गुडग़ांव, अंबाला और पंचकूला हार्ट सेंटरों में भी कंडम औजारों से हुआ हृदयरोगियों का इलाज! फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) स्वास्थ्य सेवाओं को ठेके पर देने के मोदी-खट्टर सरकारों के होने वाले दुष्परिणामों का अनुमान तो बीके में हार्ट सेंटर खुलने के पहले दिन से ही लग रहा था लेकिन इनका रूप इतना वीभत्स हो जाएगा इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। इसको रोकने या होने देने का पूरा दायित्व अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी पीएमओ का बनता है, उदाहरण के लिए बीके के बगल में स्थित ईएसआई मेडिकल अस्पताल में भी आईसीयू व डायलिसिस को ठेके पर दे दिया गया था लेकिन वहां तैनात डीन ने उन ठेकेदारों को मुनाफा कमाने के लिए वह सब कुछ नहीं करने दिया जिससे उनकी मौत हो सकती थी, परिणामस्वरूप दोनों ठेकेदार समय रहते भाग खड़े हुए इसके विपरीत बीके के अफसरों ने बाकायदा मौत के सौदागर ठेकेदारों से लूट कमाई में हिस्सापत्ती ली।
नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की अपनी जिम्मेदारी से भागने वाली सरकार के स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी उससे भी दो हाथ आगे निकल गए। हार्ट सेंटर में चिकित्सा नियमों की धज्जियां खुलेआम उड़ाई जाती रहीं, गरीब मरीजों को लूटा गया। इसे रोकने के बजाय सीएमओ-पीएमओ द्वारा गठित कमेटी ने हार्ट सेंटर के रिकॉर्ड, स्टोर, स्टॉक की जांच करने की ज़हमत भी न उठाई, उल्टे जो भी बिल आए हिस्सापत्ती लेकर पास कर दिए गए।
हार्ट सेंटर के अधिकारी लूट कमाई का हिस्सा बांटते थे तभी तो विश्व स्वास्थ्य संगठन और इंडियन मेडिकल काउंसिल की गाइडलाइंस की भी अनदेखी की जाती थी। इन मानक संस्थाओं की गाइडलाइंस के अनुसार एंजियोग्राफी या एंजियोप्लास्टी में इस्तेमाल होने वाले गाइड वायर, कैथेटर बलून आदि का एक बार ही इस्तेमाल किया जा सकता है, यानी प्रत्येक मरीज के लिए नया गाइड वायर, कैथेटर बलून, या डिफ़्लेशन टिप कैथेटर का इस्तेमाल किया जाना अनिवार्य है। विजिलेंस जांच में सामने आया कि हार्ट सेंटर के रजिस्टर में अनेकों केस दर्ज हैं जिनमें इस्तेमालशुदा गाइड वायर, कैथेटर बलून और डिफ़्लेशन टिप कैथेटर को दूसरे मरीज की सर्जरी में इस्तेमाल किया गया। यहां तक कि स्टेंट डालने में भी इस्तेमालशुदा सामान का फिर से उपयोग किया गया। रिकॉर्ड के अनुसार फरवरी 2018 से दिसंबर 2019 के बीच 10 हजार 465 मरीजों का इलाज किया गया। जबकि 2024 जनवरी तक 341 हृदयरोगियों की मौत हुई। जांच में करीब सौ लोगों की मौत सर्जरी का इस्तेमालशुदा सामान दोबारा प्रयोग करने के कारण होना पाया गया है।
खास बात ये है कि डब्ल्यूएचओ और एमसीआई की गाइडलाइन को धता बताते हुए हार्ट सेंटर ने अपने नियम बनाए हुए थे जिसके तहत पुराने सामान का दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। अस्पताल प्रबंधन ने यह बाकायदा अपने रिकॉर्ड में भी दर्ज किया है कि किन किन मरीजों की सर्जरी में पुराना सामान इस्तेमाल किया गया। इसका सीधा सा अर्थ है कि पीएमओ-सीएमओ द्वारा बनाई गई कमेटी ने हार्ट सेंटर के रिकॉर्ड, स्टोर की जांच की, हर चीज की जानकारी हासिल की लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं करने की कीमत वसूल कर ली। अभी तक की जांच में ऐसा कहीं सामने नहीं आया कि कमेटी ने कभी आपत्ति दर्ज की हो या पुराना सामान इस्तेमाल करने से रोका हो। यह भी समझने वाली बात है कि यदि मेडिट्रिना हॉस्पिटल के हार्ट सेंटर के नियमों में हृदयरोगियों की सर्जरी में इस्तेमाल सिंगल यूज सामान का दोबारा इस्तेमाल किया जाना सामान्य बात है तो इसका अर्थ हुआ कि केवल फरीदाबाद ही नहीं गुडग़ांव, अंबाला और पंचकूला में भी यही खेल खेला जा रहा होगा। यानी इन हार्ट सेंटरों में भी अनेक हृदयरोगियों की जान सर्जरी में पुराना सामान इस्तेमाल किए जाने के कारण गई होगी। वहां के सरकारी अस्पतालों की कमेटियों ने भी बीके की कमेटी की तरह आंखें बंद कर मरीजों को लूटने की छूट दे रखी होगी।
सरकारी सेवाओं को ठेके पर दिए जाने का परिणाम हर महकमें में घोर भ्रष्टाचार के रूप में सामने आ चुका है। अधिक टैक्स वसूली, जन कल्याण कारी कार्यों की कटौती कर खज़ाना भरने में जुटी भाजपा सरकार ने हृदयरोग जैसी गंभीर चिकित्सा सेवा भी ठेके पर देकर हृदयरोगियों को लुटने और मरने के लिए छोड़ दिया है। सरकार यदि जन कल्याण के प्रति सच में गंभीर है तो सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त मेडिकल, पैरामेडिकल, सुपरस्पेशलिटी स्टाफ की तैनाती और बेहतर आधारभूत ढांचे पर खर्च करे, साथ ही ठेका प्रणाली रोक कर युवाओं को रोजगार दे तब ही भला होगा, अन्यथा राजनीतिक पार्टियों को मोटा चंदा देने वाले पूंजीपति ठेकेदार इसी तरह जनता को लूटते और उसकी जान लेते रहेंगे।