फरीदाबाद (म.मो.) राज्य भर की सवास्थ्य सेवाओं का बेड़ा गर्क होने के कारणों को समझने के लिये स्थानीय बीके अस्पताल में चल रही भारी अव्यवस्थाओं को देखना जरूरी है। राजनीतिक प्रश्रय के चलते इस अस्पताल में न तो कोई व्यवस्था है और न ही कोई अनुशासन।
नलिनी नामक महिला द्वारा प्रधानमंत्री को लिखी गई एक शिकायत 16 दिसम्बर 2022 को हरियाणा सरकार के पास जांच हेतु पहुंची है। अपनी शिकायत में महिला ने बीके अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट वीरेन्द्र सांगवान तथा स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के निजी सहायक कृष्ण भारद्वाज के विरुद्ध अति गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि वीरेन्द्र सांगवान ने ईएसआई अस्पताल सेक्टर आठ में अपनी तैनाती के दौरान एक महिला से बलात्कार किया था। पीडि़ता ने इस पर थाना सेक्टर सात में मुकदमा दर्ज कराया था। लेकिन वीरेन्द्र ने अपने तथाकथित चाचा जेपीएस सांगवान सेवा निवृत आईएएस तथा तत्कालीन डिप्टी लेबर कमिश्नर मनोरमा राणा के सहयोग से मामले को दबवा दिया। पीडि़ता का पति जिस फैक्ट्री में नौकरी करता था वहां मनोरमा राणा ने दबाव डालकर पीडि़ता को चुप करा दिया था। यद्यपि यह अपराध कम्पाऊंडेबल नहीं था फिर भी उक्त दबावों के चलते दबा दिया गया।
इसके बाद वीरेन्द्र का तबादला सीविल अस्पताल बल्लबगढ़ हो गया। वहां फिर इसने अपने आधीन ट्रेनिंग कर रही भारती नामक एक युवती से बलात्कार कर डाला, इसका मुकदमा थाना शहर बल्लबगढ में दर्ज हुआ था। सारा मामला कई दिनों तक मीडिया की सुर्खियों में बना रहा। इस बार फिर वीरेन्द्र ने अपने उन्ही चाचा जेपीएस सांगवान का सहारा लिया। इस बार जेपीएस ने अपने ससुर जो हुड्डा खाप के कोषाध्यक्ष थे, का सहारा लेकर मामले को निपटाया। शिकायत में बताया गया है कि पीडि़ता को सात लाख नकद व पक्की सरकारी नौकरी दिला कर समझौता किया गया था।
ऐसे ‘गुणवान’ एवं बलात्कारी व्यक्ति को चीफ फार्मासिस्ट बनाने के लिये 18 वरिष्ठ फार्मास्स्टिों को इग्नोर किया गया। इस खेल में स्वास्थ्य मंत्री विज के निजी सहायक कृष्ण भारद्वाज की मुख्य भूमिका रही है। इसके लिये, नलिनी की शिकायत के अनुसार उन्होंने चार लाख रुपये सांगवान से वसूले थे, जिसकी कि अब जांच की जा रही है। यूं भी भारद्वाज पर रिश्वत लेकर तबादले एवं नियुक्तियां कराने के बहुत से आरोप चर्चा में हैं। जानकार बताते हैं कि फरीदाबाद, गुडग़ांव जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर पीएमओ अथवा सिविल सर्जन लगने का रेट पांच लाख तक बताया जाता है। वह बात अलग है कि कोई ज्यादा वजनदार डॉक्टर बिना भारद्वाज के ही ऐसी तैनाती पा ले।
यह बात गले नहीं उतरती कि एक निजी सहायक ही सारा स्वास्थ्य विभाग चला रहा हो। स्वास्थ्य मंत्री विज इतने भोले व नासमझ तो नहीं हो सकते कि वे जानते ही न हों कि उनका निजी सहायक उनके मंत्रालय में क्या खेल खेल रहा है? यदि वे वाकई नासमझ नहीं हैं व सबकुछ उनकी जानकारी व रजामंदी में हो रहा है तो उगाही जाने वाली काली कमाई उन तक भी जरूर पहुंचती होगी। जाहिर है कि जिस मंत्रालय में इस तरह का खुला खेल फरूखाबादी खेला जा रहा हो तो अस्पतालों व डिस्पेंसरियों में डॉक्टर भला क्यों काम करेंगे, क्यों नहीं हर खरीदारी में मोटी-मोटी सेंधमारी करेंगे, क्यों नहीं हर तरह की लूटमारी करके गरीब मरीजों का शोषण करेंगे?
किरण के भी घनिष्ठ सम्बन्ध हैं निजी सहायक कृष्ण से गतांक में बताया गया था कि एक ठेकेदारी कर्मचारी के रूप में बीके अस्पताल में आई किरण किस प्रकार आज इस अस्पताल में छाई हुई है। जानकार बताते हैं कि उसकी शक्ति का एक बड़ा स्रोत स्वास्थ्य मंत्री विज का निजी सहायक कृष्ण भारद्वाज भी है।
अस्पताल स्टाफ के बीच में अक्सर किरण दावा करती है कि भारद्वाज साहब जब भी फरीदाबाद आते हैं तो वे उसी के घर पर रुकते हैं। देखने-सुनने में बड़ा अजीब लगता है कि इस स्तर का अधिकारी बड़े अफसरों की बजाय किरण का आतिथ्य को ज्यादा पसंद करता है। जाहिर है जिसका आतिथ्य भारद्वाज सरीखा अधिकारी स्वीकार करता हो तो अस्पताल में उसकी तूती तो बोलनी ही है, उसके खिलाफ चाहे कितने ही आरोप लगते रहें, जांच के नाटक चलते रहें, उसका कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता।
कर्मचारियों के बीच किरण यह भी कहती बताई गई है कि वीरेन्द्र सांगवान की मुलाकात भी उसी ने भारद्वाज से कराई थी। शायद इसी के बदले किरण व उसके दो साथियों (अमित व देवेन्द्र) को फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र गुडग़ांव से वीरेन्द्र ने दिलवाये थे। कुल मिला कर देखा जाय तो इस अस्पताल में भ्रष्टाचारियों व हरामखोरों का एक पूरा मकडज़ाल बिछा हुआ है। इसके लिये और कोई नहीं स्थानीय शासन-प्रशासन व राजनेता पूरी तरह से जिम्मेवार हैं। यदि ये चाहें तो यह मकडज़ाल पलक झपकते ही समाप्त हो सकता है।