फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भ्रष्टाचारी धनेश अदलखा विधायक बनने के बाद से राजनीतिक विरोधियों से बदला लेने और आम आदमी पर अपना रौब गालिब करने के लिए प्रशासन का दुरुपयोग करने में जुटा है। चार मंजिला इमारतों के बहाने वह नगर निगम के तोडफ़ोड़ दस्ते को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। उसके इशारे पर निगम चुन चुन तोडफ़ोड़ कर रहा है जबकि मंत्री-विधायकों के खास और रसूखदारों के चार तो छोडि़ए पांच मंजिला मकानों की तरफ नजर भी नहीं की जा रही है। हरियाणा फार्मेसी काउंसिल अध्यक्ष रहते हुए नियमों की धज्जियां उड़ा कर पांच करोड़ की हेराफेरी करने का आरोपी धनेश अदलखा विधायक बनते ही नियम कानून लागू कराने के आदर्शवादी भाषण देता दिख रहा है। हाल ही में विधायक ने कहा था कि नगर निगम के नियम के खिलाफ बनाई गई कोई भी बिल्डिंग तोड़ दी जाएगी। उसका इशारा खास कर इमारतों पर अवैध रूप से बनाई गई चौथी मंजिल की ओर था।
केवल एनआईटी एक, दो, तीन और पांच में अवैध चौथी मंजिल वालो सैकड़ों मकान हैं लेकिन निगम ने गिने चुने करीब तीस मकानों के मालिकों को नोटिस भेजे। उनमें भी एनआईटी में कम और दयालनगर आदि इलाकों में ज्यादा भेजे गए। इसके बाद निगम ने तोडफ़ोड़ अभियान चलाया। 19 जुलाई को एनआईटी एक सी ब्लॉक के 55 नंबर मकान की चौथी मंजिल तुड़वा दी गई। दो दिन पहले तोडफ़ोड़ दस्ते ने दयालबाग क्षेत्र में एक मकान की चौथी मंजिल तोड़ डाली थी। बताया जाता है कि इन दोनों निर्माणों के मालिक भाजपा विरोधी थे इसलिए कार्रवाई हुई। इसी एनआईटी एक के बी ब्लॉक के मकान नंबर 33 में चौथी के ऊपर पांचवीं मंजिल भी बना डाली गई लेकिन इस पर निगम के तोडफ़ोड़ दस्ते की नजर नहीं गई। जाती भी कैसे, निर्माणकर्ता विधायक अदलखा का करीबी जो है, चुनाव में सीमा त्रिखा के प्रभाव को खत्म करते हुए अदलखा के लिए खुल कर वोट मांगे थे। ऐसे में उसका अवैध निर्माण कैसे गिराया जा सकता है।
नगर निगम को पूर्व एक्सीएन पद्मभूषण नासवा की पारिवारिक सदस्य स्वाति नासवा की चार मंजिला इमारत भी नजर नहीं आई। इस इमारत में न सिर्फ चार मंजिला फ्लैट्स बनाए गए हैं बल्कि एफएआर का खुला उल्लंघन है। मज़दूर मोर्चा में खबर प्रकाशित होने के बाद इसे सील करने का पाखंड भी किया गया था लेकिन सारी मंजिलें खूब इस्तेमाल में हैं। नगर निगम को एनआईटी तीन ई ब्लॉक का चार मंजिला मकान नंबर 199 भी नजर नहीं आता। आएगा भी कैसे, नियम कानून तोड़ कर चार मंजिला इमारत बनाने वाले ने पूर्व मेयर और वार्ड 12 की वर्तमान पार्षद सुमनबाला को कथित तौर पर किराए पर एक फ्लैट दे रखा है। पूर्व निगमायुक्त यशपाल ने इस इमारत को सील करवा दिया था लेकिन तत्कालीन महापौर महोदया को फ्लैट मिलते ही सब कुछ ओके हो गया।
ये तीन अवैध निर्माण तो बानगी हैं, इस तरह की अनेक चार मंजिला इमारतें पूरे शहर में, विशेषकर एनआईटी यानी धनेश अदलखा के विधानसभा क्षेत्र में बने हुए हैं। इनमें सत्तापक्ष, विपक्ष, उनके समर्थक, धनाढ्यों और बिल्डर आदि सबके निर्माण शामिल हैं। बताया जा रहा है कि विधायक धनेश अदलखा विपक्ष का समर्थन करने वाले बिल्डरों, धनाढ्यों को झुकाकर अपनी शरण में लाना चाहता है इसलिए यह कार्रवाई करवाई जा रही है। उसके इस कदम का असर भी हुआ बताया जा रहा है कि उगते सूरज को सलाम की तर्ज पर अनेक बिल्डर अदलखा के यहां हाजिरी बजाने लगे हैं ताकि उनके अवैध निर्माण तोडऩे की हिम्मत नगर निगम न कर पाए। सच्चाई यही है कि सैनी सरकार मेें सत्ता के संरक्षण में अवैध निर्माण, कब्जेदारी का खेल धड़ल्ले से जारी है। —————————————————————————————————————————————————————- धड़ल्ले से हो रही चौथीमंजिल की रजिस्ट्री शहर में चौथी मंजिल का निर्माण और बिक्री का खेल प्रशासनिक अधिकारियों और बिल्डर लॉबी की मिलीभगत से धड़ल्ले से जारी है। भाजपा के ट्रिपल इंजन यानी नगर निगम मेें सत्ताधारी मेयर के नजरों के सामने बिल्डर लॉबी पैसा फेक कर सब डिवीजन कराती है। फिर अवैध तरीके से प्रॉपर्टी आईडी भी बना दी जाती है, चौथी मंजिल का निर्माण होता है और फिर एसडीएम बडख़ल त्रिलोकचंद के दरबार में बड़े आराम से इस अवैध फ्लोर की रजिस्ट्री हो जाती है। चौथे फ्लोर ही नहीं स्टिल्ट पार्किंग की जगह बनाए गए फ्लैटों की भी रजिस्ट्री बिना किसी आपत्ति के हो जाती है। जाहिर है कि यह सारी अवैध कवायद हर स्तर पर मोटा नजराना चुकाने के बाद ही परवान चढ़ती है। बताया जाता है कि रजिस्ट्री के लिए जरूरी दस्तावेजों में ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट भी होता है। दस्तावेज पूरे करने के लिए फर्जी ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट लगाया जाता है, रजिस्ट्री करने वाला अधिकारी भी अच्छी तरह से जानता है कि सर्टिफिकेट फर्जी है बावजूद इसके सब ओके कर दिया जाता है।