छात्र खुले में पढऩे को मजबूर, निर्माण के चालीस करोड़ डकारने की ताड़ में अधिकारी

छात्र खुले में पढऩे को मजबूर, निर्माण के चालीस करोड़ डकारने की ताड़ में अधिकारी
February 16 08:07 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) राइट टू एजुकेशन का पाखंड करने वाली मोदी-सैनी की डबल इंजन सरकारें बीते चार वर्षों में भी स्कूलों के जर्जर भवन नहीं बना पाई हैं। इनके निर्माण के लिए दो साल पहले ही करीब चालीस करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं लेकिन अधिकारी निर्माण नहीं करवा रहे। विभागीय सूत्रों के अनुसार चालीस करोड़ रुपये पर मिलने वाली ब्याज राशि की बंदरबांट के कारण ही काम लटकाया जा रहा है। इधर, देरी के कारण निर्माण लागत बढ़ती जा रही है, इस बहाने एक बार फिर बजट बढ़ाने का खेल किया जाएगा। भले ही कक्षा भवन न होने के कारण बच्चों को सर्दी, गर्मी, बरसात में खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़े।

शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले के बीस सरकारी विद्यालयों के भवन जर्जर होने के कारण 2020 से 2022 के बीच तोड़ दिए गए थे। इनकी जगह नए भवन, और कमरे बनाए जाने हैं। इसके लिए 2022 में ही तीस करोड़ रुपये अधिक राशि शिक्षा विभाग को जारी भी कर दी गई थी, वर्तमान में यह धनराशि चालीस करोड़ पहुंच चुकी है। इतना होने के बावजूद निर्माण कार्य आरंभ तक नहीं हुआ। खेड़ीकलां, नंगला, तिगांव, एनआईटी एक, दो, तीन व पांच, अनखीर, मेवला महाराजपुर, भांकरी, संत नगर, सेक्टर सात व आठ, सेक्टर-22, 23, अजरौंदा प्राथमिक विद्यालय और अजरौदां वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नए भवन के इंतजार में हैं। कुछ विद्यालय ऐसे हैं जिनमें सारे कमरे नहीं तोड़े गए हैं, ऐसे में उनमें दो दो कक्षाओं के बच्चों को बैठा कर पढ़ाई कराई जा रही है। कुछ स्कूलों में दो शिफ़्ट में कक्षाएं लग रही हैं लेकिन ये सारी कवायदें नाकाफी हैं। एक ही कमरे में दो कक्षाएं चलने से बच्चे कैसे पढ़ाई करते होंगे समझा जा सकता है।

एनआईटी पांच स्थित राजकीय बाल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के 14 कमरे व अन्य भवन बनाने के लिए साढ़े चार करोड़ रुपये पड़े हुए हैं लेकिन खाऊ अधिकारी टेंडर प्रक्रिया ही लटकाए हुए हैं तो काम शुरू ही नहीं हुआ। संदर्भवश पाठकों को बताते चलें कि करीब दो साल पहले गांव सेहतपुर में मास्टर यतींद्र ने साठ लाख रुपये खर्च कर इतना खराब निर्माण करवाया कि उसे इस्तेमाल किए बिना ही जर्जर घोषित कर दिया गया, फिर इसको तोडऩे में लाखों रुपये खर्च कर दिए गए। इसी तरह एनआईटी तीन नंबर और भांकरी स्कूलों में भी निर्माण के नाम पर लाखों रुपये बर्बाद कर दिए गए।

बताया जा रहा है कि हाल फिलहाल फतेहपुर तगा माध्यमिक स्कूल में भवन की मरम्मत और निर्माण के लिए अस्सी लाख रुपये आया है। काम तो शुरू नहीं हुआ लेकिन डीईओ अजीत सिंह निरीक्षण के बहाने स्कूल के चक्कर लगाने लगे हैं, समझा जा सकता है कि स्कूल के प्रति उनकी रुचि क्यों बढ़ गई है। खट्टर-सैनी सरकार के करीब ढाई साल बाद भी स्कूलों के भवन नहीं बनाए जा रहे हैं, इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इनके भवन भी सेहतपुर, एनआईटी तीन और भांकरी गांव के स्कूलों जैसे बनाकर चालीस करोड़ रुपयों की बंदरबांट कर ली जाए।

जो सरकार शिक्षकों के पद खत्म करने पर तुली हो, स्कूलों में शिक्षकों के पंद्रह हजार से अधिक पद खाली हों, एकीकरण के नाम पर स्कूल बंद कर रही हो, शिक्षा के बजट में लगातार कटौती कर रही हो उसके भ्रष्ट अफसरों से उम्मीद करना कि वे छात्र हित में स्कूल बनवाएंगे, बच्चों को पढ़ाई का अच्छा माहौल देंगे, भाजपा की कथनी करनी में अंतर के मुहावरे को ही चरितार्थ करता है। स्कूल भवनों के निर्माण को लेकर हरियाणा सरकार द्वारा अपनाई जा रही नीति समझ से बाहर है। भवन निर्माण अपने आप में ही एक तकनीकी कौशल वाली सेवा है, जिसका स्कूल अध्यापकों से कोई ताल्लुक नहीं हो सकता। इसके बावजूद स्कूल के शिक्षकों को ही निर्माण का पैसा सौंपकर उनसे अपेक्षा करना कि वे निर्माण कार्य कुशलता पूर्वक कर देंगे सिरे से ही अनुचित नजर आता है।

विदित है कि हरियाणा सरकार ने इस काम के लिए लोक निर्माण विभाग और केंद्र सरकार ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, हरियाणा पुलिस ने पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन आदि का गठन किया हुआ है लेकिन शिक्षा विभाग में इस तरह का कोई तंत्र बनाने के बजाय पूरी रकम संबंधित स्कूल के मास्टरों को सौंप दी जाती है। जिसका अधिकांश भाग नीचे से ऊपर तक तैनात अधिकारी बांट कर डकार लेते हैं। दिखावे के लिए कुछ रकम से खंडहरनुमा इमारतें खड़ी कर दी जाती हैं जिन्हें बिना कोई इस्तेमाल किए गिराने पर अलग से खर्च करना पड़ता है। मजे की बात तो यह है कि इस तरह के तमाम खेलों का खुलासा होने के बावजूद सरकारी नीति में कोई सुधार एवं परिवर्तन नहीं हो रहा। इससे स्पष्ट है कि सरकार जानबूझ कर लूट के इस धंधे को चलाए रखना चाहती है।

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Mazdoor Morcha
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