भाजपा की डबल इंजन सरकारें बीेते आठ-नौ वर्षों से फरीदबाद-पलवल मैट्रो चलवा नहीं पाईं और सीएम नायब सैनी ने बजट में बाटा चौक से गुडग़ांव के सेक्टर 56 तक इंटरसिटी एक्सप्रेस मेट्रो की घोषणा कर दी। उनकी यह घोषणा भी मोदी-खट्टर और गूजर की तरह ही जुमला साबित होगी। सीएम सैनी को भी मालूम है कि वह बजट में झूठी घोषणा कर रहे हैं तभी तो उन्होंने इस मद में ठीक उसी तरह एक रुपये आवंटित नहीं किया जिस तरह खट्टर बीते आठ नौ साल से मेट्रो की घोषणा करते आ रहे थे।
सैनी के बयान को लेकर उडऩे वाली मीडिया ने बताया कि इससे रोजाना सवा दो लाख लोगों को गुडग़ांव आने जाने में आसानी होगी। सुधी पाठकों को बताते चलें कि जब बदरपुर-फरीदाबाद मेट्रो की घोषणा हुई थी तब यह अनुमान लगाया गया था कि प्रतिदिन दो लाख लोग यात्रा करेंगे। मैट्रो चले लगभग नौ साल पूरे हो गए लेकिन आज तक किसी भी दिन दो लाख तो छोडि़ए एक लाख लोगों ने भी यात्रा नहीं की। अभी भी खूब खींच तान कर साठ हजार यात्री प्रतिदिन का ही आंकड़ा हो पाता है, घाटे का सौदा होने के कारण ही डीएमआरसी ने काश्मीरी गेट से बल्लभगढ़ के बीच ट्रेनों के फेरे घटा दिए। पीक समय में छह मिनट की जगह अब औसतन आठ से नौ मिनट और ऑफ पीक समय में 12 से पंद्रह मिनट पर मेट्रो आती है।
सीएम सैनी भी यह सच्चाई अच्छी तरह जानते हैं कि फरीदाबाद-गुडग़ांव प्रोजेक्ट को डीएमआरसी 2016 में ही खारिज कर चुकी है, इसका कारण सरकार द्वारा बताए गए रूट पर आबादी नहीं होना बताया गया, यानी जब आबादी ही नहीं होगी तो सवारियां नहीं मिलेंगी, आमदनी कम होने के कारण चालन लागत नहीं निकल पाएगी। इसी कारण डीएमआरसी तुगलकाबाद-महारौली-एयरपोर्ट रूट बना रही है इसके पूरा होने पर बल्लभगढ़ से बारास्ता तुगलकाबाद-महरौली होते हुए गुडग़ांव पहु्ंचना आसान और सस्ता हो जाएगा। इसके चालू होने के बावजूद इंटरसिटी एक्सप्रेस मेट्रो का ढिंढोरा पीटा जा रहा है।
संदर्भवश बताते चलें कि करीब साठ साल पहले जब गुडग़ांव जाने के लिए पहाड़ वाला मौजूदा रूट नहीं था तो बदरपुर- महरौली होते हुए ही गुडग़ांव आना जाना होता था।