फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भाजपाई सरकार को यह बात समझ में आ चुकी है कि काम करने की बजाय उसका ढ़ोल पीटने से जनता को बहलाया जा सकता है। बीते करीब दस साल से हरियाणा की भाजपा सरकार फरीदाबाद, गुडग़ांव तथा बल्लबगढ़-पलवल मेट्रो का ढ़ोल पीटते आ रहे हैं। हर तीसरे-चौथे महीने जनता को बेवकूफ बनाने के लिए बताया जाता है कि मुख्यमंत्री से मंजूरी मिल गई है, फिर कहेंगे कि केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय से मंजुरी मिल गई है, फिर कहेंगे कि फाइल चीफ सेक्रेटरी की टेबल पह पहुंच गई है, फिर बताएंगे कि वहां से फाइल निकल गई है आदि-आदि। गोदी मीडिया कोई भी सवाल किए बगैर उक्त सरकारी घोषणाओं को सुर्खियां बना-बना कर प्रकाशित करता रहता है। 30 अक्टूबर को खेल परिसर में एक प्रेसवार्ता में कुछ अधिकारियों ने विधायक मूलचंद की मौजूदगी में बल्लबगढ़-पलवल मेट्रो ट्रेन के साथ, नवनिर्मित जेवर एयरपोर्ट के लिए रैपिड मेट्रो ट्रेन का जुमला भी जोड़ दिया। अपनी आदत के मुताबिक राजनेता तथा अधिकारी इन प्रोजेक्टों से जनता को होने वाले तथाकथित बेशुमार लाभों को गिनाना नहीं भुलते। इस बार तो यह भी बता दिया गया कि बल्लबगढ़-पलवल के 24 किलोमीटर मेट्रो रेल मार्ग पर 10 स्टेशन बनेंगे। इस पर 4320 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान भी बता दिया गया है। लेकिन यह नहीं बताया कि यह रकम कहां से आएगी? यानी कौनसी सरकार अथवा विभाग खर्च करेगा?
विदित है कि जब से जेवर एयरर्पोट का निर्माण कार्य शुरू हुआ था तभी से सड़क मार्ग द्वारा उसे बल्लबगढ़ से जोडऩे का काम चल रहा है। करीब तीन साल बीत जाने के बावजूद अभी तक सड़क निर्माण का यह काम अधुरा पड़ा है। सुधी पाठक आसानी से समझ सकते हैं कि भाजपा सरकार के प्रोजेक्ट निर्माण किस गति से चलते हैं। इसी से यह भी समझा जा सकता है कि सरकार द्वारा घोषित उक्त प्रोजेक्ट जो अभी धरातल पर उतरने के निकट भी नहीं हैं तो उनका निर्माण कब तक हो पाएगा? असल बात जो ‘मज़दूर मोर्चा’ बार-बार दोहराता आ रहा है इन घोषणावीरों ने लफ्फाजी के अलावा और कुछ नहीं करना। करने की जरूरत ही कया है जब थोथी घोषणाओं, राम मन्दिर व हिन्दू-मुस्लिम एजेंडे से ही काम चल जाता हो। इन घोषवीरों से कोई यह नहीं पूछता कि एलिवेटेड यानी खम्बों पर मेट्रो ट्रेन चलाने की बजाय धरती पर चल रही साधारण व सस्ती ट्रेनों को चलाने में इन्हें क्या समस्या है? साधारण ट्रेनों को भी मेट्रो रेल की तरह हर दस या पन्द्रह मिनट पर क्यों नहीं चलाया जा सकता?