फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) राज्य के भ्रष्टाचारी पटवारियों पर कोई कार्रवाई नहीं होने वाली, उनको संरक्षण देने के लिए खुद सीएम नायब सिंह सैनी आगे आए हैं। बीते बुधवार को कैथल स्थित भाजपा कार्यालय में प्रधानमंत्री के मन की बात सुनने के बाद पत्रकारों से रूबरू हुए सीएम सैनी ने पटवारियों पर कार्रवाई के सवाल पर कहा कि यह सूची कहां से और कैसे जारी हुई है सरकार इसकी जांच करा रही है। रही बात कार्रवाई की तो वह आगे का विषय है। यानी फिलहाल पटवारी भ्रष्टाचार करने के लिए सीएम की ओर से स्वतंत्र हैं और लिस्ट जारी करने वाले अधिकारी-कर्मचारी की खोज कर उसे सजा दिए जाने की तैयारियां की जा रही हैं।
राजस्व व आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव व वित्तायुक्त अनुराग रस्तोगी के कार्यालय से बीते सप्ताह बृहस्पतिवार को सभी उपायुक्तों को प्रदेश के भ्रष्ट पटवारियों की सूची जारी की गई थी। पत्र में सभी जिला उपायुक्तों से इन भ्रष्ट पटवारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई कर 15 दिन के अंदर रिपोर्ट तलब की गई थी। राजस्व मंत्री विपुल गोयल ने भी विभाग में भ्रष्टाचार की पुष्टि करते हुए बताया था कि पटवारियों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं। ऐसे पटवारियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव का यह पत्र वैसे तो गोपनीय था लेकिन किसी तरह लीक हो गया। विभाग के भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार पत्र में दिए गए तथ्य और भ्रष्ट पटवारियों के नाम खुफिया विभाग ने तैयार कर राजस्व विभाग को भेजे थे। विस्तृत रिपोर्ट में तो प्रत्येक पटवारी के रिश्वत लेने के तरीके और न्यूनतम से अधिकतम रकम तक का जिक्र है। पत्र जारी होते ही लगभग सभी जिलों के उपायुक्त ने भ्रष्टाचारी पटवारियों के खिलाफ जांच भी शुरू करा दी थी लेकिन बीते बुधवार को सीएम सैनी इन भ्रष्टाचारियों के तारणहार बन कर सामने आए। उनकी बातों से स्पष्ट है कि उन्हें भ्रष्टाचारी पटवारियों पर कार्रवाई से ज्यादा इस बात की चिंता है कि उनकी सरकार में यह लिस्ट जारी कैसे हो गई? अब उस कर्मचारी-अधिकारी की तलाश की जा रही है जिसने इस पत्र को सोशल मीडिया में वायरल कर दिया, खोज होते ही उस पर गाज गिरना तय है। भाजपा सरकार में भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देना और भ्रष्टाचार उजागर करने वाले अधिकारियों को खुड्डे लाइन लगाने का खेल इससे पहले भी हो चुका है। शहर के खुफिया विभाग ने पुलिस के 44 दलालों की सूची जारी की थी जो अपने रसूख का इस्तेमाल कर भ्रष्ट पुलिस वालों यहां तक कि थानों तक को मोटी कमाई कराते और खुद भी हिस्सापत्ती लेते। इन दलालों में केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के मामा राजपाल सहित भाजपा के कई पदाधिकारियों के नाम उजागर हुए थे।
दलालों पर कार्रवाई करने के बजाय तत्कालीन पुलिस आयुक्त से लेकर सचिव और सीएम खट्टर तक सब खुफिया विभाग के सूची बनाने वाले कर्मचारियों को तलाश करने और कार्रवाई का नाटक करते रहे, अंत में हुआ कुछ नहीं। दलालों पर आज तक कार्रवाई भी नहीं हुई। सीएम सैनी भी अपने पूर्ववर्ती खट्टर की इसी परंपरा को निभा रहे हैं भ्रष्टाचार को समाप्त करने के बजाय उसे ढंकने का काम वह भ्रष्ट पटवारियों को बचा कर करते नजर आ रहे हैं। जनता को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि भाजपा सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस, ईमानदारी और पारदर्शिता का पाखंड किया जा रहा है, उसे यदि सरकारी विभाग में काम कराना है तो पटवारी से लेकर आला अधिकारी तक रिश्वत देनी होगी, क्योंकि इन भ्रष्टाचारियों को यदि पहचान भी लिया गया तो सीएम सैनी उनके खिलाफ कार्रवाई रुकवाने के लिए खुद आगे आ जाएंगे।