना और लोगों को यह बताना कि उनकी दुकानों से पूजा सामग्री न खरीदें।ये घटना चालीस के दशक में नाज़ी जर्मनी में यहूदियों के दुकानों / घरों में पीला तारा वाला स्टीकर चस्पा करने के घटना की याद दिलाता है।जो कि क्रस्स् के दूसरे सरसंघचालक गुरु गोलवलकर के अनुसार संघ परिवार के प्रेरणा स्रोत एडॉल्फ हिटलर के द्वारा यहूदियों ,अश्वेत और कम्युनिस्टों के सफाया के उद्देश्य से थोपे गए न्यूरेमबर्ग कानून के तहत किया गया था।जिससे नाज़ी पार्टी के लिए फासिस्ट जर्मनी में यहूदियों ,अश्वेत लोगों (जिन्हें हिटलर आर्य नहीं मानता था ) तथा कम्युनिस्टों को चुन चुन कर प्रताडि़त करना/ मारना आसान हो गया था।खैर हिटलर के चेलों के द्वारा नस्लीय सफाया करने का ये जुनून हम ष्ट्र्र /हृक्रष्ट के समय से देख रहे हैं।

अब ये तो संघ परिवार की फितरत है कि वह मौका मिलते ही अल्पसंख्यकों,दलितों /उत्पीडि़तों, महिलाओं और आदिवासियों पर शारीरिक आक्रमण करता है।वैसा वो इसीलिए करता है क्योंकि ऐसा विधान उनके “पूज्य संविधान मनुस्मृति” ने दिया है।लेकिन फासिस्ट संघ परिवार की विडंबना है कि वह हर जगह शारीरिक हमले या मॉबलिंच नहीं कर सकता।तब वह उपरोक्त तबकों के पेट पर लात मारने का काम करते हैं।भारत में मानवता के शत्रु इन भगवा फासिस्ट गिरोह ने उपरोक्त दोनों तरीकों के इस्तेमाल में महारत हासिल की है।जैसे अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित व्यक्ति के फ्रिज में गौ मांस रखने का अफवाह फैलाकर या गौ तस्करी का झूठा आरोप लगाकर या धर्मांतरण का झूठा आरोप लगाकर भीड़ द्वारा मार डालना सामान्य बात हो गई है।इसके अलावा मुसलमानों को मार पीट कर,धमका कर जय श्री राम नारा लगवाने को बाध्य करना भी सामान्य परिघटना है।इन सबमें भगवा गिरोह को अपार आनंद मिलता है।अब ये देखने में आ रहा है कि शारीरिक आक्रमण के साथ साथ अल्पसंख्यक समुदाय के छोटे व्यापारी या छोटे दुकानदारों का आर्थिक बहिष्कार करने जैसे बहुतेरे हथकंडों को संघ परिवार ने सफलतापूर्वक आजमाया है।

दिल्ली में ङ्क॥क्क द्वारा छठ पूजा के समय जारी फरमान कोई अलहदा घटना नहीं है।इससे पहले दिल्ली के ही एक भाजपा सांसद ने मुस्लिम दुकानदारों से कोई भी सामान न खरीदने की अपील की थी।दो साल पहले हरियाणा में ङ्क॥क्क और बजरंग दल मिलकर मुस्लिम दुकानदारों के आर्थिक बहिष्कार और गांवों से मुसलमानों को भगाने का काम जोर शोर से किया था।पिछले दो सालों से हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मुसलमानों का आर्थिक बहिष्कार और उन्हें नौकरी देने या मकान किराए पर देने में अघोषित प्रतिबंध लगाया हुआ है।इसी साल जुलाई माह में कांवड़ यात्रा के दौरान भी ङ्क॥क्क ने दिल्ली के 5000 दुकानों पर सनातनी स्टीकर चस्पा किया था।ठीक उसी समय उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राज्य सरकारों ने सड़क किनारे के ढाबे- रेस्तरां के मालिक और कर्मचारियों के नाम प्रदर्शित करने का आदेश दिया था।बाद में सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से ये घृणित प्रक्रिया बंद हुई।

लेकिन संघ परिवार पर इसका तनिक भी असर नहीं पड़ता दिख रहा है।इस बात का प्रमाण है दिल्ली में छठ पूजा के समय जारी फरमान।कोई ये सोच सकता है कि भगवा गिरोह कैसे इतनी हिम्मत या जुर्रत कर पाता है।तो इसमें कोई आश्चर्य या रहस्य नहीं है।जब देश में और अधिकांश राज्यों में सत्ता पर संघी मनुवादी फासीवादी कॉरपोरेट ताकतों का अपवित्र समाजविरोधी गठबंधन काबिज़ है तो ये स्वाभाविक है कि भगवा गुंडों के सर पर पुलिस प्रशासन के शीर्ष व्यक्तियों का हाथ है।और निर्मम जातिव्यवस्था आधारित हिंदुराष्ट्र की बस घोषणा बची है इसीलिए भगवा गिरोह उन्मादी गति से अपने नफऱती मुहिम में जुटा है।अब सवाल ये है कि कब तक ऐसे जघन्य अपराध खुलेआम होते रहेंगे? जबकि अपने शताब्दी वर्ष में क्रस्स्,देश भर में विशाल हिंदू सम्मेलन कर और देश में मौजूद सभी समुदाय “सनातनी” हैं कहने के जरिए अपने नफऱत और विभाजन के अभियान को अनवरत जारी रखने की घोषणा कर चुका है।मौजूदा हालात में अभी भी कई लोग संघी मनुवादी फासीवादी अत्याचार के खिलाफ न्यायपालिका की सक्रियता या हस्तक्षेप की उम्मीद रखते हैं।लेकिन यह बात भी दिन के उजाले की तरह साफ है कि भगवा फासिस्ट गिरोह ने देश और समाज को जो घाव दिए हैं वे अब नासूर बन चुके हैं।जिसके खिलाफ जनता को राहत मिलने के लिए जो सही समय पर कार्यवाही करनी चाहिए थी वह न तो विधायिका ने, न तो कार्यपालिका ने और न ही न्यायपालिका ने किया है।क्योंकि इन सबका फासीवादीकरण करीब करीब हो चुका है।अब ऐसे अंधकारमय परिस्थिति में शाहीन बाग आंदोलन और दिल्ली बॉर्डर के किसान आंदोलन की तरह भगवा फासिस्ट- कॉरपोरेट राज के खिलाफ ऐतिहासिक जन आंदोलन से ही उम्मीद है।

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Mazdoor Morcha
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