फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) मुजेसर गांव के मुख्य मार्ग किनारे खुलीं अवैध मीट- चिकन मार्कैट के खिलाफ बीेते दिनों नगर निगम ने तोडफ़ोड़ की दिखावटी कार्रवाई की। इसका विरोध किसी मुसलमान ने नहीं किया बल्कि खुद को मां काली का उपासक बताने वाले भाजपा पार्षद रवि भगत ने किया। उन्होंने तुरंत ही जेई-एसडीओ को फोन कर धमकाया और कहा कि उनके इलाके में बिना उनकी इजाज़त के कोई तोडफ़ोड़ नहीं की जाएगी। अब मीट-मुर्गा मार्केट में तोडफ़ोड़ दस्ता दिख न जाए। जन प्रतिनिधि की धमकी के आगे निगम कर्मियों को झुकना पड़ा और दुकानें बदस्तूूर लगा दी गईं। भाजपा पार्षद ने अवैध मीट-चिकन मार्केट को तोडऩे से इसलिए बचाया क्योंकि ये मार्केट मुसलमानों की न होकर उनके सजातीयों की थी।
हिंदुओं के मन में मुसलमानों के प्रति भय और नफरत फैला कर वोटों का धु्रवीकरण करने वाली संघी-भाजपाई डबल इंजन सरकारें नफरती एजेंडें को गर्म रखने के लिए ट्रिपल तलाक, खाने की दुकानों पर मालिक, रसोइए और स्टाफ का नाम, वक्फ कानून, बकरीद पर हिंदू संगठनों द्वारा निगरानी आदि के जरिए अब्दुल की चूड़ी टाइट करती रही हैं। प्रदेश में ट्रिपल इंजन सरकार बनते ही अब मीट-मुर्गे के कारोबार को पशु प्रेम और नियम-कानून की आड़ में समाप्त किए जाने का खेल शुरू कर दिया गया है। इसके तहत नगर निगम की ओर से शहर में अवैध मीट-मुर्गा दुकानों को तोड़ा जा रहा है और पुलिस विभाग भी अवैध रूप से चलाई जा रही दुकानों पर छापा मारकर बड़ी मात्रा में जिंदा मुर्गे और चिकन बरामद करने के काम में जी तोड़ मेहनत कर रहा है। खास बात यह है कि मीट-मुर्गे की दुकानें बिना लाइसेंस के चल रही हैं, इसकी जांच करने की जिम्मेदारी फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) की है जबकि इन दुकानों में स्वस्थ और बीमारी मुक्त मुर्गे-पशु काटे जा रहे हैं यह सुनिश्चित करना नगर निगम के नगर स्वास्थ्य अधिकारी (एमओएच) कार्यालय का काम है।
ये दोनों विभाग तो शांत बैठे हैं लेकिन मीट-मुर्गों की दुकानें तोडऩे की कार्रवाई अवैध कब्जे के नाम पर नगर निगम कर रहा है और पुलिस इन दुकानों को अवैध बूचडख़ाना बता कर कार्रवाई कर रही है। निगम और पुलिस के आंकड़ों से बीते दिनों जितनी भी कार्रवाई हुईं उनमें सभी दुकानें मुसलमानों की थीं, इसलिए किसी ने विरोध नहीं किया। मुजेसर गांव के मुख्य मार्ग पर अवैध रूप से लग रहीं मीट-मुर्गे की दुकानों का विरोध स्थानीय निवासी काफी लंबे समय से कर रहे थे। इसके मद्देनजर बीते शनिवार को नगर निगम का तोडफ़ोड़ दस्ता वहां दिखावा करने पहुंचा था। दस्ते ने एक आध दुकानों को थोड़ा बहुत तोड़ा और दुकानें हटा लेने के दुकानदारों के आश्वासन पर लौट गया। दस्ते के लौटते ही सारे दुकानदार सजातीय पार्षद रवि भगत के पास पहुंचे, बात सुनते ही उन्होंने नगर निगम के अधिकारी को फोन मिला कर धमकी देने वाले अंदाज में पूछा कि किससे पूछ कर तोडफ़ोड़ की, अधिकारी ने शिकायतों और निगम द्वारा चलाए जा रहे अभियान का हवाला दिया। इस पर डांटते हुए कहा कि आज के बाद मेरे में इलाके में कोई तोडफ़ोड़ नहीं होगी, यदि करनी है तो पहले मुझसे इजाजत लेनी होगी। बिना इजाजत कार्रवाई की तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। मानो वह पार्षद न होकर प्रशासक है और प्रशासन को उसके आदेश का ही पालन करना होगा न कि सरकार द्वारा बनाए गए कायदे-कानून का।
सुधी पाठकों को बताते चलें कि रवि भगत बल्लबगढ़ विधायक मूलचंद शर्मा के खास चेले-चपाटियों में एक है और बजरंगदल, देव सेना जैसे कट्टरपंथी संगठनों से जुड़ कर मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने में आगे रहे हैं। मुसलमानों के मांस खाने वाले और हिंसक बता कर नफरत फैलाने वाले रवि भगत हों, मूलचंद शर्मा या संघी सीएम सैनी इन सबको मीट-मुर्गे का कारोबार करने वाले हिंदू अहिंसक और धार्मिक नजर आते हैं क्योकि ये इनका वोट बैंक हैं।