फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) एसएचओ एसजीएम नगर काबुल सिंह ने बाल यौन उत्पीडऩ की घटनाओं पर अंकुश लगाने का बड़ा ही कारगर तरीका ढूंढ निकाला है, पीडि़त का केस ही दर्ज न करो, अगर दबाव बनाए तो क्रॉस केस करने की धमकी देकर आरोपी से समझौता करने को मजबूर करो। इस पर भी बात न बने तो शिकायत लेकर कूड़ेदान में डाल दो? बेचारा पीडि़त कार्रवाई का इंतजार करता रहे और आरोपी दूसरे बच्चों को शिकार बनाने के लिए खुला घूमता फिरे।
काबुल सिंह की इसी करतूत का शिकार एक परिवार दहशत और चिंता में जीने को मजबूर है। मुल्ला होटल की गली में रहने वाले एक परिवार का 14 वर्षीय किशोर बीते शनिवार को पास के पार्क में खेलने गया था। वहां करीब 35 वर्षीय रवि नामक युवक ने उसका हाथ पकड़ लिया और अश्लील ढंग से उसके शरीर पर हाथ फेरने लगा। किशोर ने शोर मचाना चाहा तो जान से मारने की धमकी देकर कोने में चलने को मजबूर करने लगा। किशोर किसी तरह हाथ छुड़ाकर भागा और घर पहुंच कर पिता को घटना के बारे में बताया।
बेटे को साथ लेकर पिता पार्क पहुंचा तो वहां रवि मिल गया। पिता ने जब उससे सवाल किए तो वह आक्रामक हो गया और मारपीट करने लगा। पिता ने भी आत्मरक्षा में पास पड़ी लकड़ी उठा कर उसका मुकाबला किया। मारपीट देख कर वहां भीड़ इकट्ठा हो गई। पार्क में मौजूद अन्य बच्चों ने रवि पर उनसे अश्लील हरकतें करने का आरोप लगाया। पीडि़त पिता लगातार 112 और एसएचओ एसजीएम नगर को उनके सीयूजी नंबर 9582200130 पर कॉल कर मदद मांगता रहा। 112 पर कॉल रिसीव ही नहीं हुई, करीब आधा घंटे बाद एक जिप्सी आई और दोनों पक्ष को थाने ले जाया गया। रवि की अश्लील हरकतों के शिकार कुछ और बच्चे भी उसकी शिकायत करने थाने पहुंचे थे। वहां पीडि़त कुछ कह पाता, रवि ने उसको पीटने का आरोप लगाते हुए शिकायत कर दी। बस फिर क्या था काबुल सिंह ने पीडि़त पक्ष को ही दोषी ठहराते हुए धमकाना शुरू कर दिया और उसकी बात सुनने की भी जहमत नहीं उठाई। साथ आए अन्य बच्चों की भी शिकायतों को दरकिनार कर काबुल सिंह अश्लील हरकत के आरोपी रवि के वकील बन गए और पीडि़त को धमकाया कि इसका मेडिकल कराके तुम्हारे खिलाफ क्रॉस केस दर्ज कर दूंगा। पीडि़त ने कहा कि दर्ज कर दीजिए लेकिन मेरी शिकायत भी तो लिखी जाए। पीछे हटते न देख काबुल सिंह ने शिकायत देने और आरोपी रवि को भी शिकायती पत्र लिख कर देने को उकसाया। दोनों से शिकायती पत्र लेकर पीडि़त पक्ष को क्रॉस केस दर्ज करने का डर दिखा कर समझौता करने का दबाव बनाया। पीडि़त ने इनकार किया तो कहा जाओ शिकायत ले ली है जांच की जाएगी।
घटना के चार दिन बाद मज़दूर मोर्चा ने एसएचओ काबुल सिंह से केस के बारे में पूछा तो उनका कहना था कि क्रॉस केस है, रवि का मेडिकल चेकअप कराके जांच की जा रही है। उनसे पूछा गया कि क्या पीडि़त बच्चे का भी मेडिकल चेकअप कराया था तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, बोले जांच की जा रही है। इधर पीडि़त पक्ष से बात की गई तो उसका कहना था कि कोई भी पूछताछ करने नहीं आया।
मुख्यमंत्री नायब सैनी प्रदेश में कानून व्यवस्था अचूक होने का ढिंढोरा पीटते घूमते हैं तो डीजीपी शत्रुजीत कपूर कहते हैं कि थाने पर आने वाले हर पीडि़त की रिपोर्ट दर्ज की जाती है। काबुल सिंह के लिए सीएम और डीजीपी की बातें कोई मायने नहीं रखतीं, उन्होंने तो ठान रखा है कि थाने का क्राइम रिकॉर्ड साफ रखने के लिए पीडि़त की रिपोर्ट दर्ज नहीं करनी है और अपराधी को छोड़ देना है। जाहिर है कि अपराधी थाने से ऐसे ही नहीं छोड़ दिए जाते, उन्हें अपनी आजादी की अच्छी खासी कीमत भी चुकानी होती है। जाहिर है कि काबुल सिंह जैसे थानेदारों की वजह से ही रवि जैसे गुंडे अपराधी समाज में पनपते व बेखौफ दनदनाते घूमने को आजाद रहते हैं।