बादशाह खान जि़ले का सबसे प्रमुख व पुराना अस्पताल है। कहने को इसे 250 बेड का कहा जाता है परन्तु वास्तव में यह 125 का भी नहीं है। सामान्य परिस्थितियों में ही यहां ‘हाउसफुल’ ही रहता है। कोरोना लहर जैसी स्थिति से निपटने के लिये यहां कोई व्यवस्था नज़र नहीं आती। जो चंद बेड ऑक्सीजन पाइप लाइन से जुड़े भी हैं तो उनकी पाइन टूटी पड़ी हैं। उत्तम क्वालिटी की तरल गैस का यहां कोई भंडारण नहीं है। काम चलाऊ व्यवस्था के तौर पर एक छोटा सा प्लांट जरूर पिछली लहर के दौरान लगा दिया गया था जिसका कि कोई भरोसा नहीं किया जा सकता।
कोरोना मरीजों को भर्ती करने के लिये जोर-जुगाड़ से जो 100 बेड का एक स्थायी सा ढांचा खड़ा कर दिया गया था, उसके लिये न तो कोई स्टाफ की व्यवस्था की गई है और न ही ऑक्सीजन तथा वेंटीलेटर आदि की। इसके विपरीत, पूछे जाने पर अस्पताल के एक अधिकारी ने दावा किया कि उनके पास 300 बेड ऑक्सीजन पाइपलाइन से जुड़े हुए हैं। इनके लिये 1000 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन सप्लाई के लिये एक प्लांट व दूसरा 200 लीटर प्रति मिनट वाला प्लांट बिल्कुल चालू हालत में हैं। समय ही बतायेगा कि हकीकत क्या है? जिस जिला अस्पताल में साधारण हालात में ही मरीजों से निपटने की पर्याप्त क्षमता न हो तो वह किसी भी आपात स्थिति से कैसे निपट पायेगा? बेहतर होता यदि डीसी साहब इस अस्पताल के सुधार बाबत कोई कदम उठाने का प्रयास करते।