फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम के तोडफोड़ विभाग को निगमायुक्त कार्यालय की ठीक पड़ोस में स्थित सील इमारत में निर्माण कार्य होता नजर नहीं आ रहा लेकिन जन कल्याण की शांतिपूर्वक मांग कर रहे समाजसेवियों का तंबू दिख जाता है। केंद्रीय मंत्री गूजर की सिफारिश पर तोडफ़ोड़ विभाग हासिल करने वाले नालायक जेई हर्षवर्धन चपराना ने मंगलवार को अनशनकारी बाबा रामकेवल और समाजसेवी सतीश चोपड़ा का शामियाना उखाड़ कर भगाने का असफल प्रयास किया। इसके विपरीत निगमायुक्त आवास के पास स्थित सील इमारत में निर्माण कार्य को नहीं रोका। समझा जा सकता है कि सरकार और प्रशासन की प्राथमिकताएं क्या हैं।
शहर की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए बाबा रामकेवल और सतीश चोपड़ा काफी अर्से से जन जागरूकता के साथ प्रदर्शन अभियान चला रहे हैं। करीब पच्चीस लाख की आबादी वाले शहर के बीके अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। डॉक्टरों की कमी के कारण रोजाना करीब तीस मरीज दिल्ली रेफर किए जाते हैं। चाहे टांग टूटी हो या साधारण डिलीवरी का केस हो, हर छोटे से छोटे काम के लिए दिल्ली रेफर कर दिया जाता है। इन रेफर किए गए मरीजों में से अधिकतर को 108 एंबुलेंस वालों की मिलीभगत से निजी नर्सिग होम पहुंचा दिया जाता है। जहां गरीब मरीज को इलाज के नाम पर लूटा जाता है और बिल का करीब बीस प्रतिशत कमीशन एंबुलेंस व बीके के स्टाफ को दिया जाता है। औद्योगिक नगरी होने के कारण यहां आए दिन छोटे बड़े हादसे होते रहते हैं ऐसे में एक ट्रॉमा सेंटर की जरूरत यहां लंबे समय से महसूस की जा रही है। सतीश चोपड़ा और बाबा रामकेवल भ्रष्टाचार रोकने के लिए बीके अस्पताल को रेफर मुक्त किए जाने और ट्रामा सेंटर खोलने की मांग कर रहे हैं। मांगें मनवाने के लिए बीते सोमवार से ये दोनों नगर निगम गेट के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए थे।
इन दोनों द्वारा जनहित की बातें उठाए जाने से बेशर्म सरकार को भी कुछ शर्म आने लगी, नवनिर्वाचित विधायक धनेश अदलखा को उनके विधानसभा क्षेत्र में जनहित में धरना दिया जाना शायद चुनौती नजर आया। निगमायुक्त को उंगलियों के इशारों पर नचाने में माहिर धनेश ने धरना समेटवाने का आदेश सुना दिया, फिर क्या था धनेश का चेला जेई हर्षवर्धन चपराना मंगलवार को जेसीबी लेकर प्रदर्शनकारियों का टेंट उखाडऩे पहुंच गया। धरने पर बैठे लोगों को बाहर निकलने और सामान निकालने तक की मोहलत नहीं दी गई और टेंट तोड़ डाला। बाबा रामकेवल खुले आसमान के नीचे बैठे रहे। सत्ता के इशारे पर की गई इस कार्रवाई से जागरूक नागरिकों में खासी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि सांविधानिक रूप से शांतिपूर्वक धरना देने वाले समाजसेवियों को तो बलपूर्वक हटा दिया गया लेकिन पूरे शहर में चल रही अवैध कब्जे व निर्माण गतिविधियों पर कोई अंकुश नहीं लगाया जा रहा।
निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास खुद को ईमानदार और निष्पक्ष अधिकारी साबित करने के लिए सख्त आदेश जारी करने का नाटक करती रहती हैं। चंद दिनों पहले ही उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर शहर में चल रहे अवैध निर्माण के खिलाफ सीलिंग और जांच के बाद तोडफ़ोड़ की कार्रवाई करने का आदेश दिया था। जब वो ये आदेश जारी कर रही थीं उसी समय उनके आवास यानी कैंप ऑफिस के ठीक पड़ोस में बीके-केएल मेहता कॉलेज रोड पर स्थित इमारत में अवैध रूप से निर्माण किया जा रहा था। खास बात ये है कि अवैध निर्माण के कारण नगर निगम ने इस इमारत को सील कर रखा है। होना जाना तो कुछ नहीं था मीटिंग मिनिट्स में निगमायुक्त द्वारा आदेश दिए जाने और मातहतों द्वारा उसे लागू करने की ‘कसम खानाÓ दर्ज कर लिया गया। निगमायुक्त की नाक के ठीक नीचे सील इमारत में सुबह शाम धड़ल्ले से निर्माण कार्य चल रहा है, जब प्रदर्शनकारियों के तंबू उखाड़े जा रहे थे उस समय भी उस इमारत में निर्माण जारी था लेकिन हर्षवर्धन चपराना को वह नहीं दिखा क्योंकि वहां से निगमायुक्त सहित सबको नजराना मिल चुका है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का ढिंढोरा पीटने और विकास, स्वास्थ्य सेवाओं में प्रदेश के अव्वल होने के कसीदे गढऩे वाले सीएम सैनी में अगर थोड़ी भी इंसानियत बची है तो जनहित की मांगों को पूरा करने के कदम उठाएं। राजेश खुल्लर जैसे भ्रष्टतम अधिकारियों की सलाह पर चलने वाले सीएम सैनी ऐसा कुछ करेंगे इसकी उम्मीद कम ही है।