भाजपाई ट्रिपल इंजन सरकारों का लूट कमाई मॉडल फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) लीडर से डीलर बने केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर और दस करोड़ का टिकट खरीद कर विधायक बने सतीश फागना ने डबुआ कॉलोनी में बीते तीन अगस्त को करीब चार करोड़ रुपयों की लागत वाले फव्वारे का उद्घाटन किया था, वह एक महीने भी ठीक से नहीं चला और आधे से ज्यादा बंद पड़ा है। बंद तो होना ही था क्योंकि यह फव्वारा जनता के लिए नहीं बल्कि नेताओं और अधिकारियों की लूट कमाई के लिए ही लगाया गया था। करीब एक महीने से खराब पड़े इस फव्वारे की सुधि न तो एफएमडीए के खाऊ अधिकारियों ने ली है और न ही नेताओं ने, सुधि तो कोई तब ले न जब इसको चलाने के लिए लगाया गया हो, लगाने वालों को भी पता है यह कुछ दिन चलेगा, फिर खराब होकर कुछ दिन पड़ा रहेगा और कुछ दिन बाद गायब हो जाएगा।
डबुआ में फव्वारा प्रोजेक्ट में कई करोड़ रुपये डकारे जाने की चर्चाएं आम हैं। जानकारों के अनुसार इस चार करोड़ रुपये में केवल फव्वारा लगाया गया है पाउंड नहीं, वह तो पहले से ही बना था। बस इसमें पाइप लाइन बिछा कर फव्वारे का कनेक्शन दिया गया है। मज़दूर मोर्चा ने 14 से 20 अगस्त के अंक में बताया था कि फव्वारे की कुल कीमत पचास लाख से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। यह दर ऑनलाइन रिटेल मार्केटिंग एप इंडिया मार्ट में बताई गई कीमतों और नगर निगम के कुछ ठेकेदारों के अनुमान के आधार पर बताई गई थी। सरकारी खरीद में तो जीएसटी की छूट आदि भी होती है। बावजूद इसके यदि लागत अस्सी लाख भी मान ली जाए तो करीब तीन करोड़ रुपयों की बंदरबांट हो गई। यह गुमान नहीं होना चाहिए कि 3 करोड़ 88 लाख रुपये में पार्क का सौंदर्यीकरण शामिल है। यहां फव्वारे को छोड़ कर पूरे पार्क में बड़ी बड़ी घास उगी हुई है जिसकी छंटाई तक नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि फव्वारा रोजाना शाम को आधे घंटे के लिए चला तो दिया जाता है लेकिन बीच का मुख्य फव्वारा बंद पड़ा है। यह संभव नहीं है कि फव्वारा चलाने वाले कर्मचारियों ने एफएमडीए के जिम्मेदार आला अधिकारियों को इसकी जानकारी न दी हो। कागजों पर तो ठेका कंपनी तीन साल तक फव्वारे का मेंटिनेंस करेगी, तो फिर अधिकारियों ने बंद फव्वारे चालू करने के लिए ठेकेदार को आदेश क्यों नहीं दिया। देंगे कैसे, जब सारा धन तो आपस में बंदरबांट कर लिया गया और ठेकेदार को सिर्फ फव्वारे की कीमत, स्थापना आदि की रकम के अलावा पांच दस फीसद का टुकड़ा डाला गया हो। कोई भी अपनी जेब से पैसे लगाकर तीन साल तक फव्वारा चलाने से रहा।
यह भी चर्चा है कि फव्वारे का उद्घाटन करने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी आने वाले थे, लेकिन जब उन्हें पता चला कि यह प्रोजेक्ट विकास के नाम पर केेवल लूट कमाई के लिए बनाया गया है तो छवि खराब होने के डर से अंतिम समय में कार्यक्रम रद्द कर दिया। यह भी चर्चा है कि विधानसभा चुनाव में दस करोड़ कीमत की जमीन लेकर भतीजे सतीश फागना को टिकट दिलवाने और चुनाव जीतने के लिए आठ करोड़ रुपये खर्च करवाने वाले केंद्रीय मंत्री गूजर खर्च की भरपाई करवाने में जुटे हैं। दो रुपये के प्रोजेक्ट को सौ रुपये का बनाने और घटिया निर्माण करा लूट कमाई करने में माहिर एफएमडीए के अधिकारी नेताजी की मर्जी पर ऐसे विकास कार्य करवा रहे हैं जिसमें करोड़ रुपये की कमीशनबाजी हो। अंधभक्ति में डूबी जनता तो सवाल करेगी नहीं यदि कुछ जागरूक लोग मुद्दा उठाने का प्रयास करेंगे तो उन्हें देशद्रोही घोषित कर दिया जाएगा, जांच तो होनी ही नहीं है, यदि मजबूरी में कराई का नाटक करना पड़ भी गया तो सत्ता की चाटुकारिता करने वाले अधिकारियों से करा कर मामला खत्म करा दिया जाएगा।
स्थानीय नागरिक सीताराम कहते हैं कि जब फव्वारा लगाया जा रहा था तब ही घटिया सामग्री देखकर लग गया था कि जनता को केवल मूर्ख बनाया जाएगा। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि जिस तरह लाखों रुपये लगाकर सेक्टर 31 पार्क में चालू किया गया फव्वारा कुछ दिन चलने के बाद गायब कर दिया गया, उसी तरह इस लेजर वैली पार्क का फव्वारा भी गायब कर दिया जाएगा। इसकी शुरूआत बीच के मुख्य फव्वारे के बंद होने से मानी जा सकती है। एक महीने के भीतर कोई फव्वारा खराब नहीं होता, बीच का पूरा फव्वारा सिस्टम बंद कर जनता की प्रतिक्रिया देखी जा रही है। यदि सवाल नहीं पूछे गए और किसी ने आवाज नहीं उठाई तो कुछ दिन बाद मरम्मत के नाम पर फव्वारा सबके सामने खोल कर गायब कर दिया जाएगा, धीरे धीरे पूरा सिस्टम गायब कर बेच खाया जाएगा। राजकुमार कहते हैं कि पूरे पार्क में गंदगी फैली है केवल फव्वारा चला देने से तो जनता को सुविधाएं मिल नहीं जाएंगी। बड़ी बड़ी घास खड़ी होने के कारण पार्क में चलने बैठने की कोई ठीक ठाक जगह बची नहीं है, कचरे के ढेर से उठने वाली बदबू वैसे ही परेशान करती है।
पैदल ट्रैक भी साफ सुथरा नहीं रह गया है, कहीं पत्थर उखड़े हैं तो कहीं पानी भरा है, लगता है मंत्री-विधायक की खुशी के लिए एक बार फिर पार्क के सौंदर्यीकरण का करोड़ों का बजट बना कर जनता की जेब की गाढ़ी कमाई साफ की जाएगी। बेशर्म इतने हैं कि चार करोड़ का फव्वारा लगाने की बात करेेंगे लेकिन खस्ताहाल हार्डवेयर चौक के गड्ढे नहीं भरेंगे। बेशर्म इतने कि सेक्टर 87 में दो करोड़ रुपये खर्च कर ग्रीन बेल्ट बनाएंगे लेकिन बाटा रेलवे ओवर ब्रिज पर हो रहे गड्ढे नहीं भरेंगे। बेशर्मों के पास फ्लाईओवर बनाने के लिए 56 करोड़ रुपये तो हैं लेकिन हार्डवेयर चौक और बाटा आरओबी के लिए इनके पास कुछ भी नहीं है। दरअसल पैचवर्क में बहुत मोटा कमीशन नहीं बनता इसलिए हरामखोरों को जनता की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं है फव्वारे, हरियाली, फ्लाईओवर, ओपन जिम आदि में मोटी कमाई है इसलिए वो सारे कार्य करवाते हैं।